मुंबई से मात्र 100 किलोमीटर दूर पालघर जिले के आदिवासी आज भी छोटी छोटी सुविधाओं और साधनों से वंचित हैं। इस क्षेत्र में प्रकृति ने सब-कुछ दिया है मगर प्रकृति के इस वरदान को आदिवासियों तक पहुँचाने और उनको साधन संपन्न बनाने की दिशा में बहुत कम काम हो रहा है। सरकारी योजनाएं तो सरकारी कार्यलायों व कर्मचारियों और अधिकारियों के पास ही दम तोड़ देती है।
लेकिन समाज में ऐसे कई लोग हैं जो सरकार के भरोसे न रहकर समाज की शक्तियों को जोड़कर आदिवासियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं। केएन गोविंदाचार्य द्वारा स्थापित भारत विकास संगम द्वारा इस क्षेत्र में कई सेवा कार्य किए जा रहे हैं। इस क्षेत्र में सेवाकार्यों को गति दे रहे संजय पटेल पूरे क्षेत्र में बापूजी के नाम से जाने जाते हैं और उनके ही प्रयासों का परिणाम है कि आदिवासी परिवारों में सामूहिक विवाह हो रहे हैं, उनको आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार प्रयास हो रहे हैं और मिशनरियों द्वाराचलाए जारे धर्म परिवर्तन के कुचक्र को तोड़ने का भी काम हो रहा है।
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श्री संजय पटेल ने मुंबई सहित गुजरात के सूरत के संपन्न लोगों को जोड़कर इस क्षेत्र में कई सेवा अभियान प्रारंभ किए हैं और वे लगातार तीस वर्षों से इन कामों में पूरे समर्पित भाव से लगे हैं। उन्होंने पूरे क्षेत्र में हजारों समर्पित कार्यकर्ता तैयार किए हैं जो क्षेत्र के आदिवासी समाज की और हर व्यक्ति की छोटी से छोटी समस्या को लेकर जागरुक हैं।
पिछलने दिनों संस्था द्वारा पालघर जिले की तलासरी तहसील में 12 स्वास्थ्य केंद्र और एंबुलेंस की व्यवस्था की गई। इनके प्रयासों से बरसों से स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित इन आदिवासी परिवारों को निःशुल्क स्वास्थ सुविधाएं मिलने लगी है।
तलासरी तहसील के आदिवासी परिवारों को आत्मनिर्र बनाने के लिए भारत विकास संगम द्वारा एक हजार परिवारों को फलदार वृक्ष प्रदान किए गए। कार्यक्रम का आयोजन अनंत श्री सुखरामजी ट्रस्ट के संस्थान रामद्वारा के सहयोग से किया गया।

अनंत श्री सुखरामजी ट्रस्ट (ASST) राजस्थान पब्लिक ट्रस्ट एक्ट के अंतर्गत पंजीकृत एक धार्मिक एवं सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट है। ट्रस्ट का प्रधान कार्यालय रामधाम रामचौकी, तहसील बिराई, जिला जोधपुर (राजस्थान) में स्थित है। मुंबई में मलाड और भयंदर में ट्रस्ट के रामद्वारा से जनहितार्थ और धार्मिक कार्यक्रम निरंतर रूप से किए जाते रहे है| ट्रस्ट की मुंबई शाखा से मुख्य कार्यकर्ता निर्मल रेवाड़िया, सिद्धार्थ जैन, संदीप केडिया, श्री पारीक और रामनिरंजन भूतड़ा अपने रामस्नेही भाई बहनो के साथ एक बस भरकर मुंबई से पहुँचे और सबने मिलकर दस गाँवों के एक हजार आदिवासी परिवारों को पौधे वितरित किए।

इस अवसर पर मुंबई के समाज सेवी श्री एसके बगरिया और श्री लादूराम सोनी भी अपने सहयोगियों के साथ उपस्थित थे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत विकास संगम के श्री संजय पटेल ने कहा कि जब ये आदिवासी अपने घरों में और अपने खेतों में इन वृक्षों को लगाएंगे तो पाँचवें साल इनको भरपूर आमदनी होगी और इसके बाद इनकी कई पीढ़ियाँ इन वृक्षों से कमाई करती रहेगी। उन्होंने बताया कि क्षेत्र के आदिवासी समाज के पास हर एक के पास एक से दो एकड़ के खेत हैं। उन्होंने कहा कि गाय पालन और गोबर की खाद से इनके खेतों में जैविक तरीके से खाद दी जाएगी। इसके साथ ही इस क्षेत्र में आदिवासियों को सब्जी पैदा करने के अभियान से भी जोड़ा गया है, इनकी सब्जी बगैर किसी बिचौलिये के सीधे मुंबई के परिवारों तक पहुँचेगी। इससे मुंबई के लोगों को जैविक खेती वाली, शुध्द सब्जी सस्ते दामों में मिलेगी और इन आदिवासियों को इनकी फसल का उचित दाम भी मिलेगा।

श्री संजय पटेल ने बताया कि क्षेत्र में दस-दस गाँवों में ग्राम विकास समितियाँ बनाकर सब्जी व फल उत्पादन की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है।
इसके साथ ही स्कूलों में बच्चों को बीज देकर उनके स्कूल व घर के आसपास वृक्षारोपण व सब्जी उगाने के लिए प्रेरित करने का अभियान भी चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में पूरे गाँव को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पशुपालन, डेयरी उद्योग जैसे प्रकल्प भी शुरु किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि गाँव का अदिवासी समाज सुखी समाज है लेकिन संपन्न नहीं है, और शहर का समाज संपन्न है मगर उनके पास सुख नहीं है। इन दोनों धाराओं को मिलाकर दोनों समाजों को सुख और संपन्न बनाना यही हमारा उद्देश्य है।
इस अवसर पर महाराष्ट्र के जाने माने पर्यावरण प्रेमी और पूरे महाराष्ट्र में 50 लाख बरगद के पेड़ लगाने का अभियान चलाने वाले श्री संतोष जाधव ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में एक लाख बरगद के पेड़ लगाने का अभियान प्रारंभ किया जा रहा है।
ट्रस्ट विगत कई दशकों से संपूर्ण भारत में जनसामान्य के लिए विभिन्न धर्मार्थ एवं आध्यात्मिक गतिविधियों का संचालन करता आ रहा है। ट्रस्ट द्वारा जाति, संप्रदाय, रंग एवं लिंग आदि के किसी भी प्रकार के भेदभाव के बिना समाज के सभी वर्गों के लोगों के हित एवं कल्याण के लिए सेवाभावी कार्य किए जाते हैं।





