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नोटा की वजह से कांग्रेस ने भाजपा से सत्ता छीनी

मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी बहुमत से 2 सीट कम रह गई है, लेकिन उसे सत्ताधारी बीजेपी के मुकाबले पांच सीटें अधिक मिली हैं. कांग्रेस पार्टी की इस जीत में भाग्य का भी बहुत बड़ा योगदान है. कांग्रेस ने कई ऐसी सीटों पर जीत हासिल की है, जहां हार-जीत का अंतर बेहद कम है. यही वजह है कि राज्य में वोट बीजेपी को ज्यादा मिले हैं, जबकि अधिक सीट कांग्रेस के खाते में आई हैं.

मध्य प्रदेश में भाग्य ने कांग्रेस पार्टी का साथ दिया और यहां नतीजों को लेकर अंतिम समय तक सस्पेंस बना रहा. मध्य प्रदेश की 10 सीटें में जीत हार का अंतर 1000 वोट से भी कम है. इनमें से 7 सीटों पर कांग्रेस पार्टी ने जीत दर्ज की है, जबकि 3 सीटों पर बीजेपी को विजय मिली.

राज्य में कांग्रेस पार्टी को 114 सीट और बीजेपी को 109 सीट मिली है. दोनों के बीच सिर्फ पांच सीट का अंतर है, जबकि यहां 10 सीटों पर मुकाबला बेहद नजदीकी रहा है. राज्य में बीजेपी को 41% और कांग्रेस को 40.9% वोट मिले हैं. यहां भी भाग्य ने कांग्रेस का साथ दिया क्योंकि कम वोट पाने के बाद भी पार्टी ज्यादा सीट पाने में कामयाब रही.

मध्य प्रदेश में सबसे नजदीक का मामला ग्वालियर सीट पर रहा जहां कांग्रेस के नारायण सिंह कुशवाहा ने सिर्फ 121 वोट से जीत हासिल की. बीना सीट से बीजेपी के शशि कठोरिया ने 632 वोट से जीत हासिल की है, जबकि दामोह से कांग्रेस के जयंत मलैया सिर्फ 798 वोट से जीत हासिल करने में कामयाब रहे. जबलपुर से कांग्रेस के शरद जैन 578 वोट से और सुवासरा सीट से कांग्रेस के राधेश्याम नानालाल पाटीदार 350 वोट जीते हैं.

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