Monday, April 22, 2024
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डॉ. सुषमा आहूजा :हाड़ोती की विरासत को नई पहचान देने का जुनून

पिछले कुछ दिन पूर्व एक कार्यक्रम में इतिहासविद और सेवा से.नि. प्राचार्य जे.डी. बी.कन्या महाविद्यालय डॉ.सुषमा आहूजा से मुलाकात हुई। नौकरी के दौरान अक्सर मिलना हो जाता था पर इस बार लंबे अंतराल बाद भेंट हुई। दोनों ही लिखने पढ़ने वाले और इतिहास में रुचि रखने की वजह से पूछ लिया मैडम आपने तो हाड़ोती की मंदिर कला और स्थापत्य पर काफी काम किया है उसके बाद किस क्षेत्र पर काम किया है ? कहने लगी हम तो इतिहास पढ़ते हैं, इसी पर सोचते हैं और कलम चलाते हैं। हाडोती एलोरा एवं खजुराहो में प्राप्त महिला मूर्तियों का विभिन्न रूपों महिषासुरमर्दिनी दुर्गा ,सप्तमातृका, गंगा ,यमुना, अप्सरा आदि अंकन का अध्ययन और गहन विश्लेषण कर इस पर काम किया है। इस शोध कार्य पर “सत्यम शिवम सुंदरम – फीमेल फिगराइन इन टेंपल आर्ट ” प्रकाशित हुई है जिसमें महिला को समाज में उचित स्थान पर प्रतिष्ठित करने के लिए एवं उसके प्रति दृष्टिकोण बदलने के लिए यह प्रयास किया गया है। पुस्तक की भूमिका भारत के प्रमुख पुरातत्ववेता डाॅ. बी. आर. मणि द्वारा लिखी गई है। देश में राजस्थान के कोटा में निवास करने वाली डॉ. सुषमा आहूजा हाड़ोती की विरासत के प्रति पूर्णरूप से संवेदनशील हैं। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी पत्र भेज कर आपके कार्य की सराहना की है।

आपने बाडोली के मंदिर से चुराई गई नटराज की प्रतिमा की पुनःवापसी के लिए आप लगातार लेख लिखती रही हैं। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के एंटीक्विटी विभाग तक आप पत्र दे कर आई और हमारी बहुमूल्य विरासत की प्रतीक प्रतिमा अब भारत में वापस लाने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह किया।

इतिहास क्षेत्र में किए गए अन्य कार्यों के बारे में आपने बताया कि कोटा चंबल फेस्टिवल के दौरान सन 2006 और 2013 में प्रशासन के साथ विरासत पर आधारित प्रदर्शनी का भी आयोजन किया । ईटीवी राजस्थान के साथ आपने कोटा के प्रसिद्ध दशहरा मेला एवं चन्द्र भागा कार्तिक मेला पर डाक्यूमेंट्री बनवाई जिसे ईटीवी द्वारा प्रसारित किया गया। हाड़ौती विरासत एवं पर्यटन पर कोटा विश्व विद्यालय के विद्यार्थियों के साथ डाक्यूमेंट्री बनाई जो यूट्यूब पर उपलब्ध है। वेबसाइट से भी देश विदेश के कई लोगों द्वारा जानकारी प्राप्त की गई है।

आपने कई अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय सेमिनार में हाडोती की कला और संस्कृति पर अपने अनेक शोध पत्र प्रस्तुत किए हैं। शोध के साथ-साथ जागरूकता कार्यक्रम भी आपके द्वारा आयोजित किए जाते रहे हैं । कोटा विश्वविद्यालय के हेरिटेज विभाग में क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित करवाई गई। भारतीय सांस्कृतिक निधि के सौजन्य से भी आपने विरासत के प्रति जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए। कोटा संग्रहालय से भी छात्रों को परिचित करवाया। समय – समय पर हेरिटेज वॉक में भी आपने अपनी सहभागिता निभाई है। विभिन्न देश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में आपके लेख प्रकाशित होते रहते हैं और प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया विशेष टिप्पणी प्राप्त कर प्रकाशित और प्रसारित करते रहे हैं। आपने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज मुम्बई में यूजीसी की ‘कैपिसिटी बिल्डिंग ऑफ वीमेन मैनेजर्स इन हायर एजुकेशन’ वर्कशॉप में राजस्थान से चयनित ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर प्राप्त की है। महिलाओं की स्थिति पर भी आपने लेख लिखे हैं ।

आपने हाड़ोती के मंदिर स्थापत्य पर पी.एचडी. की उपाधि प्राप्त की है और शीघ्र ही मंदिर स्थापत्य एवं शिल्प कला की समृद्ध विरासत ” पर आपकी नई पुस्तक प्रकाशित होने जा रही है। इन पुस्तकों के संदर्भ में आपका कहना है “कला का उद्देश्य जीवन के लिये है, वह कोई उद्देश्यहीन साधना नहीं हैं। यह भारत के दर्शन व मूल्यबोध की सुंदर अभिव्यक्ति है जिसे कलाकार ने अनुभव किया और जो वह दर्शक तक पहुंचाना चाहता है। भारत में धर्म की पृष्ठभूमि में स्थापत्य व कला का उदय हुआ है। भारतीय कला का अध्ययन मंदिरों के माध्यम से किया जाता है किन्तु भारतीय कला के अवशेषों का केवल बाह्यः अध्ययन ही पर्याप्त नहीं है उनके भीतरी अर्थ का भी विवेचन आवश्यक है। भारतीय कला की आत्मा उसके अलंकरण प्रतीकों में है जो न केवल देखने वाले को प्रसन्न करती है अपितु एक पावन उद्देश्य की पूर्ति कर सुख-समृद्धि की प्राप्ति व अमंगल से रक्षा भी करती है। भारत में स्थापत्य कला भी है, विज्ञान भी, पुरातत्व भी तकनीक भी और दर्शन भी।

भारत में हम कला, दर्शन और विज्ञान के बीच कोई सीमारेखा नहीं खींच सकते। स्थापत्य कला का अध्ययन करते समय हमें शास्त्रीय (ग्रंथ) व उपलब्ध प्रमाण (स्थापत्य अवशेष) दोनो पक्षों को लेकर चलना होगा। अतः हमें उपलब्ध पुरास्मारकों का अध्ययन शास्त्रों के साथ करना होगा। इसी क्रम में राजस्थान के हाडोती क्षेत्र में विभिन्न कालों में बने समृद्ध, स्थापत्य कला व शिल्प के प्रमाण मंदिरों का सर्वेक्षण एवं अध्ययन करने का प्रयास किया है। स्थापत्य के प्रतिनिधि ये सभी मंदिर,मूर्तियाँ, शिलालेख भारतीय कला एवं ज्ञान की धरोहर है। इनकी सुरक्षा करना हमारा कर्त्तव्य है। पुस्तक हाड़ोती अँचल की कला विरासत की सुरक्षा और इसे प्रतिष्ठित स्थान दिलाने की दिशा में एक सामयिक कदम होगी ऐसी मेरी आस्था ही नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास है।”

वह बताती हैं कभी सोचा भी नही था हाथ में किताबें लेकर कक्षाएं रेगुलर पढ़ने वाली छात्रा सुषमा एक दिन इसी कॉलेज से प्रिंसिपल डॉ. सुषमा आहूजा बनकर रिटायर होगी। लेकिन पढ़ाई में पूरी ईमानदारी बरती है। कभी क्लास बंक नहीं की है। लास्ट पीरियड तक अटैंड किया है। उन्होंने बताया कि जेडीबी से अलग हुए गर्ल्स कॉमर्स कॉलेज में सत्र 2016-17 की जिम्मेदारी संभाली थी। नए कॉलेज के लिए प्रयास कर कोटा यूनिवर्सिटी से मान्यता दिलवाने से लेकर यूजीसी से 12 बी की मान्यता सहित अन्य प्रोसेस पूरा करवाया। उन्होंने कहा कि मेरे लिए वह बड़ी खुशी संतोष का पल था जब कि 38 साल की सफल कॉलेज सेवा के बाद रिटायर हुई थी। प्राचार्य पद पर रहते स्टूडेंट्स के रूप में पढ़ाई और अनुशासन पर पूरा फोकस रखा।

उन्होंने बताया कि 1974 में जेडीबी में एडमिशन लिया था। यहां से बीए के बाद गवर्नमेंट कॉलेज से इतिहास में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की। इसके तुरंत बाद लेक्चरर की नौकरी मिल गई। लेक्चरर के बाद धीरे-धीरे वाइस प्रिंसिपल और प्रिंसिपल बन गई। इस कॉलेज से पूरा जुड़ाव रहा है। यहां पढ़ाई के अलावा अन्य कार्यक्रमों में पूरा भाग लिया है। इतिहासविद के रुप में विरासत, पर्यटन, एवं संस्कृति के रुप में कार्य किया है। उन्होंने बताया कि कोटा यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ़ हैरिटेज डिपार्टमेंट की स्थापना की और समन्वयक के रूप में इतिहास, कला और संस्कृति के लिए पूरा सहयोग किया है। आपने 38 वर्षों तक अकादमिक के साथ-साथ प्रशासनिक पद का भी कुशलतापूर्वक निर्वहन किया। आपके विद्यार्थी आज विभिन्न उच्च स्तरीय पदों पर आसीन हैं यह बताते हुए उनके चेहरे की चमक देखते ही बनती है।। आप इंडियन हिस्ट्री एंड कल्चर सोसाइटी की आजीवन सदस्य हैं। आप समाज सेवा कार्यों में भी अग्रणी रहीं हैं और वर्तमान में लायंस क्लब कोटा साउथ की उपाध्यक्ष हैं।

आपको 26 जनवरी 2009 को राजस्थान सरकार एवं जिला प्रशासन द्वारा आपको गणतंत्र दिवस के अवसर पर प्रशस्ति पत्र एवम मंडल प्रदान किया गया । कई विभिन्न संस्थाओं द्वार आपको टीचर्स डे ,टूरिज्म डे पर सम्मानित किया गया है। प्रतिष्ठित विमेन रिकॉग्निशन अवार्ड 2019 एफएम तड़का राजस्थान पत्रिका द्वारा प्रदान किया गया है। आप हाड़ोती क्षेत्र को कला व स्थापत्य में उच्च स्तर स्थान पर प्रतिष्ठित कर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए सतत प्रयासरत हैं।

संपर्क मोबाइल -9928074780
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डॉ.प्रभात कुमार सिंघल
लेखक एवम् पत्रकार, कोटा

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एक निवेदन

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