Wednesday, May 29, 2024
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हमारे संविधान में पितरों के प्रति कृतज्ञता की प्रस्तावना क्यों नहीं?

सर्वपितृमोक्ष अमावस्या के दिन मुझे बरबस ही ध्यान आया कि हम अपने पितरों के प्रति कोई कृतज्ञता अपने संविधान की प्रस्तावना में क्यों न प्रदर्शित कर सके? अपने पूर्वजों के प्रति आभार का यह भाव विश्व की सबसे पुरातन जीवित संस्कृति में औपचारिक रूप से राज्य के स्तर पर क्यों नहीं है?

रूस के संविधान की preamble में है। रूस का नाम मैंने सबसे पहले इसलिए लिया कि वह वामपंथ का दुर्ग रहा है। लेकिन वे हमारे यहाँ वालों जैसे नहीं हैं। उन्हें ऐसा आभार प्रकट करने में कोई अतीतजीविता नहीं लगती।

रूस के संविधान की प्रस्तावना का यह अंश पढ़िये :

We, …united by a common fate on our land, …revering the memory of our ancestors who have conveyed to us the love for the Fatherland, belief in the good and justice..
(हम, अपनी भूमि पर एक सर्वोभयनिष्ठ नियति से एकताबद्ध, अपने उन पूर्वजों, जिन्होंने हममें अपनी पितृभूमि के लिये प्यार और शुभ एवं न्याय में विश्वास संचरित किया है, की स्मृति को संजोते हुए)

यहाँ तक कि चीन भी अपने लंबे इतिहास और अपनी भव्यता की संस्कृति को अपनी सांविधानिक प्रस्तावना के प्रथम वाक्य में स्थान देता है:

China is a country with one of the longest histories in the world. The people of all of China’s nationalities have jointly created a culture of grandeur..

अंगोला के संविधान की प्रस्तावना में भी पितरों के प्रति यह कृतज्ञता यों व्यक्त की गई है

Invoking the memory of our ancestors and calling upon the wisdom of the lessons of our shared history, our centuries-old roots and the cultures that have enriched our unity;
Inspired by the best lessons in African tradition – the essence of Angolan culture and identity.. ( अपने पूर्वजों की स्मृति को जगाते हुए और हमारे साझा इतिहास के पाठों की प्रज्ञा, हमारी सदियों पुरानी जड़ों और संस्कृतियों जिन्होंने हमारी एकता बढ़ाई का आह्वान करते हुए, अफ्रीकी परंपरा के सर्वोत्तम सबक़, अंगोलाई संस्कृति और अस्मिता के सार से प्रेरित..)

इन्हें भी छोड़ें, पापुआ न्यूगिनी जैसे छोटे से देश के संविधान की प्रस्तावना पढ़ें

WE, THE PEOPLE OF PAPUA NEW GUINEA—

· united in one nation
· pay homage to the memory of our ancestors—the source of our strength and origin of our combined heritage
· acknowledge the worthy customs and traditional wisdoms of our people—which have come down to us from generation to generation
· pledge ourselves to guard and pass on to those who come after us our noble traditions .
( हम पापुआ न्यूगिनी के लोग एक राष्ट्र की तरह एकताबद्ध होकर अपने पूर्वजों की स्मृति के प्रति श्रद्धांजलि प्रस्तुत करते हैं जो हमारी शक्ति का स्रोत और हमारी साझा विरासत का मूल है, हम अपने लोगों की उस पारंपरिक प्रज्ञा और उन सुयोग्य प्रथाओं को स्वीकार करते हैं जो पीढ़ी दर पीढ़ी हम तक पहुँची हैं और संकल्प लेते हैं कि हम उन महान परंपराओं का संरक्षण कर अपने बाद आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचायेंगे)

ऐसे तो हमने अपने संविधान में यहाँ वहाँ से चीज़ें बहुत उठाईं।
लेकिन किस चीज़ ने हमें ऐसी आभार-अभिव्यक्ति से रोका?

कि यह काम समाज पर छोड़ दिया कि वही पितरों के प्रति श्रद्धा रखे, यह राज्य का काम नहीं।

लेकिन तब हमारे संविधान की प्रस्तावना में ये “हम भारत के लोग” कौन हैं?

(लेखक मध्य प्रदेश के सेवा निवृत्त आएएएस अधिकारी हैं व विभिन्न विषयों पर कई पुस्तकें लिख चुके हैं)

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