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मुंशी प्रेमचंद की पत्रकारिता ने राष्ट्र को जगाने में निभायी अहम भूमिका

राजनांदगांव। शासकीय दिग्विजय स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय के हिंदी विभाग के तत्त्वावधान में विश्व विख्यात कथाकार प्रेमचंद की जयन्ती भावोल्लास पूर्वक मनायी गयी। प्रेरक और ज्ञानवर्धक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उपस्थित छात्र-छात्राओं को मुंशी प्रेमचंद के जीवन, संघर्ष, सृजन और उनकी जीवट पत्रकारिता पर भी अत्यंत उपयोगी जानकारी दी गयी। विभाग अध्यक्ष डॉ. शंकर मुनि राय ने प्रेमचंद के कथा साहित्य, आयोजन के संयोजक डॉ.चन्द्रकुमार जैन ने प्रेमचंद की पत्रकारिता और डॉ. बी.एन.जागृत ने उनकी ईदगाह कहानी पर प्रकाश डाला। आयोजन में विद्यार्थियों ने भी वैचारिक सहभागिता की।

प्रारम्भ में संयोजक डॉ. चन्द्रकुमार जैन ने नवीन शिक्षा सत्र को ध्यान में रखते हुए जिज्ञासु विद्यार्थियों को लेखन. सम्भाषण और सम्प्रेषण कला के रोचक गुर बताये। साथ ही डॉ. जैन ने प्रसंगवश प्रेमचंद की पत्रकारिता के विराट वैभव का परिचय करवाया। उर्दू ज़माना से लेकर मर्यादा, माधुरी, हंस, स्वदेश, आज जैसी पत्र-पत्रिकाओं में प्रेमचंद के योगदान का धाराप्रवाह विवरण देते हुए डॉ. जैन ने प्रेमचंद की लेखनी के तेज, तेवर और प्रभाव की चर्चा की। डॉ. जैन ने कहा कि महात्मा गांधी के प्रभाव से प्रेमचंद की पत्रकारिता बीती सदी के तीसरे दशक के अंत में पूरी तरह से राष्ट्र की चेतना को जागृत करने हेतु समर्पित हो गयी। उनके द्वारा संस्थापित हंस पत्रिका आज भी प्रकाशित होती है। प्रेमचंद साधारण जन के असाधारण कलमकार हैं।

डॉ. शंकर मुनि राय ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद ने भारतीय मानस और यहां की माटी को वाणी दी है। उनकी निष्ठा, साधना और लेखनी की महिमा के प्रमाण बताते हैं कि भारत की आत्मा को यथार्थ के धरातल पर समझने के लिए उन्हें बार-बार पढ़ना जरूरी है। भारतीय भाषाओं के कथा साहित्य को प्रेमचंद के बगैर समझना मुश्किल है। डॉ. जागृत ने कहा कि उपन्यास गबन, गोदान, निर्मला आज भी वास्तविकता के बेहद करीब दिखते हैं। प्रेमचंद ने अपनी कहानियों का काल्पनिक रचना संसार रचने के बजाय अपने जीवन में भी उस यथार्थ को जिया। उन्होंने ईदगाह कहानी की ख़ास चर्चा की।

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