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“मुस्लिम वोट बैंक” का ड्रामा

महोदय

दिल्ली की जामा मस्जिद  के शाही इमाम मौलाना अहमद बुखारी ने बिहार के  चुनाव पास आते ही सपा के मुखिया मुलायमसिंह पर अपने मुस्लिम वोट बैंक के दबाव से ब्लैकमेलिंग आरंभ कर दी है ।मुलायमसिंह के बिहार में अकेले चुनाव लड़ने से मौलाना बुखारी का यह सोचना कि धर्मनिरपेक्ष जनता और विशेषतौर पर मुसलमान बेचैन हो रहे है, क्या उनकी साम्प्रदायिक सोच का परिचय नहीं कराती  ?

 उन्होंने कहा कि 3 वर्ष पूर्व सांप्रदायिक ताकतों को रोकने के लिए उन्होंने मुलायमसिंह को भरपूर समर्थन दिया और आज  तक  उनकी मांगे जोकि पूर्णतः अप्रसंगिक है कि जेलो में बंद बेगुनाह मुसलमानो को छोडा जाये,जबकि यह निर्णय केवल न्यायालय के ही अधिकार क्षेत्र में आता है और सच्चर कमेटी की रिपोर्ट जिसकी  वास्तविकता संदिग्ध थी फिर भी पहले  ही सोनियानीत केंद्रीय सरकार ने ही 90% से ज्यादा लागू कर दी थी और  इसके अतिरिक्त पुलिस में  मुसलमानो की भर्ती  व अन्य आरक्षण संबन्धित मांगो आदि पर कोई कार्यवाही क्यों नहीं हुई से वे मुसलमानों के प्रति केवल सहानभूति दर्शा कर अपने को  मुस्लिमो के सबसे बड़े नेता बनाये रखना चाहते है । सबको पता है कि देश में संविधान के अनुसार ही कार्यो का पालन किया जा सकता है । किसी के वोट बैंक का दबाव लोकतंत्र में पार्टी विशेष को प्रभाव में ले सकता है पर संवैधानिक व्यवस्था को प्रभावित नहीं कर सकता।

अतःसभी राजनैतिक दलों को चाहिए कि मुस्लिम वोट बैंक के दबाव से बचे और सभी भारतीय नागरिको के लिए ही राष्ट्रहित में कार्य करें। यह भी ध्यान में रखना होगा कि आज सोशल मीडिया के माध्यम से सभी नागरिको को अच्छे बुरे का ज्ञान होने लगा है और सभी अपने अपने ज्ञान के  अनुसार देश के भविष्य की चिंता व चिंतन करने में समर्थ हो रहें है ।इसप्रकार  देशवासियों की सोई हुई शक्ति जागने से हो रही जागरुकता से ही भविष्य में लोकतंत्र की सुनिश्चित्ता को बल मिल रहा है।

विनोद कुमार सर्वोदय
नया गंज, गाज़ियाबाद

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