दो दशक बाद मध्यप्रदेश की सडक़ों पर भरोसे की ‘बस’ दौडऩे के लिए तैयार है। डॉ. मोहन यादव सरकार के अथक प्रयासों से एक बार फिर सरकारी बसों की वापसी हुई है। मध्यप्रदेश परिवहन विभाग की महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को नाम दिया गया है ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा।’ इसके पहले मध्यप्रदेश राज्य परिवहन निगम के बैनर पर सरकारी बसों का संचालन होता था। नयी पीढ़ी में अधिकतर को तो यह भी नहीं मालूम होगा कि मध्यप्रदेश राज्य परिवहन निगम नाम की कोई संस्था सरकारी बसों का संचालन करती थी। दो दशक से निजी बसों में सफर कर रहे लोगों के लिए ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ परिवहन एक नया अनुभव लेकर आ रहा है। इन बसों में सुविधायें वही होंंगी, जो निजी बस ऑपरेटर देते हैं लेकिन अपेक्षाकृत जेब पर यह भारी नहीं पड़ेगा।
दूरदर्शी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव नए तकनीक के साथ इन बसों के संचालन के हामी हैं सो इलेक्ट्रिक बसों के माध्यम से पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने पर उनका जोर है। खास बात यह है कि ये बसें केवल शहरों तक सीमित नहीं रहेंगी बल्कि आसपास के कस्बों और छोटे जिलों को जोड़ेंगी। इसे इंटरसिटी बस का नाम दिया गया है। ये बसें दैनंदिनी आवाजाही करने वालों के लिए सुगम साधन बनेगी। पहले चरण में 351 बसों का संचालन करने की योजना है। इसे दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है। इसमें 120 इंटरसिटी बसें हैं। ये बसें दो या दो से अधिक शहरों के बीच आवागमन को सुगम और तीव्र बनाएंगी। 231 इंट्रासिटी बसें शहरों के भीतर नागरिकों को सुरक्षित, सुलभ और सस्ती यात्रा सुविधा प्रदान करेंगी। प्रदेश सरकार द्वारा पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के उद्देश्य से स्वच्छ ईंधन और इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार पर विशेष जोर दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा अंतर्गत प्रथम चरण में प्रदेश के 7 प्रमुख शहरों की बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा। इसमें इदौर, भोपाल, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड शामिल है। इंदौर में 145 बस, जिसमें 50 इंटरसिटी, 95 इंट्रासिटी, भोपाल के लिए 106 बसें, जिसमें 23 इंटरसिटी, 83 इंट्रासिटी, जबलपुर के लिए 67 बसें, जिसमें 14 इंटरसिटी, 53 इंट्रासिटी। रीवा की 18 इंटरसिटी बस, देवास की 10 इंटरसिटी बस, कटनी की 3 और भिंड की 2 इंटरसिटी बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंतर्गत वर्ष 2031 तक 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को बस सेवा से जोडक़र ग्रामीण कनेक्टिविटी को नई मजबूती दी जाएगी। प्रदेशभर में लगभग 15,000 से अधिक आधुनिक सार्वजनिक बसें संचालित की जाएंगी। इससे प्रतिदिन 30 लाख से ज्यादा यात्रियों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा प्रदान होगी। साथ ही 180 से अधिक आधुनिक बस स्टैंड्स, टर्मिनल्स और डिपो का कायाकल्प किया जाएगा।
इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम से निगरानी : सरकारी बसें कामयाब नहीं होता पाती इसलिए इस नवीन मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंतर्गत संचालित बसों की निगरानी इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से की जाएगी। इसके लिए मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एण्ड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड एवं उसकी 7 सहायक कंपनियों में अत्याधुनिक कमांड-कंट्रोल सेंटर स्थापित किए गए हैं। इन सेंटरों के माध्यम से बसों के संचालन, लोकेशन, समयबद्धता एवं अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों की रियल टाइम निगरानी सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही सार्वजनिक बसों में महिला और बाल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इससे यात्री परिवहन व्यवस्था अधिक सुरक्षित, सुगम, पारदर्शी और प्रभावी बनाने में भी मदद मिलेगी। सभी बसों को 07 सीसीटीवी कैमरों, पैनिक बटन और रियल-टाइम व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम से लैस किया जा रहा है। इसके अलावा, पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम), ड्राइवरों की तकनीकी ट्रेनिंग और त्वरित शिकायत निवारण तंत्र के जरिए सुरक्षित एवं समयबद्ध यात्रा सुनिश्चित की जाएगी।
भोपाल, बैतूल, छतरपुर, उज्जैन और ग्वालियर में पांच क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र बनाए जा रहे हैं। राज्य में 22 जिला स्तरीय प्रशिक्षण केंद्र भी जल्द स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों में ड्राइवरों को आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल, यातायात सुरक्षा नियमों और इलेक्ट्रिक व सीएनजीबसों के संचालन की जानकारी दी जाएगी। सरकार का कहना है कि इससे नई बस सेवा का संचालन सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से करने में मदद मिलेगी।
पीपीपी मॉडल से भागीदारी : जन-निजी भागीदारी को गति देने के लिए पारदर्शी अनुबंध प्रणाली और प्रोत्साहन योजनाएं लागू की जाएगी। इस मॉडल से निजी बस ऑपरेटरों को राजस्व रिसाव रोकने, नॉन-फेयर रेवेन्यू (जैसे विज्ञापन व कार्गो सेवाएं) बढ़ाने और आधुनिक डिपो व टर्मिनलों के उपयोग की सुविधाएं मिलेंगी साथ ही प्रशासन का पूर्ण सहयोग भी मिलेगा।
जब चारों तरफ प्रायवेट सेवाओंं का फैलाव हो रहा है तब मोहन सरकार की यह पहल ना केवल स्वागतयोग्य है अपितु नई उम्मीद जगाती है। मध्यप्रदेश शासन की इस नवीन पहल से प्रदेशवासियों को सुगम यात्री परिवहन सेवा के साथ ही परिवहन क्षेत्र में रोजगार और निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। यात्री परिवहन के विस्तार से प्रदेश में बस संचालन, वाहन निर्माण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीकी सेवाओं और अन्य संबद्ध क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी। इससे परिवहन क्षेत्र से जुड़े उद्योगों को प्रोत्साहन मिलने के साथ युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। जब चारों तरफ प्रायवेट सेवाओंं का फैलाव हो रहा है तब मोहन सरकार की यह पहल ना केवल स्वागतयोग्य है अपितु नई उम्मीद जगाती है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार मीडिया शिक्षा संबद्ध हैं)





