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बलिदान दिवस पर याद किए गए क्रांतिकारी

कोटा।राजकीय सार्वजनिक मण्डल पुस्तकालय कोटा में स्वतंत्रता दिवस की 75 वीं वर्षगांठ के अंतर्गत आयोजित किए जा रहे आजादी का अमृत महोत्सव की शृंखला में दिनांक 23.03. 2022 को बलिदान दिवस पर भारतीय क्रांति के अग्रदूत अमर शहीद (स्वर्गीय श्री भगत सिंह हां जी स्वर्गीय श्री राजगुरु जी एवं स्वर्गीय श्री सुखदेव जी) की पुण्यतिथि पर पुस्तकालय में श्री डॉ . रघुनाथ मिश्र “ सहज” की अध्यक्षता में एवं मुख्य अतिथि प्रोफेसर डॉ आदित्य गुप्ता, अति विशिष्ठ अतिथि डॉ. नलिन , विशिष्ट अतिथि रघुनन्दन हटीला एव गौरस प्रचण्ड ,गेस्ट ऑफ ऑनर राजेन्द्र कुमार जैन फोरमर असिस्टेंट रजिस्ट्रार आर टी यु एवं डॉ दीपक कुमार श्रीवास्तव मंडल पुस्तकाल्याध्यक्ष द्वारा माल्यार्पण कर आमंत्रित अतिथि एवं पाठकों की उपस्थिति में श्रद्धांजलि अर्पित की गई । मंच संचालन के.बी.दीक्षित ने किया ।

कार्यक्रम के स्वागत उदबोधन मे डॉ दीपक कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि – युवा क्रातिकारियों की बदौलत ही देश को आजादी मिली है। ऐसे में युवाओं को उनकी शहादत को कभी भुलाना नहीं चाहिए।

इस अवसर पर पुस्तकालय मे शहीदों की याद मे काव्य गोष्टि का आयोजन किया जिनमे योगीराज योगी ने – आओ गीत सुनाता हूँ काव्य वाचन किया । इसी क्रम मे रेणु सिंह राधे ने – सैनिक वहाँ भी होसला दिखाये , नन्द किशोर “अनमोल” ने सुखदेव भगतसिंह राजगुरु अमर रहेगा तुम्हारा बलिदान, कवि कपिल खंडेलवाल कलश ने इस अवसर सरे आम हो रहा अत्याचार , हर जगह हो रहा भ्रष्टाचार , जीवन नही है सुरक्षित अब, करो क्रांति का अब विचार” काव्य रचना सुनाई ।

कवि महेश पंचोली ने – “भगतसिंह की संतान हम वतन के रखवाले है” , कवि राम शर्मा “ कापरेन” ने डरती होगी धरती तुझसे होगा दादा अपने घर का , कवि गोरस प्रचण्ड “ एक चाँद एक भान एक धरा एक आसमान सभी का एक ही है भगवान” रघुनन्दन हठीला ने – भारत माता ने जब-जब पुकारा, सिपाही सीमा पर चला, राजेंद्र जैन ने भारत को स्वतंत्र करवाने वाले वो हिम्मत वाले , बलिहारी हम उनके त्याग बलिदान के” एवं कवियत्रि गरिमा राकेश गौतम ने भी काव्य प्रस्तुति दी ।

मुख्य अतिथि डा आदित्य गुप्ता ने कहा कि – फांसी के फंदे पर झूले इंकलाब गाते गाते, ब्रिटिश राज हिला दिया गोली डंडे खाते खाते एव कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ . रघुनाथ मिश्र “ सहज” ने कहा कि – आजादी पर मिटने वाले मर कर मरा नहीं करते हैं ।

कार्यक्रम संयोजिका शशि जैन ने आमंत्रित अतिथियों का आभार ज्ञापित करते हुये स्वरचित काव्य – सरताज नौजवानों का मस्ताना भगतसिंह , आजादी का वह दीवाना भगतसिंह” से अपनी और से शहीदों को श्रद्धांजलि ज्ञापित किया ।

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