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पाँच हजार दंपत्तियों ने वृक्षारोपण की अनोखी मिसाल पेश की

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के चार गांवों के पांच हजार दम्पतियों ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अनूठा काम किया है। इन्होंने गांवों के पास की चार पहाड़ियों पर चार साल पहले पांच हजार पौधे रोपे। तभी से पौधों की देखभाल लगातार संतानों की तरह कर रहे हैं। अच्छी देखभाल से पौधे तेजी से बढ़ रहे हैं और बंजर पहाड़ियां हरी-भरी हो गई हैं। चार में से एक फोपनार पहाड़ी तो अब पिकनिक स्पॉट बन गई है।

जिला मुख्यालय से 18 से 22 किमी दूर देव्हारी, फोपनार, सारोला एवं देड़तलाई के पांच हजार दम्पतियों ने गांव के पास की चार पहाड़ियों को गोद लिया। वर्ष 2011 में अखिल विश्व गायत्री परिवार के वृक्ष गंगा अभियान के तहत अपने परिजनों की स्मृति में उन्होंने ने एक-एक पौधा पुत्र के रूप में गोद लेकर जोड़े से तस्र्पुत्र रोपण महायज्ञ कर इनका रोपण किया।
कुल पांच हजार पौधे रोप कर यज्ञ में पर्यावरण समृद्धि की आहुतियां दी गई। सभी ने आजीवन इन्हें संतान की तरह पालने-पोसने का संकल्प लिया। पौधे रोपने से पूर्व चारों गांवों में विशेष धार्मिक अनुष्ठान कर धूमधाम से वृक्ष गंगा शोभायात्रा भी निकाली गई।पहाड़ियों को श्रीराम स्मृति वन पितृ पर्वत देव्हारी, लक्ष्मीनारायण त्रिवेणी पर्वत फोपनार, गो वृक्ष तीर्थ सारोला, मां शबरी आंगन देड़तलाई नाम दिए गए हैं।
ये पौधे लगाए
देव्हारी में नीम, पीपल, बरगद, आंवला, शीशम, करंज, अंजन के पौधे, फोपनार में बड़, पीपल व नीम, सारोला में 25 से अधिक औषधीय व विविध प्रजातियों के पौधे, देड़तलाई में 25 से अधिक प्रजातियों के फलदार पौधे लगाए गए हैं। लगातार देखभाल के चलते सभी पौधे तेजी से वृक्ष बनने की ओर अग्रसर हैं। चारों पहाड़ियां हरियाली से ढंक गई हैं।
श्रमदान रोज, त्योहारों पर उत्सव
देव्हारी में ग्रामीण रोज सुबह-शाम निर्धारित समय पर पहाड़ियों पर जाकर श्रमदान करते हैं। समिति के अलावा जिन दम्पतियों ने पौधारोपण किया है वे भी पौधों को पानी देकर आसपास सफाई करते हैं। नवदुर्गोत्सव, हनुमान जंयती सहित अन्य पर्वों पर सभी ग्रामीण मिलकर यहां उत्सव मनाते हैं। विविध धार्मिक व सामाजिक आयोजन करते हैं।
गौरवांवित हैं हम
देव्हारी के किसान सुनील शेरसिंह राठौड़ एवं मलखान राठौड़ ने बताया कि पौधों को गोद लेने लेकर हम गौरवांवित हैं। पर्यावरण के प्रति कुछ करने की प्रेरणा मिलने से वृक्षों का पालन-पोषण कर रहे हैं। प्रतिदिन पहाड़ी पर लगाए पौधों के साथ अन्य पौधों की देखभाल कर रहे हैं।
फोपनार के जय कुमार जैन ने बताया कि 1008 दंपत्तियों ने मिलकर त्रिवेणी पर्वत पर 1008 त्रिवेणियां (बड़, पीपल, नीम) लगाई है। कुछ निसंतान दम्पतियों ने भी है पौधे रोपे हैं, वे संतानों की तरह पालन कर रहे हैं।
100 पहाड़ियों का कायाकल्प
गायत्री परिवार के वृक्ष गंगा अभियान के प्रांतीय प्रतिनिध्ाि मनोज तिवारी ने बताया कि चार गांवों के लोग पहाड़ियों पर पांच हजार वृक्ष लगाकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में श्रेष्ठ कार्य कर रहे हैं। अभियान की मॉनिटरिंग के लिए विशेष समिति का गठन कर हम भी लगातार पौधों की देख-रेख में ग्रामीणों को सहयोग कर रहे हैं। बुरहानपुर के देव्हारी से पहाड़ियों को गोद लेने का सिलसिला शुरू हुआ।
अब तक प्रदेश में 75 व देश में 100 स्थानों पर पहाड़ियों को गोद लेकर हराभरा किया जा चुका है। समूह में श्रीराम स्मृति वन बनाकर पर्यावरण की सेवा कर रहे हैं। अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुख डॉ. प्रणव पंड्या के मार्गदर्शन व प्रेरणा से यह अभियान संपूर्ण देश में संचालित है।
प्रशासन सहयोग करेगा
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ग्रामीणों की यह अनूठी सेवा सराहनीय व अनुकरणीय है। प्रशासन द्वारा भी इस कार्य के लिए ग्रामीणों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
-जेपी आयरीन सिंथिया, कलेक्टर
साभार- http://naidunia.jagran.com/

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