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राजकोट में खुले वैगनों में औद्योगिक नमक का लदान

मुंबई।

पश्चिम रेलवे की बहु-स्तरीय व्यावसायिक विकास इकाइयाँ (BDU) जोनल मुख्यालयों और डिवीजनों में स्थापित की गई हैं, जो नये विचारों और पहलों को शामिल करके माल बाज़ार में व्यवसाय की सम्भावनाओं में सुधार लाने का एक सराहनीय काम कर रही हैं। पश्चिम रेलवे की इन इकाइयों द्वारा माल ढुलाई करने वालों को आकर्षित करने के लिए विभिन्न प्रोत्साहन योजनाऍं घोषित की गई हैं। साथ ही व्यवसाय करने में आसानी को बेहतर बनाने के लिए भी उल्लेखनीय सुविधाऍं प्रदान की जा रही हैं। BDU के गठन के बाद, विभिन्न महत्वपूर्ण उपलब्धियों को सुनिश्चित किया गया है, जिनमें सबसे पहली माल और पार्सल विशेष रेलगाड़ियों को क्रमशः भावनगर और अहमदाबाद डिवीजन से बांग्लादेश के लिए रवाना किया गया। इसी क्रम में अब पश्चिम रेलवे के राजकोट डिवीजन ने खुले वैगनों में औद्योगिक नमक लोड करके उल्लेखनीय सफलता अर्जित की है।

पश्चिम के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी श्री सुमित ठाकुर द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 4 सितम्बर, 2020 को राजकोट मंडल में ववानिया माल शेड में औद्योगिक नमक की खुले वैगनों में लोडिंग की गई। यह नया ट्रैफिक राजकोट डिवीजन की बिजनेस डेवलपमेंट यूनिट (BDU) की उल्लेखनीय कोशिशों के कारण सम्भव हुआ है। रेलवे बोर्ड द्वारा औद्योगिक उपयोग के लिए नमक के वर्गीकरण में कमी और इसकी श्रेणी में120 से 100 ए में संशोधन करने जैसी नीतिगत पहल ने इसे सम्भव बनाया है। इसलिए, औद्योगिक उपयोग के लिए नमक को खुले वैगनों में लूज़ स्थिति के रूप में लोड करने की अनुमति दी गई है। लूज़ लोडिंग को इस शर्त के साथ अनुमति दी गई है कि वैगनों के फर्श को तिरपाल द्वारा कवर किया जायेगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि नमक के कारण वैगनों का कोई नुकसान / क्षरण न हो। ऐसी क्षति / क्षरण के मामले में, ग्राहक इस तरह के नुकसान का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा। यह रेक पीकेसीआई ग्रासिम इंडस्ट्रीज लिमिटेड हेतु धनबाद डिवीजन के रेणुकूट स्टेशन के लिए बुक किया गया है, जिसके अंतर्गत BOXN वैगन रेक द्वारा औद्योगिक नमक का परिवहन किया जा रहा है, जो 3882 टन के भार के साथ 1588 किलोमीटर की दूरी तय करेगा और इसके फलस्वरूप लगभग 60 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। इस महीने में ऐसे 5 से 6 और रेक लोड होने की उम्मीद है।

श्री ठाकुर ने बताया कि 22 मार्च, 2020 से लागू पूर्ण लॉकडाउन और वर्तमान आंशिक लॉकडाउन के दौरान कठिनतम परिस्थितियों और विकट चुनौतियों के बावजूद, पश्चिम रेलवे ने 3 सितम्बर, 2020 तक मालगाड़ियों के 13,805 रेक लोड करके काफी सराहनीय कार्य किया है, जिसके फलस्वरूप 3638 करोड़ रु. से अधिक का उल्लेखनीय राजस्व हासिल हुआ है। विभिन्न स्टेशनों पर श्रमशक्ति की कमी के बावजूद पश्चिम रेलवे द्वारा अपनी मालवाहक ट्रेनों के ज़रिये देश भर में अत्यावश्यक सामग्री का परिवहन बखूबी सुनिश्चित किया जा रहा है। इस अवधि में कुल 28.81 मिलियन टन भार वाली विभिन्न मालगाड़ियों को उत्तर पूर्वी क्षेत्रों सहित देश के विभिन्न राज्यों में भेजा गया। इनके अलावा मिलेनियम पार्सल वैन और मिल्क टैंक वैगनों के विभिन्न रेक दवाइयों, चिकित्सा किट, जमे हुए भोजन, दूध पाउडर और तरल दूध जैसी विभिन्न आवश्यक वस्तुओं की मांग के अनुसार आपूर्ति करने के लिए उत्तरी और उत्तर पूर्वी क्षेत्रों में भेजे गये। कुल 27,177 मालगाड़ियों को अन्य ज़ोनल रेलों के साथ इंटरचेंज किया गया, जिनमें 13,581 ट्रेनें सौंपी गईं और 13,596 ट्रेनों को पश्चिम रेलवे के विभिन्न इंटरचेंज पॉइंटों पर ले जाया गया।

इसके अलावा 23 मार्च, 2020 से 3 सितम्बर, 2020 तक 1.15 लाख टन से अधिक विभिन्न अत्यावश्यक सामग्री का परिवहन पश्चिम रेलवे द्वारा अपनी 514 पार्सल विशेष गाड़ियों के माध्यम से किया गया है, जिनमें कृषि उत्पाद, दवाइयां, मछली, दूध आदि मुख्य रूप से शामिल हैं। इस परिवहन के माध्यम से मिलने वाला राजस्व 37.68 करोड़ रुपये से अधिक रहा है। इस अवधि के दौरान 83 मिल्क स्पेशल गाड़ियों को पश्चिम रेलवे द्वारा चलाया गया, जिनमें 63 हजार टन से अधिक का भार था और वैगनों के 100 % उपयोग हुआ। इसी प्रकार, 38 हज़ार टन से अधिक भार वाली 399 कोविड -19 विशेष पार्सल ट्रेनें भी विभिन्न आवश्यक वस्तुओं के परिवहन के लिए चलाई गईं। इनके अलावा, 14,000 टन भार वाले 27 इंडेंटेड रेक भी लगभग 100% उपयोग के साथ चलाए गए। पश्चिम रेलवे ने देश के विभिन्न हिस्सों में समयबद्ध पार्सल विशेष रेलगाड़ियों को चलाने का सिलसिला लगातार जारी रखा है, जिसके अंतर्गत 4 सितम्बर, 2020 को चार पार्सल विशेष ट्रेनें पश्चिम रेलवे से रवाना हुईं।

लॉकडाउन के कारण राजस्व नुक़सान और रिफंड अदायगी

कोरोना वायरस के कारण पश्चिम रेलवे पर यात्री राजस्व का कुल नुकसान लगभग 2417 करोड़ रुपये रहा है, जिसमें उपनगरीय खंड के लिए 365 करोड़ रुपये और गैर-उपनगरीय के लिए 2052 करोड़ रुपये का नुक़सान शामिल है। इसके बावजूद, 1 मार्च, 2020 से 3 सितम्बर, 2020 तक टिकटों के निरस्तीकरण के परिणामस्वरूप पश्चिम रेलवे ने 423.15 करोड़ रुपये के रिफंड की अदायगी सुनिश्चित की है। उल्लेखनीय है कि इस धनवापसी राशि में, अकेले मुंबई मंडल ने 204 करोड़ रुपये से अधिक का रिफंड सुनिश्चित किया है। अब तक, 65.44 लाख यात्रियों ने पूरी पश्चिम रेलवे पर अपने टिकट रद्द कर दिए हैं और तदनुसार अपनी रिफंड राशि प्राप्त की है।

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