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योग पर बरसों से शोध चल रहा है बैंगलुरू के विवेकानंद योग संस्थान में

बेंगलुरू के स्वामी विवेकानंद योग अनुसंधान संस्थान (एस-व्यासा) में पिछले तीन दशक से योग के माध्यम से असाध्य बीमारियों को दूर करने पर शोध किया जा रहा है। यहां आने वाले मरीज शिविर में रहकर बीमारियों पर न केवल नियंत्रण पा रहे हैं, बल्कि उनकी अंग्रेजी दवाइयों के सेवन की मात्रा भी कम हो गई है।
 
योग को हमें किसी पंथ या सेवानिवृत्ति से जोड़कर नहीं देखना चाहिए, तभी सही मायने में इसका भरपूर लाभ उठा पाएंगे। योग आज नहीं, बल्कि युगों से चला आ रहा है। यह हमारी संस्कृति की देन है। आज योग से असाध्य बीमारियों को ठीक किया जा रहा है और लाखों मरीज इससे लाभान्वित हो रहे हैं। यह कहना है स्वामी विवेकानंद योग अनुसंधान संस्थान में सहायक प्राध्यापक डॉ. निधि चौधरी राम का।
 
उन्होंने बताया कि संस्थान में 80 के दशक से अस्थमा पर शोध शुरू किया गया था। बेंगलुरू में इस पर शोध किया गया। इसके बाद मधुमेह, कैंसर और उच्च रक्तचाप आदि बीमारियों पर शोध जारी है। अभी एस-व्यासा, आरोग्य भारती और भारतीय योग संस्था के सहयोग से अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में 21 से 27 जून तक योग सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। इसके अंतर्गत देशभर में चार अलग-अलग जोन के तहत कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसमें वृंदावन, गुवाहाटी, भोपाल और बेंगलुरू को शामिल किया गया है। उसके बाद निचले स्तर पर देश के शहर और गांव-गांव तक योग का प्रचार-प्रसार कर रोगियों को लाभ पहुँचाया जाएगा।
 
आज देशभर में मधुमेह के आंकड़े बड़ी तेजी से बढ़ रहे हैं। इसी को ध्यान में रखकर मधुमेह मुक्त भारत का संकल्प लिया गया है। इस संकल्प को पूरा करने के लिए आरोग्य भारती  के साथ एस-व्यासा द्वारा देश के कोने-कोने में जाकर लोगों को जागरूक किया जाएगा। इसके पीछे यही ध्येय है कि योग और देश की प्राचीन संस्कृति के माध्यम से लोगों को अधिक से अधिक लाभ पहंुचाया जाए। यदि मधुमेह के रोगियों की संख्या को ध्यान में रखकर आकलन करें तो वर्ष 2030 तक भारत मधुमेह के मामले में 'विश्व की राजधानी' बन जाएगा। आज सामान्य तौर पर 25-30 वर्ष की आयु वाले युवा भी 'टाइप-टू डायबिटीज' के शिकार हो रहे हैं। मधुमेह का होना तो सामान्य होता जा रहा है, लेकिन इसके परिणाम भविष्य में काफ ी घातक होते हैं। योग के माध्यम से मधुमेह को पूरी तरह से खत्म तो नहीं किया जा सकता है, लेकिन इतना तय है कि मरीज की अंग्रेजी दवा की मात्रा कम हो जाती है, साथ ही मधुमेह पर नियंत्रण होने के साथ-साथ मरीज की प्रतिरोधक क्षमता भी काफी बढ़ जाती है।
 
एस-व्यासा में मधुमेह के मरीजों को योग का प्रशिक्षण दिया गया। वर्ष 2012 की एक रपट के अनुसार 277 मरीजों को यहां दो अलग-अलग समूह में योग सिखाया गया और उसके तीन माह बाद जब दोबारा उनकी जांच की गई तो एक समूह के मरीजों का मधुमेह कम मिला, जबकि दूसरे समूह के मरीजों की दवा कम हो चुकी थी। इससे स्पष्ट है कि योग से न केवल असाध्य रोग को नियंत्रित किया जा सकता है, बल्कि दवा भी कम की जा सकती है। इन दवाओं का लंबे समय तक सेवन करने से हमारे शरीर पर  प्रतिकूल प्रभाव पड़ना शुरू हो जाता है। इसे ध्यान में रखते हुए योग बहुत आवश्यक है, क्योंकि पहले चरण में दवा और कुछ वर्षों बाद इंसुलिन की आवश्यकता पड़ने लगती है। इससे भविष्य में लीवर, किडनी और शरीर के दूसरे अंग प्रभावित होने लगते हैं। ल्ल
 
मधुमेह मुक्त भारत अभियान
इसके माध्यम से पूरे भारत में अभियान चलाकर मधुमेह को नियंत्रित करने का प्रचार करने और योग के माध्यम से जीवनशैली को परिवर्तित किया जाएगा।

2000 से अधिक मधुमेह मुक्त भारत योग सप्ताह शिविर देश के करीब 671 जिलों में लगाए जाएंगे।

शिविर के माध्यम से शुरुआत में करीब दो लाख लोग लाभान्वित होंगे।

प्रतिदिन दो घंटे के सत्र में योग के तरीके और प्राणायाम के बारे में विशेषज्ञों द्वारा जानकारी दी जाएगी।

विशेषकर मधुमेह की अंग्रेजी दवा खाने वाले, जिनके परिवार के सदस्य मधुमेह से प्रभावित हों, उन्हें इस शिविर में भाग लेने से विशेष लाभ प्राप्त होगा।   

योग करें, तनाव मुक्त रहें
मधुमेह जैसे असाध्य रोग पर योग द्वारा न केवल नियंत्रण किया जा सकता है, बल्कि मरीज जिन दवाओं का सेवन करता है उनकी मात्रा कम होने के साथ-साथ मधुमेह का स्तर भी कम हो जाता है। मधुमेह में योग की भूमिका पर स्वामी विवेकानंद योग अनुसंधान संस्थान बेंगलुरू की डॉ. निधि चौधरी राम से पाञ्चजन्य संवाददाता राहुल शर्मा की बातचीत के प्रमुख अंश :

क्या मधुमेह को योग द्वारा पूरी तरह से नियंत्रित किया जा सकता है?
मधुमेह को पूरी तरह से खत्म नहीं किया जा सकता है, लेकिन इतना तय है कि योग द्वारा मधुमेह को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। मधुमेह के लिए वक्र आसन, भुजंगासन, मंडूक आसन और सूर्य नमस्कार महत्वपूर्ण हैं।

'टाइप-टू डायबिटीज' के मरीजों के लिए योग कहां तक लाभकारी है?
'टाइप-टू डायबिटीज' के मरीजों के लिए योग एक प्रकार की संजीवनी है। इसमें सबसे बड़ी भूमिका ध्यान की है। ध्यान का अभ्यास करने से हम सबसे पहले अपने मन को नियंत्रित करते हैं, जिसके बाद तनाव की स्थिति पर काबू पा सकते हैं। दरअसल मधुमेह के मरीज छोटी-छोटी बातों पर जरूरत से ज्यादा सोचने लगते हैं। यही मधुमेह को असंतुलित कर देता है। इसलिए तनाव मुक्त रहना सबसे आवश्यक है और उसमें सबसे बड़ी भूमिका ध्यान की है।

मधुमेह के मरीजों को योग के साथ क्या-क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
मधुमेह के मरीजों को योग के अलावा सैर पर सबसे अधिक ध्यान देना चाहिए, कम से कम 30 मिनट की सैर तो जरूरी है। इससे मधुमेह नियंत्रित रहता है और शरीर दूसरे विकारों से भी बचा रहता है। मधुमेह के मरीजों को विशेष तौर पर खान-पान का ध्यान रखना चाहिए। दाल, हरी सब्जियों का सेवन करना चाहिए। मधुमेह में क्योंकि भूख जल्दी लगती है, इसलिए बार-बार थोड़ा भोजन लेना चाहिए, इससे मधुमेह का स्तर एकदम नहीं बढे़गा और घटेगा भी नहीं।

आज कम उम्र के बच्चे भी मधुमेह का शिकार बन रहे हैं, इसका क्या कारण है?
यदि परिवार में मधुमेह वंशानुगत है तो बड़ों से बच्चों को देर-सवेर मधुमेह होने की आशंका अधिक रहती है। इसके लिए बेहतर यही है कि सबसे पहले अपनी जीवनशैली को सही बनाएं। नियमित व्यायाम, योग और उचित खान-पान करने से वे मधुमेह से अपना बचाव कर सकते हैं।
यह भी देखने में आया है कि शहर की तुलना में गांव में रहने वाले लोगों को मधुमेह का पता नहीं लग पाता और जानकारी मिलने तक काफी देर हो चुकी होती है?

यह बिल्कुल सही है कि जागरूकता के अभाव में ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को आज भी यह पता नहीं लग पाता है कि वे मधुमेह का या किसी दूसरी असाध्य बीमारी का शिकार बन चुके हैं। ग्रामीण लोग मुधमेह से अनभिज्ञ होने के कारण अचानक बेहोश हो जाते हैं या उनका घाव जल्दी से ठीक नहीं हो पाता है। इसके लिए लोगों को जागरूक करना बहुत आवश्यक है।    –

संस्थान की लिंक http://svyasa.edu.in/

साभार- साप्ताहिक पाञ्चजन्य से 

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