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किसान के बेटे ने बनाया नायाब उपकरण

कहावत है, दीवारों के भी कान होते हैं। एक किसान के बेटे ने वाकई यह 'कान' बना दिया। सौ मीटर के दायरे में मोबाइल फोन पर या आपस में कनबतिया हो रही हैं, तो यह 'कान' सुन लेगा। इसके निर्माण पर लागत आई है मात्र पांच हजार रुपये और नाम रखा गया है मल्टीटॉस्किंग मशीन।

ये कमाल किया है मथुरा के बाजना क्षेत्र के सदीकपुर गांव के निवासी अमित चौधरी ने। बाबा साहब अम्बेडकर पॉलीटेक्निक से मैकेनिकल में डिप्लोमा कर रहे अमित के पिता ब्रह्मजीत सिंह साधारण किसान हैं। विज्ञान के नए आविष्कार करने का शौक अमित को कुछ साल पूर्व लगा। उसने गांव में ही मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान खोली, तो मोबाइल उपकरणों को आपस में जोड़ते समय उसके दिमाग में नए विषयों पर काम करने की सोच पनपी। उसे लगा कि इनके उपयोग से वह नए आविष्कार कर सकता है। इसी के साथ प्रयास शुरू किया। काम में वक्त न दे पाने के कारण उसकी दुकान बंद हो गई।इसी बीच उसने मोबाइल की तर्ज पर बिना किसी खर्च के आवाज सुनने को उपकरण बनाने का प्रयास जारी रखा। उसकी मेहनत 5000 रुपये के खर्च के साथ लगभग एक साल में सफल हुई।

अमित ने ऑडियो फ्रीक्वेंसी, आइसी, मोबाइल लीड के वायर, लैपटॉप की बैटरी, मोबाइल की बैटरी, एक स्पीकर और वायरलेस हेडफोन की मदद से 100 मीटर के दायरे में आवाज सुनाने वाला उपकरण आखिर तैयार कर ही लिया। उसने अपने इस उपकरण को मल्टीटास्किंग मशीन का नाम दिया है। उसका यह उपकरण किसी की भी जासूसी कर सकता है।

तीन हिस्सों में बंटा है उपकरण

अमित का यह उपकरण तीन हिस्सों में बंटा हुआ है। इसका एक हिस्सा बल्ब के रूप में है। इसमें माइक लगाया गया है। जासूसी करने वाली जगह पर यह टांगा जा सकता है। इसके बल्ब के साथ लगे होने के कारण इस पर किसी को शक भी नहीं होगा। वहीं दूसरे हिस्से में एक आइसी और मशीन है। इसे भी बल्ब से 100 मीटर की दूरी तक कहीं भी छिपाकर आसानी से रखा जा सकता है। तीसरा हिस्सा वायरलेस हेडफोन है। इसे चालू करने से बल्ब के पास हो रही बातचीत को सुना जा सकता है।

बड़े काम की मशीन

मथुरा। अमित की मल्टीटास्किंग मशीन बड़े ही काम की है। इसमें सिम लगाकर फोन की तरह बात भी कर सकते हैं। वहीं इससे टैबलेट और मोबाइल को चार्ज भी कर सकते हैं। यही नहीं, इसे टीवी या मोबाइल से कनेक्ट कर गाने भी सुने जा सकते हैं।

क्रैश हो गया था सिंगल सीटर हेलीकॉप्टर

अमित इस समय 18 फुट लंबा सिंगल सीटर हेलीकॉप्टर तैयार करने में जुटे हैं। उन्होंने जून में 40,000 रुपये की व्यवस्था कर इसे तैयार भी कर लिया था। मगर टेस्टिंग के दौरान यह क्रैश हो गया। दोबारा पैसे जुटाकर वे इसे बनाने की तैयारी में हैं। उनके मुताबिक वे इसे स्कूटर के इंजन, फाइबर की बॉडी, बाइक की गिरारी और घर के पंखों की मदद से तैयार कर रहे हैं।

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