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वरिष्ठ पत्रकार पद्मजा जोशी ने कैसे दी कोरोना को मात, पीड़ितों को दी ये सलाह

कोरोनावायरस (कोविड-19) का प्रकोप कम होने का नाम नहीं ले रहा है। इस महामारी की चपेट में आकर आए दिन तमाम लोगों की जान जा रही है, वहीं कई लोग विभिन्न अस्पतालों में उपचाराधीन है। संकट के इस दौर में अपनी जान को जोखिम में डालते हुए तमाम पत्रकार अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं और कोरोना को लेकर रिपोर्टिंग भी कर रहे हैं। ऐसे में कोरोना पीड़ितों में बड़ी संख्या में मीडियाकर्मी भी शामिल हैं। हालांकि, कई पत्रकार इस महामारी पर विजय पाने में सफल रहे हैं। इन्हीं में वरिष्ठ पत्रकार और अंग्रेजी न्यूज चैनल ‘टाइम्स नाउ’ (Times Now) की कंसल्टिंग एडिटर (पॉलिटिक्स) पद्मजा जोशी भी शामिल हैं। अपने बेबाक अंदाज के लिए पहचानी जानी वालीं पद्मजा जोशी ने समाचार4मीडिया के साथ बातचीत में बताया कि उनके लिए कोरोना से संक्रमण का दौर कैसा रहा और कैसे उन्होंने इस महामारी पर विजय पाई। प्रस्तुत हैं इस बातचीत के प्रमुख अंश:

आपको कैसे पता चला कि आप कोरोनावायरस से संक्रमित हैं?

मुझे पिछले साल कोरोना का संक्रमण हुआ था। हालांकि उस दौरान कोरोना के लक्षण इतने गंभीर नहीं थे। मुझे हल्का बुखार और खांसी थी। उस समय मौसम में भी बदलाव हो रहा था, इसलिए बुखार-खांसी को मैंने ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया। इसके बाद मुझे बदन में बहुत ज्यादा दर्द होने लगा, यह कोरोना का लक्षण था, जिस पर मुझे कुछ शक हुआ। इसके बाद मैंने खुद को आइसोलेट किया और पहला आरटीपीसीआर (कोरोना संक्रमण का पता लगाने के लिए होने वाली जांच) टेस्ट कराया। हालांकि, यह टेस्ट निगेटिव आया तो मुझे लगा कि मैं कोरोना से संक्रमित नहीं हूं। उस समय दिवाली का समय था और ऑफिस में छुट्टी थी, इसके बाद वीकेंड हो गया था। ऐसे में मैं ऑफिस में नहीं थी। इसके बाद मेरे एक परिचित डॉक्टर ने फोन पर सलाह दी कि बेशक मेरा आरटीपीसीआर टेस्ट निगेटिव आया है तो भी इन लक्षणों (काफी खांसी और बदन दर्द) के आधार पर मुझे चेस्ट का सीटी स्कैन करा लेना चाहिए। इसके बाद जांच कराने पर कोरोना की पुष्टि हुई।

पता चलने पर सबसे पहले आपने क्या किया? आप सेल्फ आइसोलेट हुईं या किसी डॉक्टर को दिखाया?
कोरोना का पता चलते ही मैंने सबसे पहले खुद को आइसोलेट कर लिया। इसके बाद मैंने डॉक्टर्स की सलाह पर सभी आवश्यक मेडिसिन लीं और पूरा कोविड प्रोटोकॉल फॉलो किया।

इलाज के दौरान आपने खाने-पीने का किस तरह से ध्यान रखा और अन्य कौन सी सावधानियां बरतीं?
चूंकि मैं 14 दिन तक होम आइसोलेशन में थी। उस दौरान डॉक्टर्स का फोन आता था और उनके बताए अनुसार मैं दवा लेती रही। जहां तक खाने का सवाल है तो मैं खुद खाना पकाती थी। इस दौरान डॉक्टर्स की सलाह पर मैंने ज्यादा प्रोटीनयुक्त भोजन, जूस, आंवला, विटामिन सी और नारियल पानी का भी काफी सेवन किया।

आइसोलेशन के दौरान आपने अपना समय व्यतीत करने के लिए क्या किया?
इस दौरान मैंने टेलिविजन पर न्यूज तो फॉलो की हीं, इसके साथ ही मुझे पढ़ना भी काफी अच्छा लगता है तो मैंने काफी किताबें पढ़ीं। हालांकि, कोविड में कमजोरी बहुत आ जाती है। पहले हफ्ते में मेरे साथ भी ऐसा हुआ। कमजोरी के कारण मुझे सिरदर्द-आंखों में दर्द और चक्कर भी आए। उस समय मैंने सिर्फ आराम किया।

इस दौरान परिजनों और अन्य करीबियों का व्यवहार कैसा रहा?
मेरे लिए यह काफी अच्छी बात रही कि मुझे तमाम लोगों का काफी सपोर्ट मिला। मैंने एक बार ट्वीट किया था कि मैं कोविड पॉजिटिव हूं, इसके बाद तो तमाम लोगों ने सोशल मीडिया पर मेरे जल्द स्वस्थ होने की कामना की पोस्ट करनी शुरू कर दीं, कई लोगों ने मुझे कॉल किया। बाकी, मेरे परिचितों और दोस्तों ने भी मेरा हरसंभव ख्याल रखा।

आपकी नजर में कोरोना के संक्रमण से किस तरह बचा जा सकता है?
मेरा मानना है कि काम तो कभी रुक नहीं सकता। ऐसे में आपको सतर्क रहना होगा। इसके साथ ही कोविड को लेकर सरकारी गाइडलाइंस का पालन करना चाहिए। डबल फेसमास्क, लोगों से उचित दूरी और बार-बार हाथ धोने से भी संक्रमण का खतरा कम हो जाता है।

संक्रमण से निजात मिलने पर अब कोरोना से जूझ रहे पीड़ितों को क्या कहना चाहती हैं?
मेरा मानना है कि खुद को सकारात्मक बनाए रखना इस दौरान सबसे ज्यादा जरूरी है। आइसोलेशन में जब कोई रहता है तो उस व्यक्ति के दिमाग में काफी सारी चीजें होती हैं। उस दौरान वह काफी कमजोर होता है, परिवार व दोस्तों से दूर होता है। आसपास डराने वाली खबरें आ रही होती हैं। ऐसे में खुद को सकारात्मक बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए। इसके लिए आप अपनी पसंद का कोई भी काम कर सकते हैं जैसे-किसी को म्यूजिक पसंद होता है, किसी को पेंटिंग बनानी पसंद होती है, किसी को किताबें पढ़ना और किसी को दोस्तों से फोन पर बातें करना। कहने का मतलब यह है कि अपनी सोच का सकारात्मक बनाए रखने के लिए आप खुद को अपने पसंदीदा काम में व्यस्त रखें। आप कमरे में ही हल्का-फुल्का व्यायाम और योग भी कर सकते हैं यानी आप खुद को किसी न किसी रूप में मोटिवेट रखें।

साभार- https://www.samachar4media.com/ से

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