जयपुर । हाथ से लिखी चिठ्ठियां रिश्तों में जमीं बर्फ को पिघलाने का काम करती हैं। रिश्तों में बर्फ जम चुकी है। आज यदि रिश्तों में जमीं बर्फ को पिघला ना है तो एक दूसरे को हाथ से लिखे पत्रों के द्वारा भावनाओं, ,संवेदनाओं का इजहार किया जा सकता है। यह विचार पाती अपनों को मुहिम के संयोजक, साहित्यकार, राजस्थान प्रशासनिक सेवा अधिकारी डॉ. सूरज सिंह नेगी ने हाल ही में जयपुर में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में व्यक्त किए। डिजिटल दौर में हाथ से लिखे पत्रों की भूमिका विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर एवं पाती अपनों को मुहिम के संयुक्त तत्वाधान में आंबेडकर वेलफेयर सोसाइटी में किया गया।
डॉ. नेगी ने कहा कि कहा कि वर्तमान में किसी व्यक्ति के पास कितनी धन संपदा है,क्या पद प्रतिष्ठा है यह महत्वपूर्ण नहीं है। महत्वपूर्ण है कि उसके रिश्ते कितने मजबूत हैं।आज सर्वाधिक जरूरत रिश्तों को सहेजने की है। हम डिजिटल युग में ग्लोबल विलेज की बात करते हैं,यह अच्छी बात है लेकिन अफसोस हम अपनों से बहुत दूर हो गए।
उन्होंने बताया की क्या आज के दौर में हाथ से लिखे पत्रों का कोई स्थान है, डिजिटल युग में हाथ में कलम लेकर कोई अपनों को पत्र लिखता है, पत्र लेखन का क्या इतिहास रहा है, क्या आने वाले समय में चिठ्ठियां इतिहास बन कर रह जाएंगी कुछ ऐसे ही मुद्दों परआयोजित कार्यक्रम में देशभर से आए विद्वानों के बीच मंथन हुआ। इस विषय पर भोपाल की लता अग्रवाल, डॉ छाया शर्मा,अजमेर, डॉ सुधा मित्तल, अजमेर,उम्मेहबीबा जिलानी बूंदी, शमिंद्र कौर श्री गंगानगर, डॉ. शालिनी गोयल, जोधपुर सहित अनेक लेखकों ने पत्र वाचन सहित पिछले आठ वर्षों से लुप्त होती पत्र लेखन विधा को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से चलाई जा रही पाती अपनों को मुहिम से जुड़कर कैसा लगा विषय पर अपने विचार साझा किए।
प्रथम सत्र की अध्यक्षता करते हुए वन , पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भारत सरकार नई दिल्ली की अतिरिक्त सचिव श्रीमती मीनाक्षी रावत ने डिजिटल दौर में हाथ से लिखे पत्रों को घर,परिवार ,समाज एवं शिक्षण संस्थान में बढ़ावा देने और बच्चों को इस दिशा में सोचने को प्रेरित करने पर बल दिया।
मुख्य अतिथि फरीदाबाद हरियाणा की डॉ. इंदू गुप्ता लेखिका,पूर्व खण्ड शिक्षा अधिकारी ने अपने संबोधन में हाथ से लिखे पत्रों की अहमियत को रेखांकित किया। विशिष्ट अतिथि रतन कुमार सांभरिया,जयपुर ने हिंदी साहित्य में हाथ से लिखे पत्रों का जिक्र करते हुए साहित्य की अनमोल धरोहर बताया। ग्वालियर की लेखिका,आकाशवाणी ग्वालियर की पूर्व प्रोग्रामर सीमा जैन ने अपने विशेष अंदाज में आज के दौर में हाथ से लिखे पत्रों की भूमिका पर जोर दिया और इस मुहिम से बच्चों को जोड़ने की पहल को सराहनीय कदम बताया।
कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में पत्र आधारित तीन पुस्तकों का विमोच किया गया। स्कूली बच्चों द्वारा अभिभावकों को वृक्षारोपण के लिए प्रेरित करने हेतु लिखे गए पत्रों का संकलन पेड़ हमारे जीवनदाता,109 पाती लेखकों द्वारा अपनी मां को लिखे गए पत्रों का संकलन लिख दी चिठ्ठिया माई को एवं डॉ सूरज सिंह नेगी तथा प्रो मीना सिरोला द्वारा पिछले आठ वर्षों से चलाई जा रही पाती मुहिम के इतिहास को दर्शाती हुई पुस्तक पाती अपनों को मुहिम (एक अनवरत यात्रा) का विमोचन किया गया। इस सत्र की अध्यक्षता करते हुए प्रो. विक्रम सिंह सिरोला विभागाध्यक्ष मानविकी पीठ आई.आई.टी. मुंबई ने पाती मुहिम को एक मील का पत्थर बताया और इस बात पर जोर दिया कि प्रत्येक परिवार में आपसी संवाद कायम करने के लिए एक दूसरे को हाथ से लिखे पत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है । विशिष्ट अतिथि डॉ. बजरंग सोनी,जयपुर एवं बीना चौहान ,संस्थापिका नारी कभी न हारी संस्थान जयपुर रहीं।
कार्यक्रम में 26 स्कूली विद्यार्थियों सहित 20 प्रधानाचार्यो को मंच से प्रशस्ति पत्र,सम्मान राशि एवं पुस्तक भेंट की गई।लिख दी चिठ्ठिया माई को पुस्तक के 109 लेखकों को भी प्रशस्ति पत्र और पुस्तक भेंट की गई। संचालन डॉ आशा शर्मा प्रधानाचार्य राजकीय संस्कृत विद्यालय बड़ी चौपड़ जयपुर ने किया।
कार्यक्रम में देशभर के अनेक लेखक, साहित्यकार,स्कूली विद्यार्थी ,संस्था प्रधान, पाती मुहिम की संयोजिका प्रो मीना सिरोला एवं अन्य सदस्य उपस्थित रहे।





