भुवनेश्वर: प्रख्यात शिक्षाविद्, समाजसेवी तथा मानवता सेवा डॉ. अच्युत सामंत को अमेरिका के Montana State University के नेटिव अमेरिकन स्टडीज़ विभाग द्वारा विशेष सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें कीस के माध्यम से जनजातीय सशक्तिकरण के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए प्रदान किया गया। डॉ. सामंत इस सम्मान को प्राप्त करने वाले पहले भारतीय तथा पहले गैर-अमेरिकी व्यक्ति बने हैं।
यह सम्मान विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित विशेष समारोह ‘A Legacy of Compassion: Honoring Achyut Samanta and the Art of Giving’ के दौरान प्रदान किया गया।
इस अवसर पर मोंटाना के गवर्नर Greg Gianforte, भारत के कॉन्सुल जनरल Prakash Gupta, Montana World Affairs Council की कार्यकारी निदेशक Nikki Geisler तथा विश्वविद्यालय की अध्यक्ष Waded Cruzado सहित अनेक गणमान्य विभूतियों की उपस्थिति में उन्हें सम्मानित किया गया।
Montana State University का नेटिव अमेरिकन स्टडीज़ विभाग अमेरिका में मूल निवासियों पर शोध के लिए अग्रणी संस्थानों में गिना जाता है। मोंटाना अमेरिका का एक प्रमुख जनजातीय राज्य है, और वहां डॉ. सामंत का पारंपरिक जनजातीय रीति-रिवाजों के अनुसार सम्मान किया गया। नेटिव अमेरिकन समुदाय ने उन्हें अपनी पवित्र जनजातीय चादरें भेंट कर आध्यात्मिक सम्मान प्रदान किया, जो उनकी परंपरा में अत्यंत प्रतिष्ठित माना जाता है।
उल्लेखनीय है कि इसी वर्ष मोंटाना के कई विद्वानों और बुद्धिजीवियों ने कीट एवं कीस का दौरा किया था और डॉ. सामंत के कार्यों की अत्यधिक सराहना की थी। लौटने के बाद उन्होंने डॉ. सामंत को राज्य के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित करने की अनुशंसा की।
इसी प्रकार, शिक्षा और आदिवासी सशक्तिकरण के माध्यम से आदिवासी युवाओं के विकास, भारतीय दर्शन ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के प्रसार तथा भारत और अमेरिका (मोंटाना) के बीच सांस्कृतिक एवं शैक्षिक संबंधों को मजबूत करने में योगदान के लिए Montana World Affairs Council ने डॉ. अच्युत सामंत को ‘Global Visionary Award’ से भी सम्मानित किया।
समारोह में डॉ. सामंत के उस कार्य की विशेष प्रशंसा की गई, जिसके माध्यम से उन्होंने शिक्षा और सशक्तिकरण द्वारा हजारों आदिवासी युवाओं के जीवन में परिवर्तन लाया है।
अपने संबोधन में डॉ. सामंत ने Montana State University तथा Montana World Affairs Council के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान उन्हें भारत के आदिवासी समुदायों के विकास के लिए और अधिक समर्पण के साथ कार्य करने की प्रेरणा देगा।





