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त्रिफला से बढ़कर कोई अमृत नहीं

मेरे दादाजी वैद श्री राम जी, मेरे पिता जी वैद श्री घनश्याम जी शर्मा हमेशा कहते थे कि= हरड़ , बहड,आंवला, घी शक्कर से खाएं, हाथी दाबे काँख में, सौ कोस लें जाएँ । त्रिफला चूर्ण एक सम्पूर्ण हेल्थ टॉनिक –

त्रिफला चूर्ण Trifala Churn तीन फलों से बनता है – आंवला , हरड़ और बहेड़ा । ये तीनो फल खुद अपने आप में शानदार औषधि हैं। त्रिफला चूर्ण इन्ही तीन चीजों के मिश्रण से बनाया जाता है। इस चूर्ण के अनगिनत फायदे होते हैं।

त्रिफला चूर्ण को आयुर्वेद में एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। इसे बनाने के लिए सूखे हुए फल काम में लिए जाते है। तीनो फलों के बीज निकाल कर समान मात्रा में या 3:1:2(आंवला हरड़ बहेड़ा) की मात्रा में लेकर इन्हें बारीक पीस लिया जाता है। इसी को त्रिफला चूर्ण कहते है। सदियों से इसके उपयोग से लोग स्वास्थ्य प्राप्त करते आ रहे हैं।

त्रिफला सम्पूर्ण रूप से संतुलित शक्तिदायक औषधि है। लंबे समय तक इसके उपयोग से शरीर के प्रत्येक अंग को फायदा पहुंचता है। आयुर्वेद की इस महान और सरल औषधि को भारत के ऋषि मुनियों ने बहुत उपयुक्त माना है।

इसके लेने से कोलेस्ट्रॉल का कम होना , ब्लड प्रेशर कंट्रोल, डायज़ेशन सुधरना और बिना किसी नुकसान के आँतों की सफाई का होना स्वीकार किया गया है। अब पूरे विश्व में इसका उपयोग होने लगा है।

त्रिफला चूर्ण के तीन फल –
1 . आंवला – Amla
आंवला त्रिफला का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। । यह विटामिन C का भंडार है। पाचन तंत्र और प्रतिरोधक क्षमता को शक्तिशाली बनाता है। पेट और आँतों की सूजन मिटाता है। शरीर की हर प्रकार की जलन मिटाता है। पित्त विकार दूर करता है। आयरन का अवशोषण बढाकर हीमोग्लोबिन सही रखता है। प्रजनन अंगों की कार्यविधि सही करता है। दिल व दिमाग के लिए फायदेमंद है। आँखों के लिए , त्वचा के लिए व बालों के लिए भी औषधि का काम करता है और इनको स्वस्थ बनाये रखता है।

2 . हरड़ –
इसकी प्रकृति गर्म होती है। यह शरीर के सभी विषैले पदार्थ बाहर निकाल देता है। यह वात , पित्त और कफ तीनो प्रकार के विकार दूर करता है। विशेषकर वात दोष दूर करता है। आँखों की सुरक्षा के लिए लाभदायक है। मोतियाबिंद ( Cataract ) तथा काला पानी ( Glaucoma ) रोकता है। घाव को जल्द भरने में सहायक होता है। याददाश्त बढाता है। उम्र के प्रभाव को रोकता है। यह आँतों की क्रियाशीलता को बढ़ा देता है। जिससे आंतें साफ रहती है। पुरानी कब्ज भी इससे ठीक हो सकती है। शरीर में भारीपन इससे ख़त्म होता है। मानसिक तनावऔर घबराहट को दूर करता है।

3 . बहेड़ा –
यह विशेषकर कफ को मिटाता है। शरीर में कही भी कफ जमा नहीं होने देता। फेफड़े की कार्यविधि सुधारता है। अस्थमा में बहुत लाभदायक होता है। एलर्जी और हिचकी मिटाता है। यह बालों की जड़ों को मजबूत बनाता है उन्हें काले बनाये रखता है। शरीर से हानिकारक विषैले तत्व निकाल देता है। वायरस तथा बेक्टिरिया के प्रति लड़ने की शरीर की ताकत को बढाता है। यह आँतों की दीवार पर जमा पुराना श्लेष्मा निकाल देता है।

त्रिफला पाउडर अपने आप में सम्पूर्ण लाभदायक औषधि है । इसके उपयोग से बुखार , अल्सर , अस्थमा , पीलिया, कब्ज , पायरिया एनीमिया आदि रोग दूर किये जा सकते है ।

त्रिफला चूर्ण के फायदे –
मोटापा
खाना अच्छी प्रकार से पच जाये और पेट साफ रहे तो शरीर का वजन सही रहता है। पोषक तत्व भरपूर मिलने की वजह से बार बार भूख नहीं लगती और न ही आवश्यकता से अधिक खाना खाने की इच्छा होती है। Trifala churan से ये सारे उद्देश्य पूरे होते है। इस चूर्ण के उपयोग से शरीर में जाने वाले फैट का भी उचित प्रकार से उपयोग होता है और अनावश्यक फैट इकठ्ठा नही होता । इस तरह मोटापा कम करने में यह सहायक होता है। मोटापे की वजह से हड्डियां भी कमजोर हो जाती है। यह मोटापा हटा कर हड्डी मजबूत करने में मदद करता है।

पाचन तंत्र
यह पाचन तंत्र को शक्तिशाली बनाता है। मेटाबोलिज्म को सुधारता है। आँते साफ करता है। आँतों की क्रियाशीलता बढ़ाता है। जिसकी वजह से कब्ज नहीं होती , आँतों की कार्य विधि सुधर जाती है। भूख खुल कर लगने लगती है।

रक्त की शुद्धि
त्रिफला चूर्ण रक्त की शुद्धि करता है। रक्त संचार बढाता है। रक्त से हानिकारक विषैले तत्व बाहर निकाल देता है। इस प्रकार लीवर और फेफड़ों की भी शुद्धि करता है। लीवर से सम्बन्धी बीमारी पीलिया में यह लाभदायक सिद्ध होता है। ब्रोंकाइटिस नामक फेफड़े की परेशानी को दूर करता है।

प्रतिरोधक क्षमता
यदि आप बार बार बीमार हो जाते है या जल्दी सर्दी जुकाम हो जाता है तो आपको रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने की आवश्यकता है। त्रिफला के नियमित उपयोग से शरीर को विटामिन C तथा कई प्रकार के तत्व मिलते है जिनसे प्रतिरोधक शक्ति प्रबल बनती है। आप बार बार बीमार नहीं पड़ते।

चमकदार त्वचा
त्रिफला चूर्ण त्वचा की विभिन्न प्रकार की समस्या दूर करता है। मृत कोशिकाओं को शरीर से निकाल देता है। इससे त्वचा कोमल और जवां बनी रहती है। धूप की वजह से काली पड़ी स्किन तथा स्किन के दाग धब्बे झाइयांआदि मिटा कर चेहरे को चमक देता है ।

ह्रदय के लिए
ह्रदय की मांसपेशियों को शक्तिशाली बनाता है। विशेष कर बहेड़ा में मौजूद तत्व हानिकारक कोलेस्ट्रॉल LDL को कम करते है और लाभदायक HDL कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाते है। इससे ह्रदय रोग होने की सम्भावना कम हो जाती है। आंवला भी कोलेस्ट्रॉल कम करने में सहायक होता है।

आँखों के लिए
त्रिफला का आँखों के लिए उपयोग बहुत लोग जानते है। इससे आँख आना , आँखें कमजोर होना , मोतियाबिंद , प्रारंभिक ग्लूकोमा आदि ठीक हो सकते है। त्रिफला के पानी से आँख धोना बहुत लाभदायक होता है। यह पानी पिया भी जा सकता है। इसके लिए रात को एक गिलास पानी में एक चम्मच त्रिफला भिगो दें। सुबह साफ कपडे से छान कर आँख धोने के कप ( ये कप मेडिकल स्टोर पर मिल जाता है) डालकर आँखें धोएं। तीन महीने लगातार इस प्रयोग से वांछित परिणाम मिल सकता है।

त्रिफला चूर्ण कब और कितना लें –
त्रिफला चूर्ण रात को सोते समय एक चम्मच गुनगुने पानी के साथ लेना अच्छा रहता है। सामान्य व्यक्ति के लिए इस प्रकार त्रिफला चूर्ण लेने से किसी प्रकार की समस्या नहीं होती। लेकिन यदि आप किसी भी प्रकार की बीमारी से ग्रस्त है तो योग्य चिकित्सक के परामर्श के बाद ही त्रिफला चूर्ण का सेवन करना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति के लिए त्रिफला की मात्रा और लेने तरीका अलग हो सकता है। यह रोगी की अवस्था पर निर्भर करता है।

त्रिफला चूर्ण कब नहीं लेना चाहिए –
गर्भवती स्त्री को नहीं लेना चाहिए।अधिक मात्रा में लेन पर दस्त लग सकते है। दस्त अधिक होने पर डिहाइड्रेशन हो सकता है।ब्लड प्रेशर की समस्या हो तो चिकित्सक के परामर्श से ही त्रिफला चूर्ण लें।डायबिटीज के मरीज को सावधानी से लेना चाहिए। परामर्श के बाद ही लें ।गैस अधिक बनती हो तो इसे ना लें। इसके रेशे उसमे वृद्धि कर सकते है।

वात पित कफ को संतुलित रखने वाला सर्वोत्तम फल त्रिफला वाग्भट्ट ऋषि के अनुसार इस धरती का सर्वोत्तम फल है।

त्रिफला लेने के नियम-
त्रिफला के सेवन से अपने शरीर का कायाकल्प करजीवन भर स्वस्थ रहा जा सकता है। आयुर्वेद की महान देन त्रिफला से हमारे देश का आम व्यक्ति परिचित है व सभी ने कभी न कभी कब्ज दूर करने के लिए इसका सेवन भी जरुर किया होगा | पर बहुत कम लोग जानते है इस त्रिफला चूर्ण जिसे आयुर्वेद रसायन मानता है।

अपने कमजोर शरीर का कायाकल्प किया जा सकता है
बस जरुरत है तो इसके नियमित सेवन करने की। क्योंकि त्रिफला का वर्षों तक नियमित सेवन ही आपके शरीर का कायाकल्प कर सकता है

सेवन विधि – सुबह हाथ मुंह धोने व कुल्ला आदि करने के बाद

खाली पेट ताजे पानी के साथ इसका सेवन करें तथा सेवन के बाद एक घंटे तक पानी के अलावा कुछ ना लें | इस नियम का कठोरता से पालन करें।

यह तो हुई साधारण विधि पर आप कायाकल्प के लिए नियमित इसका इस्तेमाल कर रहे है तो इसे विभिन्न ऋतुओं के अनुसार इसके साथ गुड़, शहद,गौमुत्र,मिश्री,सैंधा नमक आदि विभिन्न वस्तुएं मिलाकर भी ले सकते हैं।

हमारे यहाँ वर्ष भर में छ: ऋतुएँ होती है और प्रत्येक ऋतू में दो दो मास होते हैं।

१- ग्रीष्म ऋतू – १४ मई से १३ जुलाई तक
त्रिफला को गुड़ १/४ भाग मिलाकर सेवन करें |

२- वर्षा ऋतू – १४ जुलाई से १३ सितम्बर तक इस त्रिदोषनाशक
चूर्ण के साथ सैंधा नमक १/४ भाग मिलाकर सेवन करें |

३- शरद ऋतू – १४ सितम्बर से १३ नवम्बर तक त्रिफला के साथ
देशी खांड १/४ भाग मिलाकर सेवन करें |

४- हेमंत ऋतू – १४ नवम्बर से १३ जनवरी के
बीच त्रिफला के साथ सौंठ का चूर्ण १/४ भाग मिलाकर सेवन करें |

५- शिशिर ऋतू – १४ जनवरी से १३ मार्च के
बीच पीपल छोटी का चूर्ण १/४ भाग मिलाकर सेवन करें |

६- बसंत ऋतू – १४ मार्च से १३ मई के दौरान इस के साथ शहद मिलाकर सेवन करें | शहद उतना मिलाएं जितना मिलाने से अवलेह बन जाये |

इस तरह इसका सेवन करने से एक वर्ष के भीतर शरीर की सुस्ती दूर होगी , दो वर्ष सेवन से सभी रोगों का नाश होगा , तीसरे वर्ष तक सेवन से नेत्रों की ज्योति बढ़ेगी , चार वर्ष तक सेवन से चेहरे का सोंदर्य निखरेगा , पांच वर्ष तक सेवन के बाद बुद्धि का अभूतपूर्व विकास होगा ,छ: वर्ष सेवन के बाद बल बढेगा ,सातवें वर्ष में सफ़ेद बाल काले होने शुरू हो जायेंगे और आठ वर्ष सेवन के बाद शरीर युवाशक्ति सा परिपूर्ण लगेगा |

दो तोला हरड बड़ी मंगावे |तासू दुगुन बहेड़ा लावे ||
और चतुर्गुण मेरे मीता |ले आंवला परमपुनीता
कूट छान या विधिखाय|ताके रोग सर्व कट जाय ||

त्रिफला का अनुपात होना चाहिए :-1:2:3=1(हरद )+2(बहेड़ा )+3(आंवला )

त्रिफला लेने का सही नियम
सुबह अगर हम त्रिफला लेते हैं तो उसको हम “पोषक ” कहते हैं |क्योंकि सुबह त्रिफला लेने से त्रिफला शरीर को पोषण देता है जैसे शरीर में vitamine ,iron,calcium,micronutrients की कमी को पूरा करता है एक स्वस्थ व्यक्ति को सुबह त्रिफला खाना चाहिए

सुबह जो त्रिफला खाएं हमेशा गुड या शहद के साथ खाएं
रात में जब त्रिफला लेते हैं उसे “रेचक ” कहते है क्योंकि रात में त्रिफला लेने से पेट की सफाई (कब्ज इत्यादि )का निवारण होता है
रात में त्रिफला हमेशा गर्म दूध के साथ लेना चाहिए गर्म दूध न मिल पाए तो गर्म पानी के साथ।

नेत्र-प्रक्षलन : एक चम्मच त्रिफला चूर्ण रात को एक कटोरी पानी में भिगोकर रखें। सुबह कपड़े से छानकर उस पानी से आंखें धो लें। यह प्रयोग आंखों के लिए अत्यंत हितकर है। इससे आंखें स्वच्छ व दृष्टि सूक्ष्म होती है। आंखों की जलन,लालिमा आदि तकलीफें दूर होती हैं।

कुल्ला करना : त्रिफला रात को पानी में भिगोकर रखें। सुबह मंजन करने के बाद यह पानी मुंह में भरकर रखें। थोड़ी देर बाद निकाल दें। इससे दांत व मसूड़े वृद्धावस्था तक मजबूत रहते हैं। इससे अरुचि, मुख की दुर्गंध व मुंह के छाले नष्ट होते हैं।

– त्रिफला के गुनगुने काढ़े में शहद मिलाकर पीने से मोटापा कम होता है।
-गाय का घी या शहद के मिश्रण के साथ त्रिफला चूर्ण का सेवन आंखों के लिए वरदान स्वरूप है
– संयमित आहार-विहार के साथ इसका नियमित प्रयोग करने से मोतियाबिंद, कांचबिंदु-दृष्टिदोष आदि नेत्र रोग होने की संभावना नहीं होती।
– मूत्र संबंधी सभी विकारों व मधुमेह में यह फायदेमंद है। रात को गुनगुने पानी के साथ त्रिफला लेने से कब्ज नहीं रहती है।
=मात्रा : 2 से 4 ग्राम चूर्ण दोपहर को भोजन के बाद अथवा रात को गुनगुने पानी के साथ लें।

इसीलिए त्रिफला चूर्ण आयुर्वेद का अनमोल उपहार कहा जाता है।
सावधानी : दुर्बल, कृश व्यक्ति तथा गर्भवती स्त्री को एवं नए बुखार में त्रिफला का सेवन न करें।

संपर्क
7980498167

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