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11 बजे तक सिर्फ एसी की ‘तत्काल’ बुकिंग

'तत्काल' बुकिंग को आम जनता के लिए और सुविधाजनक बनाने के लिए रेलवे ने सुबह 10 बजे से 11 बजे के बीच केवल वातानकूलित श्रेणियों की 'तत्काल' बुकिंग करने का निर्णय लिया है। जबकि गैर-वातानुकूलित श्रेणियों की "तत्काल" बुकिंग 11 से 12 बजे के बीच की जाएगी।

"तत्काल" की बुकिंग सुबह 10 बजे से खुलती है। आम जनता को सहूलियत के मद्देनजर रेलवे ने सुबह 10-12 बजे तक एजेंटों की "तत्काल" बुकिंग पर रोक लगा रखी है। इस दौरान केवल रेलवे के आरक्षण केंद्रों या आईआरसीटीसी की वेबसाइट के जरिये ही तत्काल टिकट बुक कराए जा सकते हैं।

इस नई व्यवस्था के अगले आठ-दस दिनों में लागू होने की संभावना है। इस संबंध में रेलवे बोर्ड की ओर से शीघ्र ही सर्कुलर जारी किया जाएगा। रेलवे बोर्ड के सदस्य (यातायात) अजय शुक्ला के अनुसार यह परिवर्तन एक ही समय में सभी श्रेणियों के यात्रियों की भीड़ को कम करने के इरादे से किया जा रहा है। इससे एसी और गैर एसी में 'तत्काल' बुकिंग कराने वालों को थोड़ी आसानी हो जाएगी।

आपको बता दें कि सुबह 10-12 के अलावा भी 'तत्काल' बुकिंग दिन में किसी भी वक्त कराई जा सकती है। केवल सुबह के इन दो घंटों में एजेंटों की मार्फत बुकिंग कराने पर रोक है। 'तत्काल' बुकिंग यात्रा की तारीख से एक दिन पहले ही होती है। यानी यदि कल सफर करना है तो आज ही टिकट लेना होगा।

बनेगा लॉजिस्टक्स कारपोरेशन

रेलवे से माल ढुलाई में ग्राहकों के समक्ष आने वाली दिक्कतों के मद्देनजर रेल प्रशासन ने रेलवे लॉजिस्टक्स कारपोरेशन के गठन का प्रस्ताव किया है। यह रेलवे का पीएसयू जैसा उपक्रम होगा। यह टर्मिनलों पर मालगाड़ियों पर माल चढ़ाने तथा उतारने और उसके भंडारण का काम देखेगा। शुक्ला के मुताबिक अभी रेलवे कर्मचारी ही यह काम देखते हैं। लेकिन वह न तो सुविधाजनक होता है और न संतोषजनक। इसके अलावा भंडारण के लिए वेयर हाउसिंग कंपनियों की अलग से मदद लेनी पड़ती है। लॉजिस्टिक्स कारपोरेशन से ग्राहकों के साथ-साथ खुद रेलवे को भी सहूलियत होगी।

अनाज ढुलाई में भारी गिरावट

खाद्यान्न खरीद की नई व्यवस्थाएं लागू होने तथा बिजली संयंत्रों में कोयले का स्टॉक जमा होने से इस साल रेलवे की माल ढुलाई का पैटर्न बदल गया है। इससे अनाज और कोयले दोनों की ढुलाई पर बुरा असर पड़ा है। राज्यों द्वारा खुद सीधे अनाज की खरीद करने से भारतीय खाद्य निगम (एफसीआइ) द्वारा की जाने वाली अनाज की ढुलाई कम हो गई है। परिणामस्वरूप पिछले दो महीनों में रेलवे की अनाज ढुलाई में 23 फीसद की भारी गिरावट दर्ज की गई है। इससे चिंतित रेल प्रशासन इसकी भरपाई के उपाय तलाशने में जुटा है।

साभार- http://naidunia.jagran.com/ से 

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