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फालुन दाफा – मन और शरीर की साधना का अभ्यास

फालुन दाफा (जिसे फालुन गोंग भी कहा जाता है) मन और शरीर की एक उच्च स्तरीय साधना पद्धति है. प्राचीन समय से यह पद्धति एक गुरु से एक शिष्य को हस्तांतरित की जाती रही है. वर्तमान समय में फालुन दाफा को पहली बार चीन में मई 1992 में श्री ली होंगज़ी द्वारा सार्वजनिक किया गया. आज, 114 से अधिक देशों में 10 करोड़ से अधिक लोग इसका अभ्यास कर रहे हैं. श्री ली होंगज़ी इन्हें स्वतंत्र विचारों के लिए ‘सखारोव पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया और ‘नोबेल शांति’ पुरस्कार के लिए भी मनोनीत किया जा चुका है. फालुन दाफा और इसके संस्थापक, श्री ली होंगज़ी को, दुनियाभर में 1,500 से अधिक पुरस्कारों और प्रशस्तिपत्रों से भी नवाज़ा गया है.

‘फालुन’ का अर्थ है विधान चक्र और ‘दाफा’ का अर्थ है महान मार्ग. यह विश्व की मूलभूत प्रकृति : सत्य – करुणा – सहनशीलता के नियमों पर आधारित है. क्योंकि फालुन दाफा मन और शरीर की एक परिपूर्ण साधना पद्धति है, इसमें पांच सौम्य और प्रभावी व्यायामों का भी समावेश है, किन्तु बल मन की साधना या नैतिक गुण साधना पर दिया जाता है. नैतिक गुण के सुधार से शरीर में व्यापक परिवर्तन आते हैं.

फालुन दाफा की पुस्तकें, व्यायाम निर्देश और अभ्यास स्थलों कि जानकारी इसकी वेबसाइट www.falundafa.org और www.falundafaindia.org पर उपलब्ध है. फालुन दाफा सदैव नि:शुल्क सिखाया जाता है.

फालुन दाफा भारत में

हमारे देश में भी हजारों लोग दिल्ली, मुंबई, बैंगलोर, हैदराबाद, नागपुर, पुणे आदि शहरों में फालुन दाफा का अभ्यास कर रहे हैं. अनेक स्कूलों में इसका नियमित अभ्यास किया जाता है, जिसका सकारात्मक प्रभाव विद्यार्थियों के परीक्षा परणामों, नैतिक गुण और शारीरिक स्वास्थ्य में दिखाई पड़ता है. फालुन दाफा का प्रदर्शन विभिन्न शहरों में आयोजित पुस्तक प्रदर्शनियों और सार्वजनिक स्थलों में भी किया जाता है. फालुन दाफा की निशुल्क वर्कशॉप अपने स्कूल, कॉलेज या ऑफिस में आयोजित कराने के लिए इसके स्वयंसेवकों से संपर्क किया जा सकता है.

फालुन गोंग का चीन में दमन

फालुन गोंग का अभ्यास दुनियाभर में 114 से अधिक देशों में 10 करोड़ से अधिक लोगों द्वारा किया जा रहा है. लेकिन दुःख की बात यह है कि चीन, जो फालुन गोंग की जन्म भूमि है, वहां इसका दमन किया जा रहा है. इसके स्वास्थ्य लाभ और आध्यात्मिक शिक्षाओं के कारण चीन में फालुन दाफा इतना लोकप्रिय हुआ कि 1999 तक करीब 7 से 10 करोड़ लोग इसका अभ्यास करने लगे. चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की मेम्बरशिप उस समय 6 करोड़ ही थी. इसका बढ़ता जनाधार चीनी शासकों को खलने लगा. चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने फालुन दाफा की शांतिप्रिय प्रकृति के बावजूद इसे अपने प्रभुसत्ता के लिए खतरा माना और 20 जुलाई 1999 को इसपर पाबंदी लगा दी और इसे कुछ ही महीनों में जड़ से उखाड़ देने की मुहीम चला दी.

पिछले १८ वर्षों से चीनी कम्युनिस्ट पार्टी फालुन गोंग को दबाने के लिए क्रूर दमन कर रही है. लाखों फालुन गोंग अभ्यासियों को बंदी बना लिया गया, लेबर कैंप में भेजा गया, उनकी जमीन-जायदाद जब्त कर लीं. अभ्यासियों को शारीरिक और मानसिक यातनाएं दी जाती हैं और अभ्यास को छोड़ने के लिए ब्रेनवाश किया जाता है. चीन में सैकड़ों लेबर कैंप हैं जहाँ लाखों फालुन गोंग अभ्यासी कैद हैं. इन्ही कैदियों का शोषण कर उनसे मुफ्त खिलोने, कपड़े, मूर्तियाँ और अन्य उत्पाद बनवाये जाते हैं. यही कारण है कि ये इतने सस्ते होते हैं.

चीन में अवैध मानवीय अंग प्रत्यारोपण अपराध

पिछले कुछ वर्षों में चीन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अंग प्रत्यारोपण के लिए पर्यटन केंद्र के रूप में उभरा है. हजारों लोग वहां अंग प्रत्यारोपण के लिए जाते हैं. किन्तु उन्हें यह जानकारी नहीं है कि ये अंग कहाँ से आते हैं.

पिछले 15 वर्षों से चीन में सालाना 10,000 से अधिक अंग प्रत्यारोपण हुए हैं. चीन में अंग दान में देने की प्रथा नहीं है. तो ये अंग कहाँ से आते हैं? आश्चर्यजनक यह है कि चीन में अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा अवधि बहुत कम है – केवल कुछ हफ्ते. जबकि दूसरे देशों में अनुकूल अंग मिलने में वर्षों लग जाते हैं. तो यह कैसे संभव है?

यह अविश्वसनीय लगता है, किन्तु चीन में अंगों के प्रत्यारोपण के लिए अंग न केवल मृत्युदण्ड प्राप्त कैदियों से आते हैं, बल्कि बड़ी संख्या में कैद फालुन गोंग अभ्यासियों से आते हैं. चीन में मानवीय अंग प्रत्यारोपण के इस अपराध में बड़े पैमाने पर अवैध धन कमाया जा रहा है. कोर्निया की कीमत 30,000 डॉलर है तो लीवर और किडनी की 1,80,000 डॉलर. चीन के अवैध मानवीय अंग प्रत्यारोपण उद्योग का सालाना कारोबार 1 बिलियन डॉलर का है.

स्वतंत्र जाँच द्वारा यह प्रकाश में आया है कि चीनी शासन, सरकारी अस्पतालों की मिलीभगत से, कैदियों के अवैध मानवीय अंग प्रत्यारोपण के अपराध में संग्लित है. चीन में कैद फालुन गोंग अभ्यासी इस मानवता के विरुद्ध अपराध के मुख्य शिकार हैं. इस अमानवीय कृत्य में हजारों फालुन गोंग अभ्यासियों की हत्या की जा चुकी है. उनके अंग जैसे किडनी, लीवर, कोर्निया, फेफड़े आदि निकाल कर अवैध मानवीय अंग प्रत्यारोपण के लिए ऊँचे दाम पर बेच दिया जाता है. इन ख़बरों से विचलित हो कर कनाडा के पूर्व स्टेट सेक्रेटरी डेविड किल्गौर और मानवाधिकार मामलों के वकील डेविड मातास ने इस विषय पर शोध आरंभ की. उन्होंने 2006 में अपनी 140 पेज की रिपोर्ट जारी की जिसके निष्कर्ष में इन आरोपों की पुष्टि की गयी. किल्गौर और मातास रिपोर्ट के अनुसार सन 2000 और 2005 के बीच चीन में करीब 41500 अंग प्रत्यारोपण किये गए जिनमे अंगों का स्रोत अज्ञात है.

स्वतंत्र जाँचकर्ता और चीन विशेषग्य इथन गुट्मन ने 2014 में अपनी तीसरी पुस्तक “द स्लॉटर” का प्रकाशन किया. इथन गुट्मन के अनुसार चीन में सन 2000 और 2008 के बीच 65000 फालुन गोंग अभ्यासियों उनके अंगों के लिए मौत के घाट उतार दिया गया.

चीन में अंग प्रत्यारोपण के लिए फालुन गोंग अभ्यासियों कि हत्या की ख़बरों के प्रमाण मिलने पर अनेक देशों ने सन 2006 से सख्त कदम उठाने शुरू कर दिये. ऑस्ट्रेलिया, ताइवान, स्पेन, इजराइल और इटली की सरकारों ने अपने नागरिकों के लिए चीन में अंग प्रत्यारोपण के लिए पर्यटन पर पाबन्दी लगा दी. अमेरिकन कांग्रेस ने विधेयक H.RES.281 द्वारा चीन में कैदियों के अंग प्रत्यारोपण की प्रथा को रोकने के लिए आदेश पारित किया गया. 2013 में यूरोपियन संसद ने चीन में अवैध मानवीय अंग प्रत्यारोपण की प्रथा को रोकने के लिए विधेयक पारित किया.

चीन की प्रतिक्रिया

दिसम्बर 2014 में, चीनी अधिकारीयों ने ज्ञापन दिया कि जनवरी 2015 से मृत्युदण्ड प्राप्त कैदियों के अंग प्रत्यारोपण की प्रथा को समाप्त कर दिया जायेगा. चीन का ये कदम अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की निंदा रोकने के लिए एक छलावा मात्र है. साथ ही, इसमें इस उन प्रमाणों की भी अनदेखी की गयी है कि चीन में प्रत्यारोपण के लिए अधिकांश अंग वहां कैद फालुन गोंग अभ्यासियों की हत्या द्वारा प्राप्त होते हैं. चीन में बिलियन डॉलर अंग प्रत्यारोपण उद्योग आज भी पनप रहा है, और प्रमाण बताते हैं कि इस घिनौनी प्रथा में कोई बदलाव नहीं आया है.

आपने इसके बारे में अभी तक सुना क्यों नहीं?

कम्युनिस्ट शासन के अधीन चीन में अभिव्यक्ति और विचारों की स्वतंत्रता नहीं है और मीडिया नियंत्रित है. चीन के अन्दर की वास्तविक स्थिति का बाहर के विश्व में नहीं पहुँच पातीं.

मानव अधिकार संगठनों को जेलों और श्रम शिविरों में जाने से रोक दिया जाता है। विदेशी मीडिया और उनके मुखबिरों पर हमला किया जाता है और धमकी दी जाती है। राजकीय मीडिया दुनिया के लोगों को गुमराह करने का काम करती है.

आप कैसे मदद कर सकते हैं?

इस जानकारी को साझा करें और www.faluninfo.net और www.StopOrganHavesting.org से जानकारी लें.

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