आनंद देशपांडे की कहानी उन भारतीय उद्यमियों की कहानी है जिन्होंने किसी पारंपरिक उद्योग के बजाय सॉफ्टवेयर और टेक्नोलॉजी को अपना क्षेत्र बनाया। उन्होंने 1990 में Persistent Systems की स्थापना की। आज कंपनी का मुख्यालय पुणे में है और वह दुनिया भर में सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, क्लाउड, डेटा, AI तथा एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में काम करती है। Persistent की शुरुआत एक अपेक्षाकृत छोटी भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनी के रूप में हुई थी, लेकिन धीरे-धीरे उसने वैश्विक ग्राहकों के लिए बड़े पैमाने पर टेक्नोलॉजी सेवाएँ और डिजिटल इंजीनियरिंग उपलब्ध कराने वाली कंपनी का रूप ले लिया। Persistent की अपनी वेबसाइट भी देशपांडे को कंपनी का संस्थापक, चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर बताती है।
अमेरिका में स्नातकोत्तर की पढ़ाई के लिए गए आनंद देशपांडे के पास दो विकल्प थे: आरामदेह नौकरी में बने रहना या भारत लौटकर अपना खुद का कुछ बनाना। इसलिए जब वर्क वीजा या ग्रीन कार्ड प्राप्त करने का समय आया, तो उन्होंने अग्रणी प्रौद्योगिकी कंपनी हेवलेट पैकार्ड (एचपी) में अपनी नौकरी शुरू करने के महज छह महीने बाद ही इस्तीफा देने का फैसला किया।
उन्होंने 1990 में पुणे में अपनी खुद की सॉफ्टवेयर कंपनी, परसिस्टेंट सिस्टम्स, शुरू की। उन्होंने अपनी सारी बचत इसमें लगा दी और उद्यमी बनने के लिए दोस्तों और परिवार से भी पैसे उधार लिए। मात्र 2 लाख रुपये के निवेश से शुरू हुई यह कंपनी आज 36,000 करोड़ रुपये से अधिक के बाजार पूंजीकरण वाली कंपनी बन गई है। वैश्विक कारोबार वाली एक अग्रणी सॉफ्टवेयर कंपनी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक के रूप में, देशपांडे की कुल संपत्ति आज 10,600 करोड़ रुपये (1.3 अरब डॉलर) से अधिक है।
एक इंजीनियर के बेटे आनंद का जन्म महाराष्ट्र के अकोला में हुआ और उनका पालन-पोषण मध्य प्रदेश के भोपाल में भारत हेवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड (बीएचईएल) की एक बस्ती में हुआ। स्कूल के बाद, उन्होंने एनडीए (राष्ट्रीय रक्षा अकादमी) प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की, लेकिन आईआईटी-जेईई प्रवेश परीक्षा पास करने के बाद उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर में दाखिला लेने का फैसला किया। आईआईटी के बाद, उन्होंने आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका के इंडियाना विश्वविद्यालय में दाखिला लिया।
स्थापना के 10 साल बाद, देशपांडे की कंपनी ने 2000 में इंटेल कैपिटल से 1 मिलियन डॉलर की पहली फंडिंग प्राप्त की। अगली फंडिंग 2005 में आई जब नॉरवेस्ट वेंचर पार्टनर्स और गैब्रियल वेंचर पार्टनर्स ने देशपांडे की फर्म में 20 मिलियन डॉलर का निवेश किया। 2010 में, उन्होंने एक सफल आईपीओ के साथ कंपनी को सार्वजनिक किया। देशपांडे ने इंडियाना विश्वविद्यालय से कंप्यूटर विज्ञान में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। वे एक परोपकारी व्यक्ति हैं जिन्होंने कम उम्र से ही दान-पुण्य का कार्य करना शुरू कर दिया था। उन्होंने अपने परिवार के साथ मिलकर देअसरा फाउंडेशन की स्थापना की। देशपांडे युवा उद्यमियों के समर्थक हैं और कई उद्यमियों को उनके व्यवसाय को आगे बढ़ाने और उनके सपनों को साकार करने में मदद करते हैं।
IIT से अमेरिका और फिर भारत वापसी
देशपांडे की शिक्षा और शुरुआती करियर भी उनकी कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वे IIT खड़गपुर से जुड़े रहे और आगे उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका गए। उनकी तकनीकी पृष्ठभूमि ने उन्हें केवल IT-services बेचने के बजाय software engineering और product development को Persistent के व्यवसाय का आधार बनाने में मदद की। IIT Bombay के Deshpande Centre for Startups and Technology से संबंधित उनकी जीवनी भी उन्हें Persistent Systems का संस्थापक और वैश्विक तकनीकी कंपनी का नेतृत्वकर्ता बताती है।
एक तरफ कंपनी AI, Cloud, Data, Digital Engineering और Software Development जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में दुनिया भर के ग्राहकों के साथ काम करती है; दूसरी ओर कंपनी के कुछ कार्यालयों में भारतीय परंपराओं से जुड़े कार्यक्रम—जैसे गृहप्रवेश, सत्यनारायण पूजा और हल्दी-कुमकुम—सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन का हिस्सा दिखाई देते हैं। हाल में Persistent से जुड़े एक वायरल विवरण में नए कार्यालय के गृहप्रवेश और पारंपरिक पूजा का उल्लेख भी किया गया है।
यहाँ एक महत्वपूर्ण अंतर समझना चाहिए। आधुनिकता का अर्थ परंपरा को छोड़ देना नहीं है। आधुनिकता का अर्थ नई तकनीक, नई सोच और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को स्वीकार करना है। कोई संस्था AI और Cloud में दुनिया की अग्रणी कंपनियों के साथ काम करते हुए अपने कर्मचारियों को स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े रहने का अवसर दे सकती है। Persistent के संदर्भ में यही मिश्रण इसे दूसरी अनेक IT कंपनियों से सांस्कृतिक रूप से अलग पहचान देता है।
Persistent नाम ही क्यों महत्वपूर्ण है?
“Persistent” नाम अपने आप में देशपांडे की उद्यमशीलता की कहानी से मेल खाता है—लगातार प्रयास करते रहना। कंपनी ने मुख्यतः दूसरे देशों के ग्राहकों के लिए सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और डिजिटल टेक्नोलॉजी समाधान विकसित किए। समय के साथ इसका फोकस Cloud, Data & Analytics, AI, Digital Engineering, Enterprise Applications और आधुनिक Software Platforms तक फैल गया। आज Persistent स्वयं को ऐसी कंपनी के रूप में प्रस्तुत करती है जो ग्राहकों को software engineering के माध्यम से उत्पादों और व्यवसायों को आधुनिक बनाने में मदद करती है।
अरबपति कैसे बने?
यहाँ एक रोचक बात है। आनंद देशपांडे की संपत्ति का बड़ा हिस्सा किसी नकद व्यवसाय या पारंपरिक उद्योग से नहीं, बल्कि Persistent Systems में उनकी हिस्सेदारी से जुड़ा है। 2021 में Persistent के शेयर में तेज वृद्धि के बाद Forbes ने लिखा था कि देशपांडे पहली बार अरबपति बने और उनकी लगभग 30% हिस्सेदारी का मूल्य $1 अरब से थोड़ा अधिक हो गया था।
इसके बाद कंपनी के शेयर और कारोबार में हुई वृद्धि ने उनकी संपत्ति को काफी ऊपर पहुँचाया। दिसंबर 2025 की Times of India की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग एक दशक पहले उनकी संपत्ति $200 million से कम थी, जबकि 2025 के अंत तक यह लगभग $3.4 billion तक पहुँच गई थी; रिपोर्ट ने बताया कि promoter group की लगभग 30% हिस्सेदारी में देशपांडे की हिस्सेदारी लगभग 29% थी।
इसलिए सोशल मीडिया में 2026 में दिखाई देने वाला “उन्होंने अभी-अभी पहली बार $1 billion क्लब में प्रवेश किया” वाला कथन पूरी तरह सही नहीं है। वे 2021 में ही Forbes की अरबपति सूची में आ चुके थे। 2026 में उनकी संपत्ति और Persistent के विस्तार के कारण यह कहानी फिर चर्चा में आई है। Forbes की वर्तमान प्रोफाइल भी उन्हें Persistent के संस्थापक के रूप में दर्ज करती है।
Persistent की सबसे बड़ी विशेषता—कर्मचारियों को भी हिस्सेदार बनाना
देशपांडे की सोच का एक उल्लेखनीय पक्ष Employee Stock Ownership/ESOP रहा है। Persistent में कर्मचारियों को कंपनी की वृद्धि में हिस्सेदार बनाने की नीति ने बड़ी संख्या में कर्मचारियों को शेयर-आधारित संपत्ति बनाने का अवसर दिया। इसी कारण Persistent की कहानी केवल “एक व्यक्ति के अरबपति बनने” की कहानी नहीं है, बल्कि भारतीय IT उद्योग में wealth creation को कर्मचारियों तक पहुँचाने के प्रयोग के रूप में भी देखी जाती है। हाल की चर्चाओं में कंपनी से जुड़े 2,000 से अधिक employee millionaires का भी उल्लेख हुआ है।
संपत्ति से अधिक महत्वपूर्ण है उनका उद्यमिता मॉडल
देशपांडे की सोच का एक दूसरा पहलू entrepreneurship है। Forbes India ने उनके बारे में लिखा है कि वे अपनी संपत्ति का इस्तेमाल छोटे और नए उद्यमियों—“nano entrepreneurs” को प्रोत्साहित करने के लिए करना चाहते हैं। उनका मानना रहा है कि भारत में रोजगार पैदा करने के लिए केवल बड़ी कंपनियाँ पर्याप्त नहीं हैं; बहुत छोटे स्तर पर व्यवसाय शुरू करने वाले लोगों को भी पूंजी, तकनीक और मार्गदर्शन मिले तो वे बड़ी संख्या में रोजगार और आर्थिक गतिविधि पैदा कर सकते हैं।
इसी सोच के कारण देशपांडे का नाम केवल IT उद्योग में ही नहीं बल्कि startup ecosystem और entrepreneurship promotion में भी दिखाई देता है। 2025 में Nasscom के “Makers Honor” कार्यक्रम के लिए गठित परिषद में भी उनका नाम शामिल था, जिसका उद्देश्य भारत के तकनीकी इंजीनियरों और innovators को पहचान देना था।
भारतीय संस्कृति और आधुनिक टेक्नोलॉजी का मेल
आपके द्वारा बताए गए “गृह प्रवेश” प्रसंग का एक दिलचस्प पहलू भी है। Persistent से जुड़े हालिया सोशल-मीडिया पोस्टों में नए कार्यालय में गृह प्रवेश के अवसर पर सत्यनारायण पूजा किए जाने और भारतीय/मराठी त्योहारों को कंपनी की संस्कृति में स्थान देने का उल्लेख है। इन पोस्टों में यह भी बताया गया है कि कंपनी के कुछ कार्यालयों में भारतीय ज्ञान-परंपरा से जुड़े नाम और संदर्भ दिखाई देते हैं। यह जानकारी फिलहाल मुख्यतः सोशल-मीडिया पोस्टों से आती है, इसलिए इसे कंपनी की औपचारिक नीति के रूप में प्रस्तुत करने से पहले आधिकारिक Persistent स्रोत से पुष्टि करना उचित होगा।
यह बात देशपांडे की सार्वजनिक छवि के एक दिलचस्प पहलू को सामने लाती है—वैश्विक टेक्नोलॉजी और भारतीय सांस्कृतिक पहचान को एक-दूसरे का विरोधी न मानना। एक ओर उनकी कंपनी अमेरिका और यूरोप सहित वैश्विक बाजारों में software engineering करती है, दूसरी ओर कंपनी के कुछ कार्यालयों और आयोजनों में भारतीय सांस्कृतिक प्रतीकों को स्थान दिया जाता है।
आज Persistent कहाँ खड़ी है?
Persistent अब छोटी IT कंपनी नहीं रह गई है। IIT Bombay की जानकारी के अनुसार कंपनी के 23,000 से अधिक कर्मचारी और 18 देशों में संचालन हैं। कंपनी का विस्तार AI और cloud जैसी नई तकनीकों के साथ लगातार हो रहा है। 2026 में Persistent ने Nagarro SE के अधिग्रहण के लिए वित्त जुटाने की दिशा में कदम बढ़ाया है और सितंबर 2026 में कंपनी ने शेयरधारकों की विशेष बैठक बुलाकर बड़े financing programme के लिए मंजूरी की प्रक्रिया शुरू की। उपलब्ध घोषणाओं के अनुसार इसमें $1.25 billion तक financing और अतिरिक्त equity/convertible instruments की व्यवस्था शामिल है।
एक पंक्ति में आनंद देशपांडे की कहानी
“IIT से निकला एक तकनीकी व्यक्ति, जिसने नौकरी करने के बजाय 1990 में अपनी सॉफ्टवेयर कंपनी बनाई, तीन दशक तक उसे लगातार विकसित किया, कर्मचारियों को भी कंपनी की संपत्ति में हिस्सेदार बनाया और अंततः Persistent को एक वैश्विक टेक्नोलॉजी कंपनी में बदल दिया।”
और शायद यही कारण है कि आनंद देशपांडे की कहानी केवल “एक और भारतीय अरबपति” की कहानी नहीं है; यह भारत में knowledge-based entrepreneurship, employee wealth creation और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के साथ वैश्विक technology business को जोड़ने का एक रोचक उदाहरण है।





