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50 मानद् डॉक्टरेट पानेवाले प्रथम महान शिक्षाविद् बने प्रो. अच्युत सामंत

2023 वर्ष को आत्मनिर्भर वर्ष माननेवाले तथा 23दिसंबर,22 को उत्कल विश्वविद्यालय भुवनेश्वर से ऑनरेरी डॉक्टरेट की डिग्री पानेवाले प्रोफेसर अच्युत सामंत आजाद भारत के कीर्तिमान 50 ऑनरेरी डॉक्टरेट की डिग्री पानेवाले प्रथम महान शिक्षाविद् बन चुके हैं। प्रोफेसर अच्युत सामंत भुवनेश्वर स्थित विश्वविख्यात शैक्षिक संस्थान- कीट-कीस के प्राणप्रतिष्ठाता तथा कंधमाल लोकसभा सांसद तपस्वी विदेह संत हैं।गौरतलब है कि अबतक भारत में स्वर्गीय राष्ट्रपति डॉ.ए पी जे अब्दुल कलाम को ही देश-विदेश के नामी विश्वविद्यालयों से कुल 48 मानद डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त थी जिनके रिकर्ड को तोड दिया है प्रो. अच्युत सामंत ने।23 दिसंबर,22 को उत्कल विश्वविद्यालय,भुवनेश्वर के 52वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में ओडिशा के महामहिम राज्यपाल तथा उत्कल विश्वविद्यालय,भुवनेश्वर के कुलाधिपति प्रो. गणेशी लाल ने प्रो.अच्युत सामंत को उनके जीवन की यह 50वीं मानद डॉक्टरेट की डिग्री प्रदान की।

प्रोफेसर सांत को मिली ऑनरेरी डॉक्टरेट की डिग्री की खुशी उनके शुभचिंतकों जैसेः प्रदोष पटनायक,दिलीप हाली,तनमय स्वाईं,मनोरंजन प्रधान,एमकेजेना,रवि बेहरा तथा अशोक पाण्डेय ने 25दिसंबर,22 को सुबह में उनके निवासस्थल आईआरसी विलेज नयापली में केक काटकर मनाया।

प्रो.अच्युत सामंत की विश्व विख्यात संस्था कीस(कलिंग इंस्टीट्यूट आफ सोसल साइंसेज) को मिले यूनिस्को साहित्य सम्मानः2022 ने महान शिक्षाविद् प्रोफेसर अच्युत सामंत को पूरे विश्व में आदिवासी शैक्षिक क्रांति का जीवित मसीहा बना दिया है। उसके लिए यूएन समेत विश्व के लगभग 120 देशों से उनको बधाई मिल चुकी है। उनकी आदिवासी शैक्षिक क्रांति,कीस की तारीफ भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी तथा ओडिशा के माननीय मुख्यमंत्री श्री नवीन पटनायक आदि भी दे चुके हैं। ओडिशा के मान्यवर राज्यपाल प्रोफेसर गणेशीलाल जी तो प्रोफेसर अच्युत सामंत को आदिवासी बच्चों के सर्वांगीण विकास तथा कल्याण हेतु उन्हें ओडिशा का जीवित देवदूत कहकर उन्हें पुकारते हैं।प्रो.सामंत के विषय में यह कहना कोई अतिशयोक्ति की बात नहीं होगी कि वे जनजाति के जननायक हैं,जनसेवा और लोकसेवा के जीवित मसीहा हैं। अपने पैतृक प्रदेश ओडिशा की धरती के सच्चे देवदूत हैं। वे सच्चे मानवतावादी हैं। वे अपने जीवन में सत्य,अहिंसा,त्याग,सादगी तथा आध्यात्मिक जीवन जीनेवाले सच्चे गांधीवादी हैं। करुणा, दया, सहानुभूति,सहयोग तथा उदारता के प्रत्यक्ष जीवित प्रमाण हैं।

वे ओडिशा प्रदेश की स्मार्ट सिटी भुवनेश्वर स्थित कीट-कीस दो विश्वविख्यात शैक्षिक संस्थानों के प्राणप्रतिष्ठाता तथा कंधमाल लोकसभा के सांसद हैं।प्रोफेसर अच्युत सामंत का कीट डीम्ड विश्वविद्यालय,भुवनेश्वर(तकनीकी उच्च शिक्षाप्रदान करनेवाला)अगर एक कारपोरेट है तो उनका कीस डीम्ड विश्वविद्यालय(विश्व का प्रथम आदिवासी आवासीय डीम्ड विश्वविद्यालय),भुवनेश्वर कीट कारपोरेट का वास्तविक कारपोरेट सामाजिक दायित्व है।पिछले लगभग ढाई साल तक ओडिशा में फैली वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण के दोनों चरणों में प्रो.सामंत ने जिसप्रकार की निःस्वार्थ भूमिका निभाई वह ओडिशा समेत पूरे भारत के लिए उल्लेखनीय, सराहनीय,प्रशंसनीय तथा अनुकरणीय निःस्वार्थ सेवा रही।उस दौरान ओडिशा के तेजस्वी मुख्यमंत्री श्री नवीन पटनाय सरकार की अनुमति से उन्होंने सभी अत्याधुनिक मेडिकल संसाधनों से युक्त भारत का प्रथम निजी अस्पताल कीम्स कोविड-19 अस्पताल खोला। यही नहीं,ओडिशा में प्रो.सामंत ने अपनी ओर से तीन-तीन जिला कोविड-19 अस्पताल भी खोले। इन कोविड-19 अस्पतालों में कीम्स की ओर से दक्ष डाक्टर,नर्स तथा पारामेडिकल स्टाफ भी तैनात किये गए। अपने द्वारा 1992-93 में स्थापित विश्व के प्रथम आदिवासी आवासीय विद्यालय कीस के कुल लगभग तीस हजार आदिवासी बच्चों को कोरोना संक्रमणकाल में उनके पैतृक गृह गांव में प्रतिमाह सूखा राशन,ड्राईफ्रुट,पाठ्य-पुस्तकें तथा समस्त शैक्षिक संसाधन आदि अपनी ओर से निःशुल्क उपलब्ध कराया। अपने द्वारा स्थापित कलिंग ओडिया क्षेत्रीय चैनेल के माध्यम से उन बच्चों के लिए नियमित आनलाइन कक्षाएं आयोजित कराई ।

2021 के कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में भी कीस के आदिवासी बच्चों के साथ-साथ कोरोना योद्धाओं,कोरोना मरीजों ,जरुरतमंदों को ओडिशा के कंधमाल समेत अलग-अलग जिलों में पका भोजन,सूखा राशन तथा अन्य राहत सामग्रियां अपनी ओर से निःशुल्क उपलब्ध कराई। मंदिर के पूजकों,साधु-संन्यासियों, अनाथालयों,नेत्रहीनों तथा विधवाओं आदि को भी कोरोना राहत सामग्रियां निःशुल्क उपलब्ध कराई।यही नहीं,कोरोना संक्रमणकाल में अपने संसदीय क्षेत्र कंधमाल को आदर्श तथा आत्मनिर्भर संसदीय क्षेत्र के रुप में परिणित करने में जुटे हैं सांसद प्रो. अच्युत सामंत।

ओडिशा के अविभाजित कटक जिले के कलराबंक गांव में जनवरी,1965 में जन्मे प्रोफेसर अच्युत सामंत घोर आर्थिक संकट रुपी कीचड से उत्पन्न ऐसे कमल हैं जिनके यशस्वी तथा तेजस्वी व्यक्तित्व की खुशबू को आज पूरी दुनिया सलाम करती है।उनके वास्तविक जीवन-दर्शनःआर्ट आफ गिविंग को सारा विश्व स्वेच्छापूर्वक प्रतिवर्ष 17मई को मनाता है। पूरा विश्व प्रोफेसर अच्युत सामंत को अपना रोल मॉडेल मानता है।सरल, सहज, आत्मीय,मृदुल तथा मिलनसार स्वभाव के धनी प्रोफेसर अच्युत सामंत सदा दूसरों की मदद करने में विश्वास करते हैं। वे पूरी तरह से आध्यात्मिक जीवन जीते हैं। प्रोफेसर सामंत तथा उनके द्वारा स्थापित कीट-कीस-कीम्स को देखने के लिए पूरे विश्व से हजारों नामचीन शिक्षाविद्, आध्यात्मिक धर्मगुरु,वैज्ञानिक, नोबेल पुरस्कार विजेता, राजनेता, राजनयिक, समाजसेवी, कारपोरेट जगत के भामाशाह, होनहार युवा, शोधकर्ता, खिलाडी, फिल्मी हस्तियां तथा फिल्मनिर्माता भुवनेश्वर आते हैं।

1987 में उत्कल विश्वविद्यालय,भुवनेश्वर से रसायनविज्ञान में एम.एससी करनेवाले तथा सामाजिक विज्ञान में डाक्टरेट करनेवाले प्रोफेसर अच्युत सामंत ने मात्र 22साल की उम्र से ही अध्यापन का कार्य आरंभ किया जिनके पास कुल 33 वर्षों का लंबा शिक्षण का अनुभव है। वे कीट डीम्ड विश्वविद्यालय,भुवनेश्वर के सबसे कम उम्र के संस्थापक कुलाधिपति हैं। विश्व के प्रथम आदिवासी आवासीय कीस डीम्ड विश्वविद्यालय,भुवनेश्वर के संस्थापक कुलाधिपति हैं। वे 2018-19 में राज्यसभा के बीजू जनतादल सांसद मनोनीत हुए। उसके उपरांत कंधमाल लोकसभा बीजू जनतादल सांसद निर्वाचित हुए।अपने बाल्यकाल में अनाथ,गरीब,बेसहारा बालक अच्युत सूखे पत्ते बटोरने में अपनी मां की मदद करके तथा अपनी विधवा मां को अपना पहला गुरु मानकर लीफ टेकर से भारतीय संसद में नीति-निर्धारक असाधारण व्यक्तित्व बन चुके हैं। टोकियो ओलंपिक में कीट की ओर से तीन ओलंपियन भेजनेवाले प्रोफेसर अच्युत सामंत ने कीट-कीस परिसर में समस्त अत्याधुनिक खेल संसाधनों से युक्त अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के अनेक खेल स्टेडियम बना रखा है जहां पर प्रतिदिन कोई न कोई गेम अवश्य ओयोजित होता है।

10अक्तूबर,2021 प्रोफेसर अच्युत सामंत के जीवन का एक यादगार दिन सिद्ध हुआ जब भारतीय संस्कृति सम्वर्द्धक ट्रस्ट,संदीपनि विद्यानिकेतन,पोरबन्दर,गुजरात ने अपने अनोखे कार्यक्रम- सर्विस टू सोसायटी कार्यक्रम में –विश्व विख्यात रामायणी परम संत परमपाद भाईश्री रमेशभाईजी ओझा के कर-कमलों द्वारा उन्हें महर्ष सम्मान से सम्मानित किया गया।उनकी निःस्वार्थ सेवाओं के लिए 2015 में उन्हें बहरीन का सर्वोच्च शांति नागरिक सम्मान गुस्सी सम्मान प्रदान किया गया। अपने असाधारण सफल जीवन की पहली गुरु माननेवाले अपनी स्व. मां नीलिमारानी सामंत पर अंग्रेजी में प्रो.सामंत ने एक पुस्तक लिखी जिसका लोकार्पण 02अप्रैल,2021 को भारत के तात्कालीन महामहिम उपराष्ट्रपति श्री एम.बैकेया नायडू ने भुवनेश्वर राजभवन में किया। प्रोफेसर अच्युत सामंत द्वारा अंग्रेजी में लिखित पुस्तकःमाई मदर माई हीरो है।कीट को विश्व स्तर पर सम्मान दिलाए हैं कीट के ओलंपियन प्रमोद भगत तथा ओलंपियन दुती चांद आदि ने।10अक्टूबर,2021 को प्रोफेसर अच्युत सामंत को महर्षि सम्मान मिला। 14अक्टूबर,2021 को जापानी लैंगवेज सेण्टर तथा मित्सुबिशी सीएसआर प्रोग्राम के द्वारा कीट-कीस में नया स्पोर्टस काम्प्लेक्स खुला। 21अक्टूबर,2021 को प्रोफेसर अच्युत सामंत को ईसा अवार्ड के जुरी के रुप में मनोनीत किया गया।27अक्टूबर,2021 को पहली बार फीफा फुटबाल स्कूली कार्यक्रम कीस में लांच हुआ। 29अक्टूबर,2021 को वर्लड यूनिवर्सिटी गेम के लिए कीट को नोडेल सेण्टर बनाया गया।

2 दिसंबर,2021 को प्रोफेसर अच्युत सामंत कावा(सेण्ट्रल एशियन वालीबाल फेडरेशन आफ इण्डीया) के माननीय सदस्य मनोनीत हुए।17दिसंबर,2021 को कीट-कीस में मनाये गये आजादी के अमृत महोत्सव में 6दिवसीय कलाकुंभ का सफल आयोजन हुआ।वर्षः2022 प्रो.सामंत तथा उनकी शैक्षिक पहल कीट-कीस के लिए असाधारण उपलब्धियों का वर्ष सिद्ध हुआ।सच कहा जाय तो 1987 में प्रो.अच्युत सामंत ने उत्कल विश्वविद्यालय,भुवनेश्वर से ही रसायन विज्ञान में एम.एससी किया जहां से उनको अपने जीवन की 50वीं ऑनरेरी डॉक्टरेट की डिग्री मिली है। प्रो. अच्युत सामंत को बधाई देनेवालों में कीट-कीस-कीम्स के कुल लगभग 11हजार स्टाफ हैं,70000 बच्चे हैं,सैकडों राजनेता तथा ओडिशा समेत भारत तथा विदेशों के उनके लाखों शुभचिंतक हैं।

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