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राष्ट्र और संस्थाओं का निर्माण एक दिन में नहीं होताः श्री अश्वनी लोहानी

मुंबई के श्री भागवत परिवार द्वारा प्रकाशित और प्रभात प्रकाशन दिल्ली द्वारा मुद्रित अप्रतिम भारत ग्रंथ का विमोचन रेल्वे बोर्ड के माननीय अध्यक्ष श्री अश्वनी लोहानी की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। श्री लोहानी ने अपने प्रेरक और विचारोत्तेजक वक्तव्य में श्री भागवत परिवार द्वारा प्रकाशित ग्रंथ में समाहित लेखों की सराहना करते हुए कहा कि इस ग्रंथ मे भारतीय जीवन दर्शन और संस्कृति का एक नया आयाम सामने आता है। इसको देखकर हमारे अतीत और हमारी परंपराओं पर गर्व होता है, लेकिन मात्र अतीत पर गर्व करके हम भविष्य नहीं सुधार सकते। उस अतीत की धारा को जब तक हम अपने जीवन में शामिल नहीं करेंगे और किसी भी लक्ष्य को पाने में खुद को नहीं झोंकेंगे तब तक हमारा हर कार्य औपचारिकता मात्र रह जाएगा।

उन्होंने कहा कि देश के प्रधान मंत्री ने स्वच्छता जैसी बात पर साहस के साथ जो अभियान चलाया है, ये हमें बताता है कि हमारे शामिल होने से ही कोई भी संकल्प या अभियान सफल हो सकता है। इस अभियान को सफलता भी इसलिए मिल रही है कि लोेग खुद इसमें शामिल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम ये भूल जाएँ कि दूसरा क्या कर रहा है और अपने आपको अपने काम में झोंक दें। आप अगर देखने जाएंगे तो हर किसी में हजारों कमियाँ निकल आएगी, लेकिन जब आप खुद अपनी कमियाँ दूर करने लगेंगे तो दूसरों की कमियाँ भी कम नजर आने लगेगी।

उन्होंने कहा कि देश और संस्थान सस्ते में नहीं बनते हैं। जिस दिन हम ये तय कर लेगें कि हम भ्रष्ट नहीं होंगे तब दूसरा भी भ्रष्टाचार करने की हिम्मत नहीं करेगा, लेकिन हमको इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। भ्रष्टाचार मात्र पैसे का लेन-देन नहीं बल्कि हमारे आचरण से जुड़ा है, हम अपना आचरण जितना शुध्द करते जाएंगे भ्रष्टाचार जैसी समस्या भी नहीं रहेगी।

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श्री लोहानी ने कहा कि 1858 में जब विवेकानंद कोे कांग्रेस का अध्यक्ष बनने का प्रस्ताव दिया गया तो उन्होंने विनम्रता से इंकार करते हुए कहा कि मुझे तो युवकों के चरित्र निर्माण की दिशा में कार्य करना है। जब हम ऐसे किसी संकल्प और लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ेंगे तो हम एक स्वस्थ, उन्नत और संपन्न राष्ट्र का निर्माण कर पाएँगे।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित राज्य सभा सांसद व दुनिया के पहले आदिवासी विश्वविद्यालय किस https://kiss.ac.in/ व किट http://kiit.ac.in/ के संस्थापक श्री अच्युता सामंता ने अपने जीवन संघर्ष की दास्तान बताते हुए कहा कि किस तरह मैने और मेरे परिवार ने भूखे रहकर अपना जीवन बिताया और शिक्षा ग्रहण कर अपने आपको इस काबिल बनाया कि आज 52 हजार गरीब आदिवासी विद्यार्थी हमारे संस्थानों में शिक्षा ही नहीं ले रहे हैं बल्कि एशियड, ओलंपिक, कॉमन वेल्थ से लेकर दुनिया भर में होने वाली तमाम खेल प्रतियोगिताओं से लेकर कौशल विकास के क्षेत्र में भी अपना परचम लहरा रहे हैं। गरीबी से जूझते हुए मैने जो संकल्प लिया था उसे परमात्मा ने पूरा किया। उन्होंने कहा कि मैं ओड़िशा जैसे राज्य से हूँ जहाँ एक चौथाई आबादी आदिवासी है और 20 जिले नक्सल प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि 4 साल की उम्र में मेरे पिता की मौत हो गई और हम आठ भाई बहनों ने तमाम अभावों के बीच रहकर ईमानदारी निष्ठा और समर्पण के साथ अपने जीवन की हर चुनौती का सामना किया। उन्होंने कहा कि मैने 1992 में मात्र 5 हजार रुपये में किराये के दो कमरों में गरीब विद्यार्थियों को पढ़ाना शुरु किया था। आज मेरा ये छोटा सा संकल्प किट और किस के रूप में पूरी दुनिया में अपनी पहचान बना चुका है। हम अपने यहाँ बच्चों को केजी में भर्ती करते हैं और उनको पीजी कराके नौकरी देकर विदा करते हैं। उन्होंने कहा कि अब हम मुंबई भी आ रहे हैं और पालघर में 5 हजार बच्चों के लिए ये संस्थान शुरु करने जा रहे है। मुंबई के श्री सुनल पाटोदिया ने हमें मुंबई में ये संस्थान खोलने के लिए जमीन भीदी और प्रेरणा भी। उन्होंने कहा कि मैं आज भी प्रतिदिन 18 घंटे काम करता हूँ।

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इस अवसर पर ग्रंथ के संपादक डॉ. करुणाशंकर उपाध्याय ने कहा कि हमारी भारतीय संस्कृति की सोच देश की नहीं बल्कि वसुधैव कुटुमंकम की है यानी पूरा विश्व हमारा परिवार है और इसकी सबसे बड़ी विशेषता यही है कि इसमें विपरीत सोच, आचरण, संस्कृति, धर्म और जीवन मूल्यों वाले सभी लोग एक साथ रह सकते है। उन्होंने शिव परिवार का उदाहरण देते हुए कहा कि शिव परिवार में शिवजी साँप को धारण करते हैं, नंदी उनका वाहन है, पार्वती का वाहन शेर है, गणेश का वाहन चूहा है और कार्तिकेय का वाहन मोर है। शेर, साँप, मोर, चूहा और बैल एक दूसरे के विपरीत हैं मगर फिर भी एक साथ एक ही परिवार से जुड़े हैं।

इस अवसर पर श्री भागवत परिवार के समन्वयक श्री वीरेन्द्र याज्ञिक ने कहा कि हम एक ऐसे संकट के दौर से गुज़र रहे हैं जिसमें हमारा आत्मबोध मर रहा है। हम विदेशी जीवन मूल्यों को तो अंगीकार कर रहे हैं लेकिन हमारे अपने जो मूल्य हैं जो हमें समाज, परिवार और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार बनाते हैं उनसे वंचित होते जा रहे हैं। हमने अप्रतिम भारत ग्रंथ में देश भर के मूर्धन्य विद्वानों के लेखों के माध्यम से यही प्रयास किया है कि हम अपनी संस्कृति, मूल्यों और पंरपराओं की जड़ों को पहचानें।

उद्योगपति श्रीा सुरेश चतुर्वेदी ने कहा कि दुनिया भर की बड़ी बड़ी कंपनियाँ करोड़ों अरबों रुपये कमाकर फिर कुछ हिस्सा दान कर देती है तो फिर ये इतना कमाती ही क्यों है। जब कोई दवाई कंपनी इतनी महंगी दवा बनाए कि एक आम आदमी उस दवाई को खरीद ही न सके और फिर वो कंपनी करोड़ों रुपये दान में लगाए तो उसका क्या मतलब है। ब्राह्मण सरस्वती का पुजारी है और वो देने में विऎश्वास रखता है क्योंकि ब्राह्णण के पास ज्ञान की ऐसी पूँजी होती है वो जितना बाँटता है उतनी ही बढ़ती जाती है। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि आज की पीढ़ी ज्यादा धार्मिक है, लेकिन हम लोग ही इस पीढ़ी को सही दिशा नहीं दिखा रहे हैं। ये देश इसलिए चल रहा है कि इसमें याज्ञिकजी और लोहानी जी जैसे लोग हैं जो सुधार के कामों में लगे रहते हैं और ये धारा सतत् प्रवाहित होती रहती है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार श्री नंदलाल पाठक ने की. इस अवसर पर उन्होंने एक सामयिक हिंदी गज़ल प्रस्तुत कर उपस्थित श्रोताओं की जमकर वाहवाही लूटी।

कार्यक्रम में देश के मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ओम प्रकाश रावत द्वारा वीडिओ के माध्यम से प्रेषित शुभकामना संदेश भी दिखाया गया।

अप्रतिम भारत का स्वप्न साकार करने के लिए दिगम्बर जैनाचार्य श्री १०८ विद्यासागर जी महाराज और उनके बाल ब्रह्मचारी मुनि और आर्यिकाएँ (साध्वियां) सम्पूर्ण भारत वर्ष में लाखों किलोमीटर की पद यात्राएँ कर रहे हैं, उनके लाखों गृहस्थ शिष्य जिन्हें श्रावक कहा जाता है, अपने अपने कार्य क्षेत्र में रहकर बहुत सारे सामाजिक कार्य कर रहे हैं. इन्हीं श्रावकों में से एक श्रावक हैं श्रीमान् प्रभात चन्द्र जी जैन कन्नौज वाले, जो मुंबई के प्रमुख उद्योगपति हैं. जिनका पूरा परिवार गुरुदेव की प्रेरणा से “गौसेवा और गौसंरक्षण” के कार्य में सतत प्रयास रत है. “दयोदय महासंघ” के नाम से १२५ गौशालाओं में ५०००० से अधिक गौवंश संरक्षित है. ग्रन्थ लोकार्पण समारोह में प्रभात जी की धर्मपत्नी श्रीमती इंदु प्रभात जैन भी उपस्थित रहीं और उन्होंने भागवत परिवार के कार्यों की खूब-२ सराहना की है, उन्हें अप्रतिम भारत ग्रन्थ की प्रति भेंट की गई.

इस इवसर पर नवनीत के संपादक श्री विश्वनाथ सचदेव, आदि ने अपने विचार व्यक्त किए। श्री सुरेश खंडेलिया ने श्री भागवत परिवार का परिचय दिया। श्री भागवत परिवार के अध्यक्ष श्री एसपी गोयल ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन श्री सुरेन्द्र विकल ने किया। लगातार तीन घंटे चले इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उद्योगपति, व्यापारी, समाजसेवी और विभिन्न संगठनों से जुड़े लोग उपस्थित थे।

कार्यक्रम का प्रारंभ कु. प्रेक्षा जोशी द्वारा सरस्वती वंदना की प्रस्तुति से हुआ। इसके बाद कु. ऋचा, सुश्री कृतिका, अदिति, प्रेक्षा व शिखा ने इतनी शक्ति देना हमें दाता गीत की प्रस्तुति दी।

कार्यक्रम के अंत में श्रीमती शुभदा सिन्नरकर ने संत ज्ञानेश्वर की अमर रचना पसायदान की सरस प्रस्तुति दी।
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कार्यक्रम की यू ट्यूब लिंक : https://youtu.be/EiX1bfdZLOs



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