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राजस्थान में राज घरानों की बहुओं ने बाजी मारी

राजस्थान के  विधानसभा चुनाव में भाजपा ने राजघरानों की महिलाओं को टिकट बांटे थे। राजपरिवारो से जुड़े भाजपा के छह में से पांच उम्मीदवार विजयी रहे। वहीं एक बागी ने भी जीत हासिल की। कांग्रेस ने राजघरानों से जुड़े केवल दो नेताओं को ही टिकट दिया, उसके लिए नतीजा 50-50 रहा।   भाजपा की वसुंधरा राजे खुद  मध्यप्रदेश के ग्वालियर और धौलपुर राज घराने से जुड़ी हैं। वे  झालरापाटन विधानसभा सीट से लगातार तीसरी बार विजयी हुई हैं।

सिद्धी कुमारी-बीकानेर राजपरिवार से हैं । बीकानेर पूर्व सीट से लगातार दूसरी बार जीती। 2008 में भाजपा में शामिल हुई। उनके दादा करणी सिंह सांसद रहे।  दिया कुमारी- जयपुर राजपरिवार। सवाई माधोपुर सीट से डॉ.किरोड़ी मीणा को शिकस्त दी। वे अक्टूबर 2013 में भाजपा में शामिल हुई थी। उनकी दादी गायत्री देवी जयपुर से सांसद रही। पिता भवानी सिंह ने जयपुर से चुनाव लड़ा।   मांडलगढ़ ठिकाना। की कीर्ति कुमारी ने भीलवाड़ा की मांडलगढ़ सीट से जीत दर्ज करने में सफलता प्राप्त की। वे 2008 में चुनाव हार गई थी। 

राव राजेन्द्र सिंह ने शाहपुरा सीट से गुजरात की राज्यपाल कमला बेनीवाल के बेटे आलोक बेनीवाल को दी पटखनी, लगातार तीसरी बार विजेता रहे । कुमारी-करौली घराना की रानी रोहिणी करौली से कांग्रेस के दर्शन सिंह से हार गई। 2008 में भाजपा से जुड़ी और करौली से जीत दर्ज की। ससुर बृजेन्द्रपाल सिंह भी तीन बार विधायक रहे। 

"बागी" ठिकानेदार रणधीर सिंह भीण्डर ने भाजपा से टिकट कटने के बाद वल्लभनगर सीट से बागी होकर लड़ा चुनाव, कांग्रेस के मौजूदा विधायक और कांग्रेस के दिवंगत नेता गुलाब सिंह शक्तावत के पुत्र गजेन्द्र सिंह शक्तावत को मात दी। 2003 में विधायक रहे लेकिन 2008 में हार गए।

विहिप के अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष डा. प्रवीण भाई तोगड़िया ने सोमवार को यहां कहा कि हिंदू धर्म सनातन धर्म है। भारत में सौ करोड़ व दुनिया में एक सौ दस करोड़ हिंदू हैं, लेकिन दुर्भाग्य है कि हिंदू नेता ही सत्ता के लिए हिंदुओं को गुलाम बनाने पर आमादा हैं। खुद को बचाना है तो तुष्टीकरण की राजनीति करने वाले दलों की नकेल कसनी होगी, नहीं तो विश्व के अन्य देशों की तरह हिंदुस्तान भी हिंदुओं के हाथ से निकल जाएगा।

वह यहां धर्म संस्कृति रक्षा निधि समर्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म सबसे प्रचीन है। साथ ही उन्होंने आगाह किया कि खुद को बचाना है तो धार्मिक होने के साथ ही धर्म की रक्षा के लिए सड़क पर उतरना होगा। आज सरकार चाहे केंद्र की हो या राज्य की अल्पसंख्यकों को रिझाने के लिए हिंदुओं का दमन करने की योजनाएं बनाती हैं। नजीर के तौर पर उन्होंने मुजफ्फरनगर दंगा पीड़ितों के लिए प्रदेश सरकार द्वारा घोषित सहायता राशि व मुस्लिम युवाओं के रोजगार के लिए दिए गए बजट का हवाला देते हुए पूछा क्या हिंदुस्तान में हिंदू होना अपराध है। सवाल किया कि ऐसा नहीं तो हिंदुओं बेरोजगारों के लिए यह व्यवस्था क्यों नहीं?

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