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संग्रहालयों पर एक संग्रहणीय पुस्तक”पर्यटन और संग्रहालय”

भारत जैसे बहुसांस्कृतिक देश की क्षेत्रीय इतिहास, कला – संस्कृति और परंपरा को जानने के लिए पर्यटक संग्रहालय देखने जाते हैं उसी प्रकार देश के प्रमुख संग्रहालयों में संरक्षित संस्कृति को एक ही पुस्तक में मणिमाला के मोती की तरह पिरो कर लिखी गई एक उमदा पुस्तक ” पर्यटन और संग्रहालय ” हाल ही में सामने आई हैं। इसे संग्रहालयों कि साक्लोपिडिया कह सकते हैं।
पुस्तक के लेखक डॉ.प्रभात कुमार सिंघल वरिष्ठ पत्रकार, जनप्रिय जनसंपर्क कर्मी और पत्रकारिता क्षेत्र के गम्भीर लेखक हैं। सतत अध्ययन, लेखन, पर्यटन एवं फोटोग्राफी में जीवंत दिलचस्पी का ही साकार रूप है पर्यटन के क्षेत्र में लिखी उनकी यह 16वीं पुस्तक।

पुस्तक का कलेवर अत्यंत आकर्षक बन पड़ा है। कवर पर कोलकाता में देश के पहले राष्ट्रीय संग्रहालय में संग्रहित ऐतिहासिक महत्व की ममी को खूबसूरती के साथ दर्शाया गया है। राष्ट्रीय और प्रादेशिक, स्वायत्तशासी और निजी ट्रस्ट के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक परम्परागत संग्रहालयों के साथ – साथ प्राकृतिक, वानिकी, जीवाश्म, सामुद्रिक, मानव विज्ञान, अंतरिक्ष, रक्षा, रेल जैसे संग्रहालयों की विविधता वाले देश के 91प्रमुख संग्रहालयों में संग्रहित सामग्री के बारे में 161 पृष्ठों में सिलसिलेवार त्थयपरक एवं सारगर्भित रूप से रोचक शैली में जानकारी दी गई हैं। पाठक को महसूस होता है कि जैसे वह किसी संग्रहालय की आभासीय यात्रा कर रहा हो। संग्रहालयों एवं प्रदर्शनों के फोटोग्राफ पुस्तक का महत्व बढ़ाते हैं।

पुस्तक की भूमिका में राजस्थान सरकार के जन सम्पर्क विभाग के पूर्व संयुक्त निदेशक और वरिष्ठ पत्रकार बाल मुकुंद ओझा लिखते हैं संग्रहालयों के प्रति रुचि जागृत करने में पुस्तक सहायक होगी। विमोचन करते हुए कोटा के जिला कलेक्टर उज्ज्वल राठौर कहते है संग्रहालय समाज में सामाजिक,सांस्कृतिक और आर्थिक सम्बन्धों की स्थापना में योगदान देकर विभिन्न संस्कृतियों, राष्ट्रीय परम्पराओं और सांस्कृतिक विरासत के अध्यन को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कोटा जैसी जगह पर को कि राजधानी भी नहीं है, रह कर लेखक ने देश – प्रदेश के संग्रहालयों पर काफी परिश्रम से कार्य किया है। ये पर्यटन के विविध पहलुओं पर निरन्तर लिख रहे हैं जो अपने आप में महत्वपूर्ण हैं।

संग्रहालयों पर लिखी गई पुस्तक का प्रकाशन वीएसआरडी एकेडमिक पब्लिशिंग, मुंबई द्वारा किया गया हैं। पुस्तक का मूल्य 178 रुपए है।

डॉ.दीपक कुमार श्रीवास्तव
पुस्तकालयअध्यक्ष,
राजकीय सार्वजनिक मंडल पुस्तकालय,
कोटा, राजस्थान

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