कैप्टनगंज’ का नामकरण -

कैप्टनगंज' कस्बे का नाम कैप्टन मैलकाम मैकलाॅज के नाम पर पड़ा है। ब्रिटिश काल के दौरान उनके यहां सैन्य शिविर (कैंप) लगाने और क्षेत्र में उनके बढ़ते प्रभाव के कारण इस जगह को 'कैप्टन गंज' कहा जाने लगा। प्रतीत होता है कि 1801 ई. से ही कैेप्टनगंज बस्ती जिले का महत्वपूर्ण स्थान बना लिया था और यह अंग्रेजों का एक सुरक्षित तथा सुविधापूर्ण स्थल बन गया था। कैप्टन स्तर के एक सैन्य अधिकारी द्वारा स्थापित सैनिक कार्यालय तथा बाजार 1861-62 तक स्थापित हो चुका था । 1857 की क्रांति को जब अंग्रजों से भलीभांति संभाला तब आगे की सुव्यवस्था के लिए बस्ती शहर में बस्ती तहसील मुख्यालय को 6 मई 1865 में बस्ती शहर में ही जिला मुख्यालय घोषित कर दिया गया। उसी समय बस्ती जिले में बस्ती , कैप्टनगंज ,खलीलाबाद, डुमरिया गंज तथा बांसी नाम से 5 तहसीलें भी घोषित की गई।नौगढ़ तहसील को वर्ष 1955 में बांसी तहसील के नेपाल से सटे हुए भूभाग को अलग करके एक स्वतंत्र तहसील के रूप में बनाया गया था। वर्तमान में यह सिद्धार्थनगर जिले की सदर तहसील है। इस समय इसमें वर्डपुर, लौटन, जोगिया,उसका वाजार तथा नौगढ़ विकास खण्ड को समलित किया गया है।

हर्रैया को तहसील बनाकर कप्तानगंज का  हक छीना गया -

1865 में कप्तान गंज में तहसील तथा मुंसफी न्यायालय स्थापित हो चुके थे। बाद में अमोढ़ा की सक्रियता के कारण यह क्षेत्र अंग्रेजों से संभल नहीं पा रहा था। फलतः 1876 में कैप्टनगंज को तहसील व मुंसफी समाप्त करके हर्रैया में तहसील व मुंसफी बनाई गई । इस प्रकार लगभग 15 सालों तक कैप्टनगंज ब्रिटिश प्रशासन का एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक इकाई के रूप में बना रहा। इसके बाद इसे विकास खण्ड के रूप में अपनी विकास यात्रा जारी रखना पड़ा। वर्तमान में यह तहसील और मुंसफी न्यायालय का अपना स्तर खो चुका है। इसे विधान सभा, ब्लाक तथा नगर पंचायत स्तर तक गुजरना पड़ा रहा है। कभी कप्तान गंज तहसील हुआ करती थी। कभी यहां मुंसफ कोर्ट हुआ करता था। 5 -5 बार जनता ने एक असरदार नेता को अवसर दिया पर नेता जी तो ब्लाक को ही विकास मानते रहे। किसी तरह से कुछ राष्ट्रवादी उत्साही जनसेवक ने नगर पंचायत दिलवा दिया, परन्तु जनता ने उनके काम का मूल्यांकन कुछ अलग नजरिए से उन्हें नकार कर एक वर्ग विशेष की झोली में कप्तानगंज के विकास को गुलदस्ते सा सजा दिया जो अपने विकास की गति को समुचित अंजाम नहीं दे पा रही है। 

कप्तान गंज विकास खण्ड का गठन -

109 ग्राम सभाओं/पंचायतों तथा 11 न्याय पंचायतों को समलित करते हुए 2 अक्टूबर 1956 को पुराना कैप्टनगंज अब नया कप्तानगंज विकास खण्ड का मुख्यालय घोषित किया गया। इस भूभाग में दुबौलिया विकास खण्ड के भूभाग भी समलित थे। दुबौलिया ब्लॉक बहुत बाद में 22 मार्च 2002 को अस्तित्व में आया है,

जब बस्ती जिले से काटकर संत कबीर नगर नया जिला बनाया गया था। तब प्रशासनिक पुनर्गठन के तहत दुबौलिया नया विकास खंड (ब्लॉक) बनाया गया था। इसे मुख्य रूप से विक्रमजोत ब्लॉक से अलग करके तथा अन्य आसपास के गाँवों (जैसे खुशालगंज, जोगहाटा, चकोही, बजरिया सुबी और सिमरा आदि) को मिलाकर बनाया गया था। कुछ भाग कप्तानगंज और कुछ भाग हर्रैया का भी इस ब्लॉक में समलित किया गया है। नगर पंचायत घोषित होने के पूर्व कप्तानगंज ब्लॉक में कुल 62 ग्राम पंचायतें (और लगभग 202 राजस्व गांव) हैं। हालांकि, प्रशासनिक बदलावों और कुछ गांवों को नगर पंचायत कप्तानगंज में शामिल किए जाने के कारण स्थानीय स्तर पर संचालित सक्रिय ग्राम पंचायतों की संख्या में आंशिक बदलाव हो सकता है। कप्तानगंज नगर पंचायत में बने 15 वार्ड, 33 राजस्व गांव हुए शामिल हैं। नगर पंचायत में 10 ग्राम पंचायतों के 33 गांव को शामिल किया गया है।

1965 में हुआ था प्रथम चुनाव -

स्वतंत्र भारत में पंचायती राज व्यवस्था लागू होने के बाद कप्तानगंज विकासखंड 1956 में ही अस्तित्व में आ गया लेकिन ब्लाक प्रमुख का चुनाव पहली बार 1965 में हुआ ।

1.पहले ब्लॉक प्रमुख पंडित सूर्य दत्त त्रिपाठी को मिला तीन कार्यकाल -

ब्लाक प्रमुख कप्तान गंज का चुनाव पहली बार जब 1965 में हुआ तो उस समय क्षेत्र के जनप्रिय नेता पंडित सूर्य दत्त त्रिपाठी (जन्म : 1 जुलाई 1930 ) पहले प्रमुख निर्वाचित हुए जो 10 जनवरी 1976 तक उनके हत्या पर्यन्त तीन कार्यकाल तक इस पद पर बने रहे। इनका जन्म कप्तान गंज से सटे नकटीदेई में सामान्य ब्राह्मण परिवार में हुआ था। श्री त्रिपाठी जी कांग्रेस के प्रारंभिक दिनों के एक कर्मठ कार्यकर्ता थे। पंडित जवाहरलाल नेहरू और महात्मा गांधी के वे सच्चे अनुयाई थे। बाद में श्रीमती इंदिरा गांधी जी के 1966 में कार्यभार ग्रहण करने पर वे उनके और निकट आए और अपने प्रिय नेता की स्मृति को अक्षुण्य रखते हुए उन्होंने इंदिरा गांधी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की स्थापना किया। शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान अतुलनीय है। उन्होंने ग्रामीण एवं पिछड़े क्षेत्र के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर प्रदान किया। उनका मानना था कि शिक्षा ही समाज को सशक्त, आत्म निर्भर और संस्कारवान बनाती है। इसी सोच के कारण आज भी यह संस्था उनके सपनों को साकार कर रही है। 

स्वर्गीय श्री सूर्यदत्त त्रिपाठी जी जनसेवा, शिक्षा और सामाजिक चेतना के क्षेत्र में एक प्रेरणादायी व्यक्तित्व थे। वे बड़े आकर्षक और हंसमुख स्वभाव के कांग्रेसी व्यक्ति थे। उन्होंने अपने जीवन को समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की किरण पहुँचाने के लिए समर्पित कर दिया। पूर्व ब्लॉक प्रमुख के रूप में उनके कार्यकाल को निष्पक्षता, ईमानदारी और जन कल्याणकारी निर्णयों के लिए सदैव स्मरण किया जाता है। वे समस्याओं को धरातल पर समझकर समाधान करने वाले सच्चे जननेता थे। 10 जनवरी 1976 को पण्डित सूर्य दत्त त्रिपाठी की हत्या कर हत्यारों ने एक उदीयमान युग का अवसान कर दिया।

2.उप ब्लाक प्रमुख श्री राम लखन शर्मा स्थानापन्न प्रमुख रहे -

10 जनवरी 1976 को पण्डित सूर्य दत्त त्रिपाठी की हत्या के बाद उप ब्लाक प्रमुख पद पर आसीन रहे श्री राम लखन शर्मा को ब्लॉक प्रमुख पद का चार्ज मिला जो 1980 तक इस जिम्मेदारी का सम्यक रूप निर्वहन करते रहे। उस समय चुनाव दलीय आधार पर नहीं होते थे।

3.उपजिलाधिकारी हरैया प्रशासक रूप में रहे -

1980 से 1983 तक चुनाव न होने के कारण इस पद की जिम्मेदारी तत्कालीन हरैया के उपजिलाधिकारी निभाते रहे। वे खण्ड विकास अधिकारी के माध्यम से अपने अधिकार का प्रयोग करते रहे।

4. श्री बाबूराम दूबे के थे दो कार्यकाल-

श्री बाबूराम दूबे का जन्म 31 दिसंबर 1952  को बस्ती के कप्तानगंज क्षेत्र के ग्राम दुबौली दूबे में हुआ था। उनके पितामह का नाम श्रीराम भरथ, पिता का नाम श्री हरि प्रसाद था। जो बहुत ही सरल व नेक स्वभाव के व्यक्ति थे। वे राजनीति में बहुत ही रुचि रखते थे। इसका प्रभाव बाबूराम जी के जीवन पर पड़ा था। यद्यपि बाबूराम जी के ज्येष्ठ पिता स्व.राम प्रसाद जी क्षेत्र के प्रतिष्ठित व दबंग किस्म के संभ्रांत व्यक्ति थे, पर श्री बाबूराम जी का परिवार इससे विल्कुल उल्टा था तथा सादगी भरा था। उनके बड़े भाई भारतीय सेना में अपनी सेवा दिए थे।

बाबूरामजी की  प्रारम्भिक शिक्षा प्राइमरी पाठशाला करचोलिया में हुआ था। माध्यमिक शिक्षा किसान उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मरहा कटया में हुई थी। वह बीटीसी का प्रशिक्षण प्राप्तकर प्राइमरी पाठशाला मरहा में शिक्षक रहे। प्रारम्भ में वह कप्तानगंज के तत्कालीन विधायक श्री राम लखन सिंह जी के माध्यम से राजनीति में रुचि रखने लगे थे। बाद में वह जिले स्तर की राजनीति में भी अपना स्थान बना लिए थे। ब्लाक प्रमुख ना रहने के स्थिति में वह जिला परिषद के सदस्य के रुप में आम जनता से जुड़े रहते थे। वे श्री राम लखन सिंह जी के बाद तत्कालीन कांग्रेस विधायक कप्तानगंज श्री अम्बिका सिंह के प्रतिनिधि के रुप में विकास कामों व सामाजिक साराकारों से जुड़े रहते थे। दीर्घ समय तक कांग्रेस से जुड़े रहने के बाद वह कप्तानगंज विधान सभा से विधायकी का चुनाव भी लड़ा  था, पर सफल नहीं हो सके थे। वह बसपा तथा भाजपा में भी अपनी किस्मत अजमाये थे। उनका सबसे अच्छा समय दो कार्यकाल 1983-1995 का व्लाक प्रमुखी का था। वह काफी लोकप्रिय रहे।  कप्तानगंज व्लाक तथा विधान सभा क्षेत्र में एसा लोकप्रिय नेता शायद ही मिल सके। उन्होने अपने क्षेत्र में सड़को का जाल बिछवा रखा था। छोटे से बड़े सभी जनता को वह बहुत आसानी से सुलभ हो जाया करते थे। उन्होने कभी भी किसी के काम को मना नहीं किया था। 

दूबे जी उन्होंने बेसिक शिक्षा विभाग में एक अध्यापक के रूप में सार्वजनिक जीवन में प्रवेश किया था। वे उस समय ब्लॉक प्रमुखों का चयन ग्राम प्रधानों द्वारा किया जाता था। कप्तान गंज विधान सभा और बिकास क्षेत्र में वे बहु चर्चित हो चुके थे। मंगलवार 26 नवंबर 2019 को उनका निधन लखनऊ के एक चिकित्सालय में तब हुआ था जब वह अपने स्वास्थ्य के रूटीन चेकअप के लिए लखनऊ गए थे।

5.रामशंकर यादव -

त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था लागू होने के बाद 1995 में भाजपा शासनकाल में पहली बार क्षेत्र पंचायत सदस्यों द्वारा कराए गए चुनाव में रामशंकर यादव विजयी रहे, जो सन 2001 तक बने रहे। कप्तान गंज और नगर बाजार के बीच गोपियापार के वे मूल निवासी थे। वह जगलाल बालिका महाविद्यालय के प्रबंधक और जिला सहकारी बैंक बस्ती के संचालक/पूर्व चेयरमैन भी रहे हैं। 

6.राजमणि चौधरी बसपा का दो कार्यकाल-

बस्ती जिले के कप्तानगंज ब्लॉक के पूर्व ब्लॉक प्रमुख राजमणि चौधरी समाजवादी पार्टी (सपा) से जुड़े राजनीतिक नेता हैं। वे कप्तानगंज में समाजवादी पार्टी के विभिन्न कार्यक्रमों और सांगठनिक गतिविधियों में सक्रियता से भाग लेते रहे हैं। 2001 से 2005 तथा बसपा शासन काल में इस जिम्मेदारी के निर्वहन का मौका राजमणि चौधरी को मिला। वे कौड़ी कोल के मूल निवासी थे। उनके पिता जयराम चौधरी अपने समय के नामी व्यक्ति थे। बस्ती जिले के कप्तानगंज विकास खंड (ब्लॉक) में वर्ष 2010 से 2015 तक बसपा शासनकाल के दौरान राजमणि चौधरी दुबारा ब्लॉक प्रमुख हुए थे।

7. श्रीमती शोभा चौधरी-

इसी दौर में 2005 से 2010 तक इस पद पर शोभा चौधरी शोभायमान रही। वह मूल रूप से कप्तानगंज क्षेत्र के दुबौला  गांव की निवासी थीं। वह बस्ती के कद्दावर नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री/सांसद राम प्रसाद चौधरी के परिवार (उनकी भाई की पत्नी ) से जुड़ी रही हैं। शोभा चौधरी का संबंध बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से रहा है। 

8.श्रीमती माधुरी आर्य-

कप्तानगंज की पूर्व ब्लॉक प्रमुख माधुरी आर्य पति श्री संतोष कुमार बस्ती जिले के सोनहा थाना क्षेत्र के कलंदर नगर गांव की निवासी हैं। माधुरी आर्य उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री रामकरन आर्य की पुत्री हैं। उनका पैतृक और मुख्य निवास स्थान कलंदर नगर रहा है। 2015 में हुए चुनाव में पूर्व मंत्री रामकरन आर्य की बेटी माधुरी आर्य ने कप्तान गंज के ब्लॉक प्रमुख पद पर कब्जा कर लिया था। जो वर्ष 2018 के शुरुआती महीनों में वह इस पद पर थीं। 2017 में भाजपा सरकार आने के बाद से ही माधुरी आर्य के खिलाफ आवाज उठने लगी थी। 25 फरवरी 2018 को दूसरी बार हुए अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान में 33 क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान कर माधुरी आर्य को इस पद से अपदस्थ कर दिया था। 

9.श्रीमती धनमन देवी -

कप्तानगंज क्षेत्र के करचोलिया गांव की निवासी और करचोलिया वार्ड की क्षेत्र पंचायत सदस्य रही हैं। वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से जुड़ी थीं और कप्तानगंज ब्लॉक की 9वीं ब्लॉक प्रमुख बनी थीं।फरवरी 2018 में अविश्वास प्रस्ताव के बाद मतदान प्रक्रिया के जरिए धनमन देवी ब्लॉक प्रमुख पद पर काबिज हुईं थीं। वह जुलाई 2021 में नए पंचायत चुनावों की घोषणा होने तक इस पद पर रहीं। ब्लॉक प्रमुख के रूप में उन्होंने क्षेत्र की महिला बीडीसी (BDC) सदस्यों और ग्राम प्रधानों को एकजुट कर विकास कार्यों को आगे बढ़ाया। ब्लॉक प्रमुख रहते हुए उन्होंने महिला सुरक्षा और उनके अधिकारों के लिए ब्लॉक स्तर पर कई प्रयास किए, जिसमें कप्तानगंज थाने में पिंक टॉयलेट (Pink Toilet) के निर्माण जैसे जनहित कार्य शामिल रहे। क्षेत्र पंचायत निधि से लगभग सात लाख रुपये में बनने वाले इस शौचालय में गुणवत्ता का पूरा ख्याल रखा गया है। कप्तानगंज क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में बुनियादी ढांचा सुधारने, सड़कों और खड़ंजों के निर्माण और सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने में उनकी सक्रिय भूमिका रही।उनके कार्यकाल के दौरान उनके प्रतिनिधि के रूप में उनके पति श्री पिंटू सोनकर ने भी क्षेत्र के कार्यों में सहयोग करते रहे हैं।

10.श्रीमती मिथिलेश निषाद -

जुलाई 2021 के पंचायत चुनाव में मिथिलेश निषाद (तेलियाडीह गांव निवासी) निर्विरोध ब्लॉक प्रमुख निर्वाचित हुईं और वर्तमान तक इस पद पर कार्य कर रही हैं। कप्तानगंज विकासखंड की ब्लॉक प्रमुख श्रीमती मिथिलेश निषाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से हैं। वर्ष 2021 में हुए उत्तर प्रदेश त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में भाजपा ने उन्हें कप्तानगंज से अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया था, जिसके बाद वह इस पद पर निर्विरोध निर्वाचित हुईं। कप्तानगंज से भाजपा उम्मीदवार मिथिलेश निषाद तेलियाडीह ग्राम सभा की प्रधान रह चुकी हैं। 

इनके पति भोला कुमार निषाद बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक है।परिवार में पिछले 30 वर्षों से ग्राम प्रधानी चली आ रही है । 2015 से 20 तक यह स्वयं प्रधान के दायित्व का निर्वहन कर चुकी हैं। जबकि पहली बार क्षेत्र पंचायत सदस्य का चुनाव जीतकर प्रमुख बनने में सफल हुई। 

उनका कार्यकाल उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के निर्धारित नियमों के अनुसार सामान्यतः साल 2021 से 2026 तक का है ।वह इस पद पर वर्तमान में कार्यरत हैं। हाल ही में मई 2026 में उनकी अध्यक्षता में क्षेत्र पंचायत की बैठक भी संपन्न हुई थी। ब्लाक प्रमुख मिथिलेश निषाद ने बताया कि क्षेत्र पंचायत से मिलने वाले धन से पूरे क्षेत्र पंचायत में विकास के कार्य बीडीसी सदस्यों के प्रस्ताव पर कराए जा रहे हैं, जिसमें क्षेत्र पंचायत सदस्य तथा अन्य जनप्रतिनिधियों से विकास के लिए नए प्रस्ताव लिए जा रहे हैं। इससे क्षेत्र पंचायत से होने वाले कार्यों को धरातल पर उतारा जा सके। क्षेत्र पंचायत की बैठक में कप्तानगंज के विधायक अतुल चौधरी ने कहा कि विकास के लिए सभी जनप्रतिनिधियों को मिलजुल कर जनहित के मुद्दों पर काम करना होगा।

लेखक -

आचार्य डॉ. राधेश्याम द्विवेदी ,

पूर्व पुस्तकालय सूचनाधिकारी,

मकान नम्बर 2785, वार्ड नंबर 8

निकट : लिटिल फ्लावर स्कूल,

आनन्दनगर,कटरा,बस्ती,

Pin- 272001,उत्तर प्रदेश INDIA 

मोबाइल नंबर +91 9412300183