Wednesday, May 22, 2024
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नौकरी छोड़, खेत की मिट्टी में लिखी सफलता की कहानी

रायपुर. 27 साल की वल्लरी चंद्राकर रायपुर से करीब 88 किमी दूर बागबाहरा के सिर्री गांव की रहने वाली हैं। वल्लरी कम्प्यूटर साइंस से एमटेक हैं। वे नौकरी छोड़कर अब खेती करवा रही हैं। 27 एकड़ के फार्म हाउस में सब्जियां उगाना, ट्रैक्टर चलाकर खेत जोतना और मंडी तक सब्जियां पहुंचाने का काम उनकी ही देख-रेख में होता है। वो खुद भी इन सब काम में लगी रहती हैं। दुबई और इजरायल तक एक्सपोर्ट करने की तैयारी…

– वेल्लरी ने खेती की शुरुआत 2016 में 15 एकड़ जमीन से की थी। खेती में टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से उन्होंने मार्केट में जगह बनाई। अब वल्लरी के फार्म हाउस में होने वाली सब्जियां दिल्ली, भोपाल, इंदौर, ओडिशा, नागपुर बेंगलुरू तक जाती हैं। जल्द ही लौकी-टमाटर की नई फसल आने वाली है, जिसे दुबई और इजरायल तक एक्सपोर्ट करने की तैयारी है।

– उनके खेत में अब तक करेला, खीरा, बरबटी, हरी मिर्च की खेती होती थी। इस बार उन्हें टमाटर और लौकी का ऑर्डर मिला है। दोनों सब्जियों की नई फसल 60-75 दिन में आ जाएगी।

शुरुआत में लोग कहते थे पढ़ी-लिखी बेवकूफ
– वल्लरी के मुताबिक, “वे नौकरी छोड़ खेती कर रही थी, तो लोगों ने पढ़ी-लिखी बेवकूफ कहा। घर में तीन पीढ़ी से किसी ने खेती नहीं की थी। किसान, बाजार और मंडीवालों के साथ डील करना मेरे लिए बहुत मुश्किल होता था। पापा ने ये जमीन फार्म हाउस बनाने के इरादे से खरीदी थी। मुझे यहां खेती में फायदा नजर आया तो नौकरी छोड़कर आ गई। शुरुआत में बहुत मुश्किल हुई। लोग लड़की समझकर मेरी बात को सीरियसली नहीं लेते थे। खेत में काम करने वाले लोगों के साथ बेहतर कम्युनिकेशन हो सके, इसलिए छत्तीसगढ़ी सीखी। साथ ही खेती की नई टेक्नोलॉजी इंटरनेट से सीखी। देखा कि इजरायल, दुबई और थाईलैंड जैसे देशों में किस तरह से खेती की जाती है। पैदा हुई सब्जियों की अच्छी क्वालिटी देखकर धीरे-धीरे खरीदार भी मिलने लगे।”

खेतों ही बन जाता है लड़कियों का क्लासरूम
शाम पांच बजे खेत में काम बंद हो जाता है। इसके बाद यहां वल्लरी की क्लास लगती है। वे गांव की 40 लड़कियों को वल्लरी रोज दो घंटे अंग्रेजी और कम्प्यूटर पढ़ाती हैं। ताकि गांव की लड़कियां सेल्फ डिपेंडेंट बन सकें। खेत में काम करने वाले किसानों के लिए वर्कशॉप का भी आॅर्गनाइज करती हैं, जिसमें उन्हें खेती के नए तरीकों के बारे में बताया जाता है, किसानों के फीडबैक भी लिए जाते हैं।

साभार- https://www.bhaskar.com/

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