जिला परिषद विद्यालय, जालिंदर नगर (कनेर्सर), खेड़, पुणे
9 अक्टूबर 2026 को मुझे जिला परिषद विद्यालय, जालिंदर नगर (कनेर्सर), खेड़, पुणे का भ्रमण करने का अवसर प्राप्त हुआ। यह भ्रमण मेरे लिए एक मूल्यवान शैक्षणिक अनुभव रहा। इस दौरान मुझे शिक्षा के विभिन्न तरीकों, कक्षा में अपनाई जाने वाली शिक्षण पद्धतियों, विद्यार्थियों की सहभागिता तथा विद्यालय के समग्र शैक्षणिक वातावरण को करीब से देखने और समझने का अवसर मिला।

इस भ्रमण से मुझे यह समझने में भी सहायता मिली कि किस प्रकार नवीन और रचनात्मक शैक्षणिक विचार बच्चों को स्वतंत्र, आत्मविश्वासी तथा सीखने के प्रति उत्साही बना सकते हैं।
इस विद्यालय में 170 से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं और विद्यालय का संचालन केवल दो समर्पित शिक्षकों द्वारा किया जाता है। शिक्षकों की संख्या सीमित होने के बावजूद विद्यालय ने ऐसा सीखने का वातावरण विकसित किया है, जिसमें विद्यार्थी अपनी शिक्षा में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं और अपनी दैनिक गतिविधियों की जिम्मेदारी स्वयं उठाते हैं।
इस विद्यालय की जिस विशेषता ने मुझे सबसे अधिक प्रभावित किया, वह यह थी कि यहाँ सीखना केवल शिक्षक के निर्देशों या पाठ्यपुस्तकों के पन्नों तक सीमित नहीं है। विद्यार्थियों को स्वयं खोजने, कुछ नया बनाने, अपने ज्ञान को दूसरों के साथ साझा करने तथा एक-दूसरे से सीखने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
“विषय मित्र” की संकल्पना – साथ मिलकर सीखना
इस विद्यालय के भ्रमण का मेरा सबसे पसंदीदा अनुभव “विषय मित्र” की संकल्पना को समझना था। इस पद्धति में विद्यार्थी एक-दूसरे की पढ़ाई में सहायता करते हैं, कठिन विषयों को समझाते हैं, शंकाओं का समाधान करते हैं तथा अपने सहपाठियों को बेहतर ढंग से सीखने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
मुझे यह पद्धति अत्यंत सार्थक लगी, क्योंकि इससे विद्यार्थियों में सहयोग, जिम्मेदारी, धैर्य और आपसी समझ की भावना विकसित होती है। दूसरों को पढ़ाने से विद्यार्थी स्वयं भी विषय को अधिक गहराई से समझ पाते हैं।
इस संकल्पना ने मुझे यह अनुभव कराया कि विद्यार्थी स्वयं भी एक-दूसरे के लिए महत्वपूर्ण शिक्षण साथी बन सकते हैं और जब बच्चे साथ मिलकर सीखते हैं, तो शिक्षा अधिक प्रभावी एवं आनंददायक बन जाती है।
इस विद्यालय की एक और विशेषता जिसने मुझे बहुत प्रभावित किया, वह थी विद्यार्थियों द्वारा अपने खाली समय का सदुपयोग करना। खाली समय में निष्क्रिय बैठने या किसी के निर्देश की प्रतीक्षा करने के बजाय विद्यार्थी पढ़ाई करने, कुछ नया बनाने अथवा इंटरनेट पर नई जानकारियाँ और रचनात्मक विचार खोजने में व्यस्त रहते थे। उनकी जिज्ञासा और उत्साह वास्तव में प्रशंसनीय थे। कक्षा में कोई विशेष कार्य न दिए जाने पर भी वे कुछ नया जानने और सीखने के लिए उत्सुक दिखाई दिए। इस अनुभव से मुझे यह समझने का अवसर मिला कि जब विद्यार्थियों में सीखने के प्रति वास्तविक रुचि विकसित होती है, तो शिक्षा केवल कक्षा के समय तक सीमित नहीं रहती, बल्कि एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया बन जाती है।
इस भ्रमण का सबसे यादगार पहलू विद्यार्थियों का आत्मविश्वास था। उन्होंने हम सभी आगंतुक शिक्षकों का पूरे आत्मविश्वास के साथ स्वागत किया और अपने विद्यालय का परिचय देते हुए हमें विभिन्न गतिविधियों एवं शिक्षण पद्धतियों के बारे में विस्तार से बताया। वे स्पष्टता और उत्साह के साथ अपनी बात रख रहे थे। उनमें पहल करने की क्षमता, जिम्मेदारी की भावना और अपने विद्यालय के प्रति अपनापन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था। जिस आत्मविश्वास के साथ उन्होंने अपने विद्यालय के शैक्षणिक वातावरण और गतिविधियों को समझाया, वह वास्तव में प्रशंसनीय था।
सच कहूँ तो इन बच्चों की प्रशंसा के लिए जितने भी शब्द कहे जाएँ, वे कम ही होंगे। उनका अनुशासन, जिज्ञासा, आत्मनिर्भरता, रचनात्मकता और एक-दूसरे की सहायता करने की भावना अत्यंत सराहनीय थी।
उन्हें शिक्षकों का मार्गदर्शन करते हुए, अपने विचार समझाते हुए, नई संभावनाओं की खोज करते हुए और अपने कार्यों पर गर्व करते हुए देखना मेरे लिए बेहद प्रेरणादायक अनुभव था।
इन विद्यार्थियों ने यह सिद्ध कर दिया कि जब बच्चों पर विश्वास किया जाता है, उन्हें प्रोत्साहित किया जाता है और सही अवसर प्रदान किए जाते हैं, तो वे हमारी अपेक्षाओं से कहीं अधिक अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं।
विद्यालय के विद्यार्थियों को लैपटॉप तथा गूगल जैसे ऑनलाइन माध्यमों का आत्मविश्वास के साथ उपयोग करते हुए देखा गया। वे विभिन्न विषयों पर जानकारी खोजने, नए विचारों को जानने और नवीन गतिविधियों की खोज करने के लिए तकनीक का उपयोग कर रहे थे। तकनीक के प्रति उनका यह दृष्टिकोण स्वतंत्र रूप से शोध करने और पाठ्यपुस्तकों से आगे बढ़कर सीखने की उनकी रुचि को दर्शाता है।
इस अवलोकन से मुझे यह समझ आया कि विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षण के अवसर प्रदान करना कितना महत्वपूर्ण है। इससे वे प्रश्न पूछने, स्वयं उत्तर खोजने और तकनीक का सार्थक उपयोग करने के लिए प्रेरित हो सकते हैं।
विद्यालय के अनेक विद्यार्थी चार या उससे अधिक भाषाओं में संवाद करने में सक्षम थे। उनकी बहुभाषीय क्षमता देखकर मुझे बहुत प्रसन्नता हुई। यह उनकी भाषायी दक्षता, सीखने के प्रति रुचि और विभिन्न भाषाओं में संवाद करने के अवसरों को दर्शाता है। इस अनुभव ने मुझे यह समझने में सहायता की कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए भाषा-शिक्षण, संवाद कौशल और विभिन्न भाषाओं के संपर्क में आने के अवसर कितने महत्वपूर्ण हैं।
भ्रमण के दौरान मुझे विद्यालय की उस शिक्षण पद्धति के बारे में जानकारी मिली, जिसके अंतर्गत निर्धारित शैक्षणिक पाठ्यक्रम को लगभग तीन महीनों में पूरा करने का प्रयास किया जाता है। इसके बाद शेष समय का उपयोग स्वाध्याय, व्यावहारिक शिक्षा, कौशल विकास और रचनात्मक गतिविधियों के लिए किया जाता है।

इस पद्धति ने मुझे इस बात पर विचार करने के लिए प्रेरित किया कि विद्यार्थियों को अपनी रुचियों को पहचानने, व्यावहारिक क्षमताओं को विकसित करने और अपने ज्ञान को वास्तविक जीवन की परिस्थितियों में लागू करने के अवसर देना कितना आवश्यक है।
विद्यालय में विद्यार्थी अपने माता-पिता के सहयोग से हस्तनिर्मित आभूषण बनाने जैसी रचनात्मक गतिविधियों में भी भाग लेते हैं।
ऐसी गतिविधियाँ बच्चों में रचनात्मकता, धैर्य, व्यावहारिक कौशल और उद्यमशीलता की भावना विकसित करने में सहायक होती हैं।
यह देखकर अच्छा लगा कि यहाँ शिक्षा केवल अकादमिक विषयों तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को अपनी व्यक्तिगत प्रतिभा पहचानने और उसे विकसित करने के अवसर भी प्रदान किए जाते हैं।

मैं विद्यालय के समर्पित शिक्षक वारे सर के प्रति अपनी हार्दिक प्रशंसा व्यक्त करना चाहती हूँ। उनके नवीन शैक्षणिक विचारों और शिक्षण पद्धतियों ने मुझे अत्यंत प्रभावित किया। भ्रमण के दौरान देखी गई गतिविधियों से यह स्पष्ट हुआ कि वे विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर शिक्षार्थी और आत्मविश्वासी व्यक्तित्व बनाने की दिशा में सार्थक प्रयास कर रहे हैं। विशेष रूप से “विषय मित्र” की संकल्पना, स्वाध्याय को प्रोत्साहन देना तथा विद्यार्थियों के खाली समय का रचनात्मक उपयोग करना मेरे लिए अत्यंत प्रेरणादायक रहा।
इन पद्धतियों के माध्यम से बच्चों को अपनी पढ़ाई की जिम्मेदारी लेने, अपने सहपाठियों की सहायता करने और नए विचारों की खोज करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
इस अनुभव को और भी विशेष बनाने वाली बात यह थी कि इन शैक्षणिक संकल्पनाओं का प्रभाव विद्यार्थियों के व्यवहार में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था। शिक्षकों का मार्गदर्शन करते समय उनका आत्मविश्वास, नई चीजें सीखने का उत्साह और एक-दूसरे की सहायता करने की तत्परता वास्तव में सराहनीय थी।
मैं वारे सर की दूरदर्शी सोच और उन प्रयासों की हृदय से सराहना करती हूँ, जिनके माध्यम से उन्होंने ऐसा शैक्षणिक वातावरण विकसित किया है, जहाँ विद्यार्थियों को केवल पढ़ने तक सीमित न रखकर स्वतंत्र रूप से सोचने, अपने विचार व्यक्त करने, रचनात्मक कार्य करने और निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जाता है।
कक्षा छठी-अ की शिक्षिका के रूप में इस भ्रमण ने मुझे अपनी शिक्षण पद्धतियों और विद्यार्थियों को दिए जाने वाले सीखने के अवसरों पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित किया।
मुझे यह महसूस हुआ कि एक शिक्षक की भूमिका केवल पाठ समझाने तक सीमित नहीं होती। हमारा वास्तविक दायित्व ऐसा वातावरण तैयार करना भी है, जहाँ विद्यार्थी आत्मविश्वास के साथ प्रश्न पूछ सकें, अपने विचार साझा कर सकें, सहपाठियों की सहायता कर सकें और स्वतंत्र रूप से नई चीजें सीख सकें।
“विषय मित्र” की संकल्पना ने मुझे विशेष रूप से प्रेरित किया कि मैं अपनी कक्षा में सहपाठी-अधिगम अर्थात एक-दूसरे से सीखने की गतिविधियों को अधिक महत्व दूँ।
इसके साथ ही, मैं विद्यार्थियों को उनके खाली समय का सदुपयोग पढ़ने, पुनरावृत्ति करने, रचनात्मक परियोजनाएँ बनाने और आयु के अनुरूप शोध गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना चाहूँगी।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस भ्रमण ने मुझे पुनः याद दिलाया कि प्रत्येक बच्चे में सीखने, नेतृत्व करने, कुछ नया बनाने और दूसरों को प्रेरित करने की क्षमता होती है। आवश्यकता केवल सही मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और अवसर प्रदान करने की है।
जिला परिषद विद्यालय, जालिंदर नगर (कनेर्सर), खेड़, पुणे का मेरा भ्रमण अत्यंत समृद्ध, प्रेरणादायक और यादगार अनुभव रहा।
इस भ्रमण से मुझे अनेक मूल्यवान शैक्षणिक जानकारियाँ प्राप्त हुईं और यह समझने का एक नया दृष्टिकोण मिला कि जब विद्यार्थियों को अपनी शिक्षा में सक्रिय भूमिका निभाने के अवसर दिए जाते हैं, तो सीखने की प्रक्रिया अधिक सार्थक और प्रभावी बन सकती है।
“विषय मित्र” की संकल्पना और विद्यार्थियों का असाधारण आत्मविश्वास इस भ्रमण के सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण रहे। सीखने के प्रति उनका उत्साह, नए विचारों को जानने की उत्सुकता तथा दूसरों का मार्गदर्शन करने और उनकी सहायता करने की तत्परता ने मेरे मन पर गहरी छाप छोड़ी।
मैं वारे सर के प्रति हार्दिक आभार एवं प्रशंसा व्यक्त करती हूँ, जिन्होंने ऐसी विचारपूर्ण और प्रेरणादायक शैक्षणिक पद्धतियों को अपनाया है।
इस भ्रमण ने मेरे इस विश्वास को और मजबूत किया कि शिक्षा केवल पाठ्यक्रम पूरा करने का माध्यम नहीं है, बल्कि जिज्ञासु मस्तिष्कों को विकसित करने, आत्मविश्वास बढ़ाने, रचनात्मकता को प्रोत्साहित करने और बच्चों को आत्मनिर्भर शिक्षार्थी बनाने की प्रक्रिया है।

मैं इस भ्रमण से प्राप्त सीख को अपनी कक्षा में लागू करने के लिए उत्सुक हूँ, ताकि मैं भी ऐसा वातावरण विकसित कर सकूँ जहाँ विद्यार्थी उत्साहपूर्वक सीखें, अपने ज्ञान को साझा करें, नई चीजों की खोज करें और एक-दूसरे के साथ आगे बढ़ें।
मैं बृजेश सिंह सर और रुचि माने मैम के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करती हूँ, जिन्होंने हमें जिला परिषद विद्यालय, जालिंदर नगर (कनेर्सर) का भ्रमण करने तथा नवीन शिक्षण एवं अधिगम पद्धतियों को समझने का अवसर प्रदान किया।
उनके सहयोग से ही यह समृद्ध और ज्ञानवर्धक अनुभव संभव हो पाया। इस भ्रमण ने मुझे सीखने, आत्मचिंतन करने और नए विचारों को जानने का अवसर दिया, जिन्हें मैं भविष्य में अपनी कक्षा में लागू करने का प्रयास करूँगी।
सुश्री रश्मि जितेंद्र येरागी
शिक्षिका – कक्षा छठी-अ (VI-A)
महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक शिक्षा मंडल (SSC)
मालवणी टाउनशिप इंग्लिश स्कूल
प्रयास फाउंडेशन द्वारा संचालित




