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पाकिस्तानी फिल्म में काम करने वाली पहली भारतीय अभिेनेत्री का महू मे निधन

इंदौर. पचास के दशक में पाकिस्तान के सिंध में जन्मी और शिमला में पली-बढ़ी एक खूबसूरत लड़की मुंबई आई और देखते ही देखते अपने दौर के सबसे खूबसूरत चेहरों में शुमार हो गई। नाम था शीला रमानी। उनका महू में बुधवार को निधन हो गया। वे पिछले कुछ सालों से महू में ही रह रही थीं। वे पाकिस्तान की फिल्म में काम करने वाली पहली भारतीय अबिनेत्री  थीं।
सबसे पहले उन पर नज़र पड़ी देवानंद के भाई चेतन आनंद की और वे उनकी फिल्म कंपनी 'नवकेतन' का अभिन्न हिस्सा बन गई। पहली ही फिल्म 'टैक्सी ड्राइवर' में एंग्लो इंडियन क्लब डांसर मिस सोफिया नौजवानों के दिलो दिमाग पर छा गई। इसके बाद आई फंटूश, मीनार, वी. शांताराम की एक बत्तीस चार रास्ता जैसी दर्जनों फिल्मों में उनकी खूबसूतर एक्टिंग का जादू सबकों पसंद आने लगा। फिल्म 'टैक्सी ड्राइवर' में तो उन्हें मुख्य हीरोइन कल्पना कार्तिक (जो बाद में देवानंद की पत्नी बनी) से ज्यादा खूबसूरत बताया गया।
वे देश की पहली सिंधी फिल्म 'अबाना' की हीरोइन बनी। 1947 के बाद किसी पाकिस्तानी फिल्म में काम करने वाली पहली अदाकारा थी पर जल्द ही वे हिन्दुस्तान लौट आई। 'रिटर्न ऑफ सुपरमैन' और 'मां-बेटा' फिल्म के बाद उन्होंने फिल्मी दुनिया से दूरी बना ली। उन्होने एक पारसी उद्योगपति जाल कॉवसजी से शादी कर ली और उम्र का एक बढ़ा हिस्सा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कोलंबिया में गुजारा। काफी लंबे समय से वे महू में गुमनामी का जीवन जी रही थी। अल्ज़ाइमर रोग से पीड़ित शीला रमानी दो दिन पहले कोमा में चली गई थी। बुधवार दोपहर को उन्होंने अंतिम सांस ली।

साभार- दैनिक भास्कर से 

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