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तसलीमा नसरीन
 

  • बचपन की ईद की वो खौफ़नाक यादें जो आज भी डराती है

    बचपन की ईद की वो खौफ़नाक यादें जो आज भी डराती है

    बड़े मामा को गुस्‍ल करके ईद के कपड़े पहनने के लिए तकादा देने का कोई लाभ नहीं था। आखिरकार हारकर नानी बोली, ''तूने ईद तो किया नहीं तो क्‍या इस वक्‍त खाएगा भी नहीं?

  • ईद का वो खौफ़नाक मंज़र

    ईद का वो खौफ़नाक मंज़र

    घर पुरूषों के साथ मैं भी ईद के मैदान की ओर चल पड़ी । ओह कितना विशाल मैदान था। घास पर बिस्‍तर के बड़े-बड़े चादर बिछाकर पिताजी ,बड़े भैया , छोटे भैया और बड़े मामा के अलावा मेरे सभी मामा वहां नमाज पढ़ने के लिए खड़े हो गए। पूरा मैदान लोगों से भरा हुआ था ।

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