दीपावली भारतीय संस्कृति का ऐसा पर्व है जिसे हिंदी सिनेमा ने भी उत्साह, उमंग और पारिवारिक उल्लास के साथ चित्रित किया है। कई फिल्मों में दीपावली के अवसर पर लक्ष्मी-गणेश पूजन, दीप जलाने, आतिशबाजी और खुशियाँ मनाने के दृश्य गीतों के माध्यम से दिखाए गए हैं। इन गीतों में कहीं दीपों की जगमगाहट और त्योहार का उल्लास है, तो कहीं अपनों से बिछड़ने का दर्द और सामाजिक विषमता की झलक मिलती है।
फिल्म शीश महल (1950) – गीत 'आई है दिवाली सखी, आई है दिवाली'। यह गीत दीपावली के उत्सव और खुशियों को दर्शाता है।
फिल्म स्टेज (1951) – गीत 'जगमगाती दिवाली की रात आ गई'। यह गीत भी दीपावली के संदर्भ में जाना जाता है।
फिल्म सबसे बड़ा रुपया (1955) – इस फिल्म में 'आए दिवाली की दुल्हनिया' और 'इस रात दिवाली कैसी' जैसे गीतों का उल्लेख मिलता है।
फिल्म ताज (1956) – गीत 'जहाँ में आई दिवाली, बड़े चिराग जले'। इसमें दीपावली के प्रकाश और उल्लास का चित्रण है।
फिल्म पैसा (1957) – गीत 'दीप जलेंगे, दीप दिवाली आई' दीपावली के उत्सव का भाव प्रस्तुत करता है।
फिल्म खजांची (1958) – गीत 'आई दिवाली, आई कैसे उजाले लाई' त्योहार के वातावरण को दर्शाता है।
फिल्म पैगाम (1959) – गीत 'कैसे दिवाली मनाएँ हम लाला'। यह गीत आर्थिक विषमता और आम आदमी की कठिनाइयों पर व्यंग्य करता है।
फिल्म नजराना (1961) – इस फिल्म के दो गीत विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। पहला 'मेले हैं चिरागों के, रंगीन दिवाली है' और दूसरा मुकेश का भावपूर्ण गीत 'एक वो भी दिवाली थी, एक ये भी दिवाली है'।
फिल्म हकीकत (1964) – लता मंगेशकर का गाया गीत 'आई अबके साल दिवाली' बेहद भावुक गीत है। इसमें सीमा पर तैनात सैनिकों और उनके परिवारों की भावनाओं को व्यक्त किया गया है।
फिल्म जुगनू (1973) – गीत 'दीप दिवाली के झूठे'। इस फिल्म में दीपावली के अवसर पर बच्चों के साथ उत्सव मनाने का दृश्य भी दिखाई देता है।
फिल्म शिर्डी के साईं बाबा (1977) – गीत 'दीपावली मनाई सुहानी' दीपावली के धार्मिक और भक्तिपूर्ण पक्ष को सामने लाता है।
हिंदी फिल्मों के ये गीत केवल मनोरंजन के साधन नहीं हैं, बल्कि अपने समय की सामाजिक, पारिवारिक और सांस्कृतिक भावनाओं के दस्तावेज भी हैं। विशेष रूप से 'एक वो भी दिवाली थी, एक ये भी दिवाली है' और 'आई अबके साल दिवाली' जैसे गीत दीपावली के अवसर पर मानवीय संवेदनाओं को गहराई से छूते हैं।




