प्रश्न बिलकुल वैज्ञानिक है - आज का बच्चा पूछता है, "पापा, ब्रह्मा जी हंस पर कैसे उड़ते हैं?"

हम उसे कथा सुना कर टाल देते हैं, पर ऋषि ने कथा नहीं, कोड लिखा था। आज के विज्ञान से ही उस कोड को खोलते हैं, जो वाहन अभी तक नहीं बताए, उन्हीं को लेते हैं।

1. सूर्य के सात घोड़े - S= सप्तरंगी प्रकाश

पुराण कहते है - सूर्य के रथ में सात घोड़े हैं।

आज का विज्ञान क्या कहता है? न्यूटन ने 1666 में प्रिज्म से सिद्ध किया - सूर्य का श्वेत प्रकाश सात रंगों से बना है - VIBGYOR।

हमारे ऋषि ने हजारों साल पहले कह दिया था - अश्व = आशु गमन करने वाला, अर्थात किरण। सात अश्व = सात किरणें।

प्रमाण - ऋग्वेद 1.164.2 - "सप्त युज्यन्ति रथं एकचक्रम" - एक चक्र वाले रथ में सात घोड़े जुते हैं। यह रथ सूर्य है, सात घोड़े प्रकाश के सात बैंड हैं।

2. चंद्रमा का हिरण और खरगोश - मृग लांछन

चंद्रमा के वाहन को मृग कहा है, इसीलिए चंद्रमा को मृगांक कहते हैं।

आज आप पूर्णिमा के चाँद को देखिए, नासा की तस्वीर में भी आपको चाँद पर काले धब्बे हिरण की तरह दिखेंगे। वे धब्बे क्या हैं? - वे चंद्रमा के विशाल गड्ढे - Maria हैं।

ऋषि ने कहा - चंद्रमा पर मृग बैठा है। अर्थात चंद्रमा के कलंक - क्रेटर ही उसका वाहन - चिन्ह है। वाहन का अर्थ है पहचान।

3. इंद्र का ऐरावत हाथी - बादल का वैज्ञानिक नाम

इंद्र वर्षा के देवता हैं, ऐरावत पर बैठते हैं। ऐरावत = जल को फेंकने वाला।

ऋग्वेद में ऐरावत को "अभ्र-मातंग" कहा है - अभ्र माने बादल, मातंग माने हाथी। बादल हाथी जैसा ही तो दिखता है। और हाथी जैसे ही सूंड से जल फेंकता है, बादल भी जल वैसे बरसाता है।

आज मौसम विज्ञान में भी बादलों को हाथी की उपमा दी जाती है - Cumulonimbus को हाथी की पीठ जैसा कहा जाता है।

इंद्र का वज्र = बिजली, ऐरावत = मेघ। बिजली मेघ पर ही सवार हो कर आती है, यह तो सीधा विज्ञान है।

4. शनि का कौआ और यम का भैंसा - Decomposition का विज्ञान

ये दो वाहन सबसे ज्यादा डरावने लगते हैं।

शनि = न्याय, धीमी गति, दंड। कौआ क्या करता है? सड़ा-गला साफ करता है। प्रकृति का स्कैवेंजर है। वह किसी को ऐसे ही नहीं छोड़ता, घंटों देखता है। शनि भी वैसे ही - धीरे-धीरे कर्मों का फल देता है। कौआ काला है, शनि भी अंधकार, अर्थात अनुशासन का प्रतीक है।

यम का भैंसा - यम मृत्यु के देवता हैं। भैंसा सबसे ज्यादा बलशाली, पर आलसी प्राणी है, कीचड़ में बैठा रहता है। मृत्यु भी वैसी ही है - अचानक आएगी तो भैंसे जैसी ताकत से कोई नहीं रोक सकता। और भैंसा अंधेरे में सबसे ज्यादा देख सकता है, यम भी अंधकार - मृत्यु-लोक में देखता है।

आयुर्वेद प्रमाण - भैंसे के सींग में यम-गंध होती है, जो मृत्यु के समय निकलने वाली गैसों को सोख लेती है, इसलिए शव के पास भैंसे की बात कही गई।

5. वरुण का मगर - मकर

वरुण जल के देवता हैं, उनका वाहन मकर - मगरमच्छ।

मगर क्या है? जल में सबसे प्राचीन, सबसे शक्तिशाली प्राणी। वह जल के इको-सिस्टम का राजा है। वह जल को शुद्ध रखता है।

आज पर्यावरण विज्ञान कहता है - अगर मगरमच्छ न हो तो नदी सड़ जाएगी। वरुण का मकर पर बैठना = जल के पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन।

6. अग्नि का मेढ़ा और वायु का हरिण

अग्नि का वाहन मेढ़ा - मेढ़ा कभी सीधा नहीं चलता, कूद-कूद कर चलता है। अग्नि की लपटें भी वैसी ही हैं - कभी इधर, कभी उधर। और मेढ़े के बाल ज्वलनशील होते हैं।

वायु का वाहन हरिण - हवा से तेज क्या दौड़ता है? हरिण। वायु की गति को नापने का सबसे पुराना पैमाना हरिण की गति थी।

वैज्ञानिक युग में अजीब क्यों लगता है?

क्योंकि हमने दो भाषाओं को मिला दिया।

ऋषि की भाषा थी - प्रतीक भाषा - Symbolic Language।

आज की भाषा है - भौतिक भाषा - Literal Language।

पुराणों में वाहन कोई चिड़ियाघर नहीं, "गुण-परिवहन तंत्र" है। हर देवता एक ऊर्जा है, हर पशु उस ऊर्जा की प्रकृति है।

साभार-https://www.facebook.com/share/p/1F7wAeYPgF/ से