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मिलिए डी. प्रकाश राव से, जो चाय बेचकर झोपड़ी के 70 बच्चों को पढ़ाते है

ओडिशा: चाय की दुकान पर अक्सर हम देश और दुनिया के बारे में सुनते हैं औरअंतिम चुस्कियों के साथ निष्कर्ष निकलता है कि देश कई गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। हर कोई समाज और देश बदलने की बात करता है, लेकिन एक हकीक़त ये भी है कि लोग समस्याओं की तह तक नहीं जाना चाहते। वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो बगैर ढिंढ़ोरा पीटे लोगों की मदद करते हैं। हम आपके लिए कुछ इसी तरह की एक ख़ास स्टोरी ले कर आए हैं।

ओडिशा के 58 साल के डी. प्रकाश राव, रोज़ सवेरे 4 बजे उठते हैं. नित्य कार्य करने के बाद, घर से चाय पी कर, वो अपनी चाय की दुकान में जाते हैं। कटक के बक्सीबाज़ार में उनकी एक छोटी सी दुकान है। ये दुकान इनके लिए ही नहीं, बल्कि आस-पास झुग्गी झोपड़ी में रह रहे लोगों के लिए दुनिया है, उनके सपने हैं। आप भी सोच रहे होंगे कि आख़िर इस दुकान में ऐसा क्या ख़ास है?

unnamed (64)डी. प्रकाश राव अपनी आमदनी का 50 प्रतिशत झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले बच्चों की पढ़ाई के ऊपर ख़र्च करते हैं। उनका कहना हैं कि झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले बच्चे आर्थिक तंगी के कारण पढ़ नहीं पाते हैं। जबकि, पढ़ाई बहुत ही जरूरी है. ऐसे में हमने झुग्गी में स्कूल की व्यवस्था की है।’ बच्चों के शिक्षक को प्रकाश अपनी जेब से पैसे देते हैं। गरीब बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए प्रकाश दूध भी देते हैं. उनका मानना है कि बच्चे दूध पीकर ही सेहतमंद हो सकेंगे, और उनका ध्यान पढ़ाई में लगा रहेगा।

डी. प्रकाश राव जैसे लोगों पर गर्व महसूस करना चाहिए। इनकी इस कोशिश से कई बच्चे शिक्षित हो सकते हैं। कई विद्वानों का मानना भी है कि शिक्षा के द्वारा ही आप किसी भी देश की दिशा और दशा सुधार सकते हैं।

साभार- http://www.newztrack.com/ से

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