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महिला कैदियों ने भी कायम की मिसाल

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर देश की विभिन्न जेलों में बंद महिला बंदियों को उनके उल्लेखीय योगदान के लिए ‘तिनका तिनका बंदिनी अवॉर्ड्स’ से सम्मानित किया जाएगा। महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने इन पुरस्कारों की घोषणा की है। प‍त्रकार और जेल सुधार कार्यकर्ता वर्तिका नंदा द्वारा देश में पहली बार इस तरह की पहल की गई है।

इस साल इस पुरस्कार के लिए 25 वर्ष से 83 वर्ष की 25 महिलाओं को चुना गया है। इन महिलाओं का चुनाव देश की विभिन्न जेलों से प्राप्त नामांकन के आधार पर किया गया है।

उप्र की जेल में बंद सुंदरा के लिए विशेष सिफारिश की गई है, जिसने आर्गेनिक खेती और जेल में हरियाली को बढ़ावा देने का काम किया है। इनकी मेहनत से जेल में केमिनल फ्री सब्जियां उगाई जा रही हैं और उन्हें विभिन्न जेलों में भी भेजा जा रहा है।

गुजरात की रमीलाबेन दिनेश पंचाल को नर्स के रूप में नि:स्वार्थ सेवा करने के लिए चुना गया है। वहीं डासना जेल में दंत चिकित्सक के रूप में योगदान देने के लिए डॉ. नूपुर तलवार को चुना गया है। डॉ. नूपुर तलवार अपनी बेटी आरुषि तलवार की हत्या के आरोप में जेल में बंद हैं। वहीं 65 वर्षीय जेतुन को जेल में प्रौढ़ शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए चुना गया है। राजस्थान की भीलवाड़ा जेल में बंद जेतुन 2014 में जब पहली बार जेल में आई थीं तब वह अनपढ़ थीं, लेकिन सिर्फ पांच महीनों में ही उन्होंने ओपन स्कूल, नोएडा से बुनियादी साक्षरता परीक्षा पास की और अब वह जेल में बड़ी उम्र के बंदियों को शिक्षित करने का काम कर रही हैं।

51 साल की रोशन कसमभाई भावर गुजरात की हैं और वह भी प्रौढ़ शिक्षा के काम में जोर-शोर से जुटी हुई हैं।

इस लिस्ट में सबसे उम्रदराज बंदी 83 साल की सकीना बेगम महमूद हैं। लखनऊ जेल में आजीवन कारावास की सजा काटते हुए इन्होंने अपने हुनर से लोगों को क्रोशिया (crochet) द्वारा सिलाई-कढ़ाई का हुनर सिखाया। हर साल लखनऊ महोत्सव में इनके बनाए उत्पाद की काफी डिमांड रहती है। वहीं सबसे कम उम्र की 25 साल की नीलम रामचंद्र गुप्ता हैं, जिनका चंबल के कुख्यात डकैत ने अपहरण कर लिया था। नीलम अपनी जिंदगी के 11 साल लखनऊ जेल में गुजार चुकी हैं। उनका चुनावव जेल में कंप्यूटर साक्षरता और सांस्कृतिक कार्यक्रम चलाने के लिए किया गया है। अर्चना दास और वर्षा दास उत्तर प्रदेश की नोएडा जेल में बंद हैं और इनका चुनाव जेल में बंद बीमार महिलाओं की मदद करने और जेल स्टाफ को स्वास्थ्य सेवा में सहयोग करने के लिए किया गया है।

मालिती मोंडाल और लक्ष्मी चिंतालपुरी पश्चिम बंगाल की अलीपुर जेल में बंद हैं और उन्‍हें जेल में स्वास्थ्य सेवा में बेहतरीन सहयोग उपलब्ध कराने के लिए इस पुरस्कार के लिए चुना गया है।

रेखा और सुषमा बंसल चंडीगढ़ जेल में बंद हैं और इन्हें भी जेल में साक्षरता को बढ़ावा देने के‍ लिए इस पुरस्कार के लिए चुना गया है।

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