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महू (इंदौर).गाजर घास से पूरे समाज को खतरा-डॉ. कंसाना

डॉ. बी.आर. अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय महू एवं आइसीआर जबलपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक दिवसीय वेबीनार को संबोधित करते हुए वैज्ञानिक डॉ. बी.एस. कंसाना ने कहा कि-‘गाजर घास मनुष्य, पशु एवं पर्यावरण सबके लिए नुकसानदेह है. इस समस्या से निपटने के लिए पूरे देश को एकजुट होना पड़ेगा’. डॉ. कंसाना ‘गाजरघास उन्मूलन एवं जागरूकता’ विषय पर आयोजित वेबीनार को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने बताया कि 1955 में अमेरिका से मंगाये जाने वाले गेहूं के साथ यह गाजर घास आया था. उन्होंने गाजरघास की विभीषिका का उल्लेख करते हुए बताया कि एक फूल में 25 हजार बीज होते हैं जो पूरे समाज के लिए नुकसानदेह है. गाजरघास से एग्जिमा और अस्थमा से जैसे रोग फैलता है. उनका कहना था कि इलाज के बाद थोड़े दिनों के लिए आराम तो मिल जाता है लेकिन बाद में फिर उभर आता है.

वेबीनार के आरंभ में अतिथियों का परिचय विभागाध्यक्ष डॉ. अरूण कुमार ने दिया. कार्यक्रम की अध्यक्ष डीन डॉ. मनीषा सक्सेना ने कहा कि गाजर घास को लेकर अनेक किस्म की भ्रांतियां और सवाल है. उन्होंने कहा कि ग्रामीण और शहरी इलाकों में जानकारी के अभाव में गाजर घास को तोड़ कर फेंक दिया जाता है जिससे अनेक रोग फैल जाते हैं. उन्होंने कहा कि इसके प्रति जन-जागरूकता जरूरी है. कार्यक्रम का संचालन डॉ. जितेन्द्र वर्मा ने किया.

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