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जी- 20 की वर्तमान में उपादेयता

जी- 20 अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग का प्रमुख एवं प्रासंगिक मंच है;G- 20ऐसे विकसित एवं विकासशील देशों का संगठन है,जिनका आर्थिक सामर्थ्य,सम्पूर्ण विश्व का 85%जीडीपी (GDP) का प्रतिनिधित्व करता है। ये 20देश विश्व के 75% व्यापार का प्रतिनिधित्व करते है।G- 20के देश सतत एवं समेकित आर्थिक वृद्धि बनाए रखने के लिए सहयोात्मक स्तर पर काम कर रहे है।G- 20 वर्तमान में जारी जलवायु ,ऊर्जा और खाद्य संकट से निपटने ,वैश्विक स्वास्थ्य ढाचे को मजबूत करने और तकनीकी परिवर्तन को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक स्तर पर काम कर रहे है।यह मंच विकासशील देशों को अपनी आवाज़ को उठाने का अवसर देगा;क्योंकि NAM के आशानुरूप काम ना करने पर वैश्विक स्तर पर विकासशील देशों को ऐसा प्रासंगिक और मूल्यवान संगठन की वर्तमान समय में अति आवश्यकता है।G- 20की भारत की अध्यक्षता समावेशी, महत्वकांक्षी , निर्णायक और कार्यवाही उन्मुख होगा।

भारत यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा कि जी-20 नूतन विचारों और सामूहिक कार्रवाई को गति देने में उत्प्रेरक की भूमिका निभाएगा ।मोदी जी का कहना है कि पर्यावरण संसाधनों पर काबिज करने की भावना विवाद को जन्म दे रही है ;जिसके कारण पर्यावरण दुर्दशा व पर्यावरण पतन की स्थिति उत्पन्न होती है।

ट्रस्टीशिप (न्यासधरिता)की धारणा पृथ्वी को सुरक्षित भविष्य का समाधान है ;पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली अपनाकर जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाकर सतत भविष्य को सफल ,सार्थक एवं स्वास्थ्यप्योगी बनाया जा सकता है।

भारत को जी-20 की अध्यक्षता संवैधानिक रूप से 1 दिसंबर से प्राप्त होगा और इस अध्यक्षता के विषय में मोदी जी ने कहा है कि इसकी अध्यक्षता भारत को मिलना प्रत्येक भारतीय के लिए गौरव की बात है ।भारत ऐसे समय में जी-20 की अध्यक्षता करने जा रहा है जब संपूर्ण विश्व भू – राजनीतिक तनाव ,आर्थिक मंदी, खाद्य और ऊर्जा की बढ़ती कीमतें और कोरोना महामारी के दीर्घकालिक प्रभाव से जूझ रहा है। भारत G- 20 की विचार को समावेशी, महत्वकांक्षी ,निर्णायक और कर्योंमुखी बनाने में सहयोग देगा ।भारत वैश्विक स्तर पर नूतन विचारों को आगे बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाएगा और आने वाले समय में सामूहिक कार्यवाही में तीव्रता लाएगा।

हजारों साल की सांस्कृतिक विरासत की थाती और प्रेम व शांति, लोकतांत्रिक मूल्य एवं लोकतांत्रिक आदर्श सरीखे मानवीय मूल्यों को विश्व में प्रतिष्ठा दिलाने वाला यह देश दुनिया के आकर्षण का केंद्र रहा है।

कोरोना महामारी के पश्चात भारत महत्वपूर्ण हो चुका है ;क्योंकि वृहद जनसंख्या भारित होने के बाद भी कोरोनावायरस से होने वाली जन व धन को बहुत अधिक नियंत्रण किया है ।कोरोनावायरस ने सम्पूर्ण वैश्विक परिदृश्य को आर्थिक क्षति पहुंचाई है, इसको लेकर पूरी दुनिया में बेचैनी का माहौल है ।विकासशील देशों में इसका असर सर्वाधिक रहा है ;अब भारत को वैश्विक स्तर पर आने वाली चुनौतियों का समाधान खोजने में बड़े भाई की भूमिका निभानी होगी।

(डॉक्टर सुधाकर मिश्रा,सहायक आचार्य,स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज,दिल्ली विश्वविदयालय दिल्ली एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं।)

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