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‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में आईटी शिक्षकों की भूमिका’ पर राष्ट्रीय वेबीनार शिक्षक अपने आपको टेक्रोफ्रेंडली बनाये- प्रो. टोकेकर

महू (इंदौर). ‘नई शिक्षा नीति में आई टी शिक्षकों की भूमिका अहम है. यह हमें एक नये डिजीटल प्लेटफार्म से रूबरू कराती है. जो हम पढ़ा रहे हैं, उसका आउटकम हमें मिलना चाहिए’. यह बात डॉ. बीआर अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय महू एवं भारतीय शिक्षण मंडल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित वेबीनार को संबोधित करते हुए देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के डायरेक्टर आईइटी प्रो. संजय टोकेकर ने कही. प्रो. टोकेकर का कहना था कि आईटी और नॉन आईटी को अलग कर हमें शिक्षित करना होगा. उन्होंने कहा कि नए समय में आईटी शिक्षकों को अपने आपको टेक्रोफ्रेंडली बनाना होगा. उन्होंने आईटी को प्रांतीय भाषाओं से जोडऩे की बात कही.

‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में आईटी शिक्षकों की भूमिका’ पर राष्ट्रीय वेबीनार के आरंभ में डीन एवं कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो. डीके वर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया एवं विश्वविद्यालय के बारे में संक्षिप्त परिचय दिया. प्रो. वर्मा ने नए समय में आईटी की चुनौतियों और संभावनाओं पर अपना विचार रखते हुए कहा कि हम विश्व गुरु बनना है तो समय के साथ कदमताल करना होगा. उन्होंने आईटी शिक्षकों को और भी ज्यादा जानकार होने की बात कही.
वेबीनार में टेक्सीला बिजनेस स्कूल में एडवाइजर प्रो. राजेश कोठारी ने कहा कि नई शिक्षा नीति में आपकी पहचान किसी विषयवस्तु से नहीं होगी बल्कि आपकी पहचान एक बहुआयामी प्रतिभा के रूप में होगी. प्रो. कोठारी का कहना था कि हम आज कहते जरूर हैं कि हमने आईटी में प्रगति कर ली है लेकिन हम 32 करोड़ लोगों तक ही मुश्किल से पहुंच पाये हैं. उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार सबका है और निचले स्तर तक हम शिक्षा पहुंचाये. उन्होंने सवाल किया कि क्या हमने कभी सोचा है कि जिन्हें हम शिक्षित करना चाहते हैं, वह पढऩा चाहता है. अपने सारगर्भित व्याख्यान में प्रो. कोठारी ने अनेक बिंदुओं पर प्रकाश डाला और कहा कि शिक्षक की भूमिका एनईपी में महत्वपूर्ण है. एसपी पुणे यूर्निवसिटी में टेक्रालॉजी डिपार्टमेंट के डीन प्रो. आदित्य अभ्यंकर ने कहा कि जिज्ञासा जितनी अधिक होगी, हम अपने शिक्षा में उतना व्यापक प्रभाव छोड़ पाएंगे. पीपीटी प्रेजेंटस के माध्यम से प्रो. अभ्यंकर ने विभिन्न उदाहरणों से आईटी की महत्ता को बताया और कहा कि एनईपी में आईटी शिक्षकों की विशेष भूमिका है क्योंकि आने वाले समय में हम डिजीटल प्लेटफार्म पर ही काम करेंगे. राजीव गांधी टेक्रालॉजी विश्वविद्यालय में आईटी हेड प्रो. संजय सिलाकारी ने कहा सबसे पहले हमें अच्छा मनुष्य बनाने का प्रयास करना चाहिए.

सोशल मीडिया का उल्लेख करते हुए कहा कि लोग अकेले होते जा रहे हैं. कोविड के दौरान एकमात्र विकल्प ऑनलाईन एजुकेशन रह गया था. उन्होंने कहा कि लेंगवेज का बेरियर तोडऩा होगा. जब तक हम इस बैरियर को नहीं तोड़ेंगे, चुनौती सामने खड़ी रहेगी. सिक्किम मनीपाल यूर्निवसिटी की टेक्नालॉजी डिपार्टमेंट की हेड प्रो. कल्पना शर्मा ने कोरोना के चलते शिक्षा मेे काफी बदलाव है. उन्होंने कहा कि ब्लेंडेड लर्निग, ओपन डिस्टेंस एवं ऑनलाईन टीचिंग के बारे में बात करते हुए कहा कि आईटी शिक्षकों को गुणवत्ता बढ़ानी होगी.

वेबीनार का संचालन डॉ. बिंध्या तातेर ने किया और अंत में अतिथियों का आभार व्यक्त किया. परम्परानुसार ध्येय वाक्य का वाचन डॉ. मनोज गुप्ता ने किया तथा कल्याण मंत्र का वाचन श्री हर्षवर्धन ने किया. कुलसचिव ब्राउस श्री अजय वर्मा एवं ब्राउस परिवार का सक्रिय सहयोग रहा.

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