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खूबसूरत जैन मंदिर ही नहीं पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र भी है महावीर जी

राजस्थान के करौली जिले के हिण्डौन उपखण्ड में गंभीर नदी के किनारे पश्चिम तट पर चांदन गांव में श्री महावीर जी जैनियों का महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल स्थित है। इस महान तीर्थ को देखने के लिए सभी वर्गों के लोग पूरी श्रद्धा भावना से आते हैं। करौली के लाल पत्थर और संगमरमर पत्थर के मेल से बना यह मंदिर चतुष्कोण आकार में मंदिर स्थापत्य की दृष्टि से विशिष्ट है। मंदिर की दीवारों पर संगमरमर के पत्थर पर बारीक खुदाई की आकर्षक नक्काशी की गई है। यह कारीगरी पूर्ण जैन मंदिर पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र भी बन गया हैं।

मंदिर की पार्श्व वेदी में मूलनायक भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमा दर्शनीय है तथा प्रतिमा के दांयी ओर तीर्थंकर पुष्पदंत एवं बांयी ओर आदिनाथ की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। मंदिर के भीतरी एवं बाहरी प्रकोष्ठों में संगमरमर की दीवारों पर बारीक खुदाई का कार्य तथा स्वर्णिम चित्रांकन से मंदिर को प्रभावी एवं आकर्षक बनाया गया है। बाहरी परिक्रमा में कलात्मक भाव वाले उत्कीर्ण हैं। मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार की सीढ़ियां आकर्षक लगती हैं। मंदिर के मुख्य द्वार के सामने 52 फीट ऊंचा मान-स्तम्भ संगमरमर से बनाया गया है। इसके शीर्ष पर चार तीर्थंकरों की प्रतिमाएं बनाई गई हैं। प्रतिमाओं का तीन वर्ष में एक बार अभिषेक किया जाता है।

भगवान महावीर की प्रतिमा के नीचे की मंजिल में लाल पाषाण से निर्मित कलात्मक मंदिर बना है। इसे ध्यान केन्द्र के रूप में विकसित किया गया है। यहां महावीर स्वामी की प्रतिमा का एक विशाल चित्र लगाया गया है। यहां प्रकाश और तापमान को नियंत्रित करने की व्यवस्था की गई है तथा इस केन्द्र का शुभारंभ आचार्य श्री 108 विद्यानन्द जी मुनि महाराज के सानिध्य में 1 से 8 फरवरी, 1998 को आयोजित श्री महावीर जी सहस्त्राब्दी समारोह में किया गया।

भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमा के उद्भव स्थल पर कलात्मक छतरी में चरण चिन्ह स्थापित किए गए हैं। यहां दुग्धाभिषेक किया जाता है। इस छतरी के चारों ओर आकर्षक उद्यान विकसित किया गया है। चरण चिन्ह छतरी के सामने वाले भाग में 29 फीट ऊंचा ’महावीर स्तूप’ निर्मित है, जिसके फलकों पर महावीर स्वामी के उपदेश अंकित किए गए हैं। यह स्तूप भगवान महावीर के 2500वें निर्वाणोत्सव के उपलक्ष में प्रतिष्ठित किया गया। चरण चिन्ह छतरी के पाश्र्व भाग को आकर्षक बाल वाटिका का रूप दिया गया है, जहां एक बारहदरी भी बनाई गई है। यहां भक्तगण अपने बालकों के पारिवारिक संस्कार, मुण्डन आदि करवाते हैं।

प्रचलित किवदंती के मुताबिक लगभग 400 वर्ष पूर्व चांदन गांव में एक गाय का दूध गंभीर नदी के पास एक टीले पर स्वतः ही झरता था। गाय जब कई दिनों तक बिना दूध के घर पहुंचती रही तो चर्मकार ने कारण जानने के लिए गाय का पीछा किया। चर्मकार ने जब टीले पर स्वतः ही गाय के दूध को झरते हुए देखा तो उसके आश्चर्य की सीमा नहीं रही। उसने उत्सुकतावश वहां टीले की खुदाई की, तब खुदाई में भगवान महावीर की यह दिगम्बर प्रतिमा प्राप्त हुई। मूर्ति के चमत्कार और अतिशय की महिमा सम्पूर्ण क्षेत्र में फैल गई। समय का प्रवाह तेजी से बढ़ता गया और आज यह क्षेत्र सम्पूर्ण भारत में प्रमुख जैन तीर्थ बन गया है।
बताया जाता है कि भगवान महावीर की प्रतिमा से प्रभावित होेकर बसवा निवासी श्री अमर चन्द बिलाला ने इस मंदिर को निर्माण कराया।

प्रतिवर्ष चैत्र शुक्ला तेरस से वैशाख कृष्णा द्वितीया तक महावीर जयंती परयहां पांच दिवसीय भव्य लक्खी मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें देश भर से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। मेले में ध्वजारोहण, भगवान का कलशाभिषेक, जयंती जुलूस, जलयात्रा, जिनेन्द्र रथयात्रा परम्परागत ढं़ग से आयोजित किए जाते हैं। मेले का मुख्य आकर्षण जिनेन्द्र रथयात्रा होती है, जो मुख्य मंदिर से शुरू होकर गंभीर नदी के तट तक पहुंचती है। रथ का संचालन परम्परानुसार हिण्डौन के उप जिला कलक्टर राज्य सरकार के प्रतिनिधि के रूप में सारथी बनकर करते हैं। मेले में रात्रि को विविध मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यह मेला साम्प्रदायिक, राष्ट्रीय और भावनात्मक एकता का प्रतीक है। हर वर्ग के लोग श्रद्धापूर्वक भगवान के दर्शन करते हैं, जयकारे लगाते हैं और मनोतियां मनाते हैं।

मंदिर के चारों ओर दर्शनार्थियों के ठहरने के लिए कमरों का निर्माण भक्तजनों के सहयोग से करवाया गया, जिसे ’कटला’ कहा जाता है। कटले में मध्य में स्थित है यह मुख्य मंदिर। विशाल जिनालय के आकाश को छूते धवल शिखर एवं स्वर्ण कलशों पर फहराती जैन धर्म की ध्वजाएं दूर से नजर आती हैं। कटला परिसर में यात्रियों को प्रक्षाल हेतु स्नान आदि के लिए एक पूजा-स्नान गृह का निर्माण किया गया है। कटले में ही सुरूचि जलपान गृह की उत्तम व्यवस्था है। यहां पुस्तकालय, वाचनालय, बरतन व बिस्तर भण्डार, पूजा सामग्री स्थल, दूरभाष सुविधा आदि उपलब्ध हैं। कटले के बाहर प्रवेश द्वार के निकट 24 घण्टे सेवारत स्वागत कक्ष बनवाया गया है। मंदिर प्रबंधन की ओर से आयुर्वेदिक चिकित्सालय, महावीर योग प्राकृतिक चिकित्सालय एवं शोध संस्थान, अस्पताल एवं प्रसूति गृह, विकलांग पुनर्वास, जैन विद्या संस्थान, उच्च प्राथमिक विद्यालय, महिला शिक्षा आदि सामाजिक कार्यों के लिए प्रयास किए गए हैं।

श्री महावीर जी में कटले में ’कुन्दकुन्द निलय’ के अलावा डोरमेट्री के रूप में विकसित एक हजार यात्रियों के निवास के लिए ’यात्री निवास’ की सुविधा यहां आने वाले श्रद्धालुओं को उपलब्ध है। प्रबंध कार्यकारिणी द्वारा वर्धमान धर्मशाला का संचालन भी किया जाता है। इसके अतिरिक्त सन्मति धर्मशाला, जयपुर वालों की धर्मशाला, आगरा वालों की धर्मशाला, रेवाड़ी वालों की धर्मशाला सहित कई अनेक धर्मालुओं की धर्मशालाओं में ठहरने के लिए सुविधाजनक कमरे उपलब्ध हैं।

श्री महावीर जी के मुख्य महावीर स्वामी दिगम्बर जैन मंदिर के अतिरिक्त यहां चारों ओर अन्य मंदिर भी बनाए गए हैं। शांतिवीर नगर में विशाल में खड्गासन प्रतिमा के अलावा अन्य तीर्थंकरों की भव्य प्रतिमाएं हैं। इस मंदिर के सामने कीर्ति आश्रम चैत्यालय बना है। सन्मति धर्मशाला के सामने ब्रह्मचारिणी कमला बाई द्वारा पार्श्वनाथ भगवान का आकर्षक मंदिर बनाया गया है, जिसे कांच का मंदिर भी कहा जाता है। यात्री निवास से कुछ आगे ब्र. कृष्णा बाई का मुमुक्ष महिलाश्रम और जिन मंदिर भी देखने योग्य है।

श्री महावीर जी दिल्ली-मुम्बई की बड़ी रेलवे लाइन पर स्थित एक प्रमुख रेलवे स्टेशन है। यह क्षेत्र दिल्ली से 300 किमी, आगरा से 170 किमी, जयपुर से 140 किमी दूरी पर है। यहां से जयपुर, अजमेर, अलवर, तिजारा, जोधपुर, भरतपुर, ग्वालियर, दिल्ली, सोनगिरी आदि स्थानों के लिए सीधी बस सेवाएं भी उपलब्ध हैं।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवँ राजस्थान जनसंपर्क के सेवा निवृत्त अधिकारी हैं)

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