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रक्त विकृति पर दिग्विजय कालेज में ज्ञानवर्धक और प्रेरक आयोजन से विद्यार्थी हुए अभिभूत

राजनांदगांव। शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में रक्त विकृति जागरूकता अभियान के अंतर्गत ज्ञानवद्र्धक कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से मुम्बई के सेवाभावी संगठन तोलानी सेवा संकल्प के प्रमुख टीआर तोलानी तथा पद्मश्री सम्मानित डॉ.पुखराज बाफना ने थैलेसिमीया एवं सिकल सेल पर उपयोगी जानकारी दी। अध्यक्षता प्रभारी प्राचार्य डॉ.चन्द्रिका नाथवानी ने की। यूथ रेडक्रास प्रभारी डॉ. एचएस भाटिया ने प्रास्तावित उद्बोधन दिया। गरिमामय आयोजन का सूत्र संयोजन डॉ.चन्द्रकुमार जैन ने किया।

कार्यक्रम के आरंभ में सरस्वती वंदना के उपरांत अभ्यागत अतिथि वक्ताओं ने साथ-साथ विशेषज्ञ जवाहरलाल डुडानी, अशोक हरचंदानी, गुरूमुखदास वाधवा का स्वागत किया गया। यूथ रेडक्रास प्रभारी डॉ.एएस भाटिया ने संगठन की गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि रक्त समूह परीक्षण, रक्तदान, गरीबों को सहायता सामग्री वितरण, दिव्यांगों एवं बुजुर्गों के साथ विद्यार्थियों के संवाद जैसे आयोजन किये जाते हैं। अध्यक्षता कर रही डॉ.चन्द्रिका नाथवानी ने आयोजन को मील का पत्थर निरूपित किया।

संयोजन कर रहे डॉ.चन्द्रकुमार जैन ने अभ्यागत दिग्विजय कॉलेज ने वैभव और गौरव की जानकारी देते हुए अतिथियों का परिचय दिया और कार्यक्रम की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। अतिथि वक्तव्य देते हुए डॉ. पुखराज बाफना ने प्रेरक शब्दों में विद्ययार्थियों को बताया कि यह अभियन पीढिय़ों को सिकलसेल और थैलेसीमिया जैसी रक्त संबंधी बीमारियों से बचाना चाहता है। उन्होंने इसके संक्रमण के कारणों का खुलासा करते हुए कहा कि वैवाहिक जीवन में प्रवेश के पहले इनकी जांच अवश्य करवायें। इन दोनों बीमारियों का कोई इलाज नही है। ऐहतिहात ही एक मात्र उपाय है।

उक्त अवसर पर प्रमुख अतिथि मार्गदर्शक श्री तोलानी ने एक वीडियो फिल्म के माध्यम से थैलेसीमिया और सिकलसेल की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत में थैलेसीमिया मेजर के तीन लाख और माइनर ने दस करोड़ मामले पाए गए हैं। जांच के बगैर इनकी जानकारी नहीं मिल सकती। घबराने की बात नही, किन्तु खुलकर जांच करवाने आगे आना चाहिए। भारत में हर साल दस हजार बच्चे थैलेसीमिया के शिकार हो जाते हैं। श्री तुलानी ने स्पष्ट किसी कि थैलेसीमिया माइनर आम बात है, यह महानायक अमिताभ बच्चन को भी है, किन्तु जब यह मेजर हो जाए तो समझें की बड़ा खतरा है। इसलिए विवाह से पहले जीवन में एक ही बार इसकी जांच करवा लेने में ही बुद्धिमानी है।

कार्यक्रम में प्रो.श्रीमती चंद्रज्योति श्रीवास्तव, श्रीमती ऊषा ठाकुर, डॉ..शैलेन्द्र सिंह, डॉ.के.के.देवांगन, श्रीमती स्वयंसिद्धा झा, कु.दिव्या पवार सहित आयोजनसमिति के अन्य सहयोगी तथा महाविद्यालय के प्राध्यापक व् विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित थे। अंत में विद्यार्थियों के प्रश्नों का समाधान भी विशेषज्ञों ने किया। स्नातकोत्तर विज्ञान के विद्यार्थियों ने बड़ी कुशलता से प्रभावी सवाल किये, जिसकी भरपूर सराहना की गई।

डॉ.चन्द्रकुमार जैन ने सार्थक आयोजन में सब के सक्रिय सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।

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