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लैंगिक असमानता भारतीय मूल्य नहीं : मालविका जोशी

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर दिल्ली विश्वविद्यालय के पीजीडीएवी कॉलेज (सांध्य) की कल्चरल सोसाइटी और नाट्य समिति ‘नेपथ्य’ के वार्षिकोत्सव का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिष्ठित कलाविद मालविका जोशी उपस्थित रही। कार्यक्रम के उद्घाटन के अवसर पर उन्होंने लैंगिक समानता को भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा मानते हुए कहा कि “भारतीय संस्कृति में स्त्री और पुरुष दोनों ही समान हैं। लैंगिक असमानता भारतीय जीवन मूल्यों का हिस्सा न ही रह है और न ही रहेगा।” उन्होंने अपनी कविताओं से इस संबंध में अपने विचार रखे। इस अवसर पर कॉलेज के प्राचार्य डॉ रवींद्र कुमार गुप्ता ने कहा कि हमारी सोच में स्त्री और पुरुष के अधिकारों का विभाजन है लेकिन प्राकृतिक रूप से ऐसा नहीं है। अधिकारों का बंटवारा समाज की विभिन्न संस्थाओं की व्यवस्था हो सकती है लेकिन अधिकारों के केंद्र में लैंगिक समानता हमेशा बनी रही है। इसलिए कॉलेज ने इस वर्ष इस आयोजन का विषय ‘लैंगिक समानता’ रखा है। उन्होंने कहा कि हमें स्त्री को पुरुष से कहीं अधिक ऊंचा स्थान देना चाहिए तभी हमारी परंपरा वास्तविक रूप ले सकेगी।

इस अवसर पर नाट्य समिति के वार्षिकोत्सव के अवसर पर चर्चित नाट्य और डॉक्यूमेंट्री निर्देशक कुंवर शमेन्द्र ने कहा कि नाटक हमें जीवन को समझने और उसकी समस्यायों से लड़ने में सहायता देती हैं। उन्होंने इस अवसर पर विभिन्न कॉलेजो और विश्वविद्यालयों से आये प्रतियोगियों को नाटक की बारीकियों से परिचित कराया।

नाट्य समिति ‘नेपथ्य’ के संयोजक ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि ‘नाटक एक ऐसी कला है जिसमें जीवन की सभी कलाएं निहित है। यह व्यक्ति समाज को पूर्ण बनाता है।’
महिला अंतरराष्ट्रीय दिवस के अवसर पर आयोजित इस समारोह में सी.एस.आर. फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री दीन दयाल अग्रवाल ने कॉलेज को आधुनिक तकनीक से बनी सेनिटरी नेपकीन वेंडिंग मशीन भेंट की।

कॉलेज की कल्चरल सोसाइटी के संयोजक डॉ अनिल कुमार सिंह ने आमंत्रित अतिथियों और प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। आयोजित प्रतियोगिताओं में 40 से अधिक महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के 300 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।

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