Monday, July 22, 2024
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Homeजियो तो ऐसे जियोबहुमुखी प्रतिभा के धनी साहित्यकार अख्तर खान 'अकेला'

बहुमुखी प्रतिभा के धनी साहित्यकार अख्तर खान ‘अकेला’

कहने को तो एडवोकेट है अख्तर खान   ‘अकेला’ पर  बहुत कम लोगों को पता है ये एक अच्छे साहित्यकार भी हैं जिन्होंने लधु कविताएं, अशआर , कहानियां, ब्लॉग, और विविध विषयों पर अपने आलेख से साहित्य जगत को रोशन किया है। इनकी साहित्यिक अभिरुचियों ने इन्हें साहित्यकार और लेखक के रूप में इनकी अपनी पहचान बनाई है। साहित्यकार के साथ – साथ अख्तर खान एनसीसी की निशाने बाजी में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित, स्वतंत्र पत्रकार , समाजसेवी , मजलूमों के मददगार होने के साथ – साथ अनेक  सामाजिक संगठनों में सक्रिय और सोशल मीडिया पर 10 हजार से अधिक ब्लॉग लिख कर ब्लॉगर्स के रूप में बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं।

साहित्यकार : ये हिंदी और उर्दू भाषा में समान रूप से लिखते हैं। अख्तर खान बताते हैं बाल्यकाल से ही इनको लिखने का शौक रहा है। बचपन के दिनों से ही लोटपोट , चंपक, नंदन, चंदामामा में बाल कहानियां और कविताएं तथा धर्मयुग , सरिता , मुक्त ,मनोहर कहानियां आदि पत्रिकाओं में इनके लेख ,कहानियां, लघु कविताऐं लगातार लंबे समय तक प्रकाशित होती रही हैं। इन्होंने उन दिनों में लगभग 100 से अधिक कहानियां और इतनी ही कविताएं लिखी हैं जो काफी चर्चित रही। साहित्य की यह रुचि आज तक निरंतर कायम है और आए दिन इनके अशआर फेसबुक की सुर्खियों में रहते हैं। इनमें इश्क इनकी प्रमुख विधा के रूप में उभर कर सामने आती है।  संयुक्त लेखक के रूप में पुस्तकें भी लिखी हैं। आपने कई पुस्तकों की भूमिका और समीक्षाएं भी लिखी हैं।

लेखन का क्रम इतना गति से चलता है कि कोई दिन ही शेष रहता हो जब ये कोई न कोई ब्लॉग न लिखते हो। इनके ब्लॉग किसी सीमा में  नहीं बंधे  हैं वरन एक व्यापक कैनवास लिए वैविध्य पूर्ण हैं। वैचारिक ब्लॉग समाज में प्रभावी संदेश देते हैं। सोशल एक्टिविस्ट के रूप में आप हर क्षेत्र, हर विषय पर अपना ब्लॉग  लिखते हैं। इनके ब्लॉग से आज राजस्थान में सामाजिक एकता, सद्भाव, समाज सेवा, स्थानीय, राज्य और राष्ट्रीय मुद्दे आदि सभी पर जागृति उत्पन्न करने में  महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। किसी भी राष्ट्रव्यापी घटना, प्रसंग आदि पर इनकी त्वरित टिपण्णी आती हैं। अमन चैन बनाए रखने में इनके ब्लॉग महत्वपूर्ण हैं। उल्लेखनीय है कि कुछ ही समय में फेसबुक पर इनके ब्लॉग की संख्या हजारों में पहुंच गई है। आपने विधि साक्षरता पर विशेष रूप से लेखनी चला कर जागरूकता पैदा करने का कार्य किया। आप कोटा की साहित्यिक संस्था भारतेंदु समिति से भी लंबे समय तक जुड़े रहे और साहित्यिक कार्यक्रमों में सहभागिता करते रहे।

 आप एक प्यार भरा दिल रखते हैं जिसमें प्यार ही प्यार समाया है जिससे रोमांटिक अशआर स्वतः ही फूट पड़ते हैं। लिखने में सिद्धहस्त अख्तर के कुछ अशआर की बानगी देखिए……..
कुछ बानगी देखिए —
अजीब बात है ना, तुम ही दिल में हो,
और तुम  ही धड़कनों को,ना समझ पाए।
बेसब्र, बेइंतहा,बेहद, इश्क है  तुम से,
तुम्हें हद में रहकर चाहना, मेरे बस की बात नहीं।
 तुम्हारे पास नहीं तो फिर किस के पास है?
वो टूटा हुआ दिल, आखिर गया कहाँ !
तुमसे रोका नहीं जाएगा ये काफिला हमारा
हमने लश्कर नहीं लोगों के दिल जीते हैं।

 पत्रकार :  साहित्य के साथ – साथ आप पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हो गए । पत्रकारिता का शोक लगा तो इन्होंने  कोटा के करीब आधा दर्जन समाचार पत्रों में कई वर्षो तक संपादन डेस्क संभाली और अपनी लेखनी को मजबूत करते रहे। ये ब्लिट्स समाचार पत्र में काफी समय तक कोटा से प्रतिनिधि रहे। मजलूमों के हित के लिए और समाजिक समस्याओं और कमजोर लोगों को न्याय के लिए अखबारों में  निडर हो कर प्रभावी रूप से आवाज उठाई। वर्तमान में भी कई समाचार पत्रों में विधि सलाहकार के रूप में जुड़े हुए हैं। इनके लेख भी समाचार पत्रों और न्यूज पोर्टल पर निरंतर प्रकाशित होते हैं। आप तीन बार प्रेस क्लब, कोटा कार्यकारिणी में तीन बार सदस्य रहे।

मानवाधिकार हितेषी : मानवाधिकार के हामी अख्तर खान ने लोगों के मानवाधिकारों की रक्षा के लिए  कानूनी न्याय दिलाने हेतु  वर्ष 1992 में ह्यूमन रिलीफ सोसायटी का गठन किया इसका मुख्य मोटो था ” जिओ और जीने दो “।  सोसायटी के महासचिव होने के नाते मानवाधिकार संरक्षण क्षेत्र में कार्यरत हैं। सोसायटी के माध्यम से हेमामालिनी को मेले दशहरे में बुलाकर, न्यूसेंस का मामला हो, पब्लिक न्यूसेंस के मामलें, कोटा थर्मल का पर्दूषण हो, चंबल सफाई हो, हेलमेट के नाम पर फ़र्ज़ी चालान बाज़ी हो, लालबत्तियों में पक्षपात हो , पुलिस प्रताड़ना , प्रशासनिक पक्षपात , कोटा अस्पताल की अव्यवस्थाओं, गांयों के पॉलीथिन खाने से मृत्यु को रोकने का मामला जेसे जनहित मुद्दों को हो ह्यूमन रिलीफ सोसायटी के महासचिव की हैसियत से पूरी टीम के साथ अख्तर खान अकेला ने जनहित याचिका के माध्यम से, सम्न्बधित अधिकारी से शिकायत के माध्यम से, लोगों को इंसाफ दिलाने के लिए संघर्षरत रहे हैं।
  महासचिव के रूप में आपने  राष्ट्रपति , प्रधानमंत्री , सहित सभी ज़िम्मेदारों से पत्र के माध्यम से राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर मानवाधिकार आयोग गठन की मांग की। अंतर्राष्ट्रीय दबाव के चलते, 1993 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का गठन हुआ और रंगनाथ मिश्र सबसे पहले अध्यक्ष बने। उसी समय राष्ट्रीय आयोग में अख्तर खान अकेला ने बाबू ईरानी के साथ पुलिस प्रताड़ना की सबसे पहली शिकायत दर्ज कराकर मानवाधिकार आयोग में सबसे पहली शिकायत दर्ज कराने का इतिहास बनाया। उनकी इस शिकायत पर संज्ञान हुआ, आयोग की पूरी टीम कोटा में इस शिकायत के अनुसंधान के लिए आई और सूक्ष्म परीक्षण के बाद बाबू ईरानी को अनावश्यक रूप से पुलिस प्रताड़ना का दोषी मानते हुए शिकायत को सही ठहराया और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ मुक़दमा दर्ज करवाया और प्रताड़ित बाबू ईरानी को एक्स ग्रेशिया के रूप में क्षतिपूर्ति राशि भी दिलवाई।

इन्होंने कोटा सहित राजस्थान की जेलों में क्षमता से ज़्यादा क़ैदी रखने उनके मानवाधिकार हनन करने सहित विस्तृत शिकायत भेजी जिसे आयोग ने राजस्थान हाईकोर्ट में जनहित याचिका के रूप में कार्यवाही पेश की गई। याचिका पर कोटा सहित सभी जेलों के बारे में जिला जज स्तर पर रिपोर्ट ली गई और कोटा सहित राजस्थान की सभी जेलों में क़ैदियों को कंबल, खाने के साफ़ बर्तन , खाने की शुद्धता, उनके रहने की मानवाधिकार व्यवस्थाएं, बजट वृद्धि , इलाज व्यवस्थाओं का विस्तृत आदेश देकर सभी व्यवस्थाएं करने के निर्देश जारी किए।

 इस बीच राजस्थान में भी राज्य मानवाधिकार आयोग का गठन हुआ और कोटा के आंवा – कनवास में जब पुलिस ने एक शख्स की बढ़ी मूंछे जो हर बार कोटा मेले दशहरे में बढ़ी मूंछ प्रतियोगिता जीतता था, उस शख्स की मूंछे पुलिस ने काट दी। इसकी शिकायत राज्य मानवाधिकार आयोग में पहली शिकायत के रूप दर्ज हुई और इस पर भी मूंछ को राजस्थान की आन बान शान का प्रतीक बताकर, पुलिस को लताड़ पिलाई गयी।

ये लगातार सोसायटी के माध्यम से इस प्रयास में लगे हैं कि कभी तो जिला न्यायालयों का गठन होगा। जहां इनके नहीं खुलने का अफसोस है वहीं इस पर संतोष भी है कि अब तक सोसायटी के माध्यम से राष्ट्रीय और राज्य मानवाधिकार आयोग में दर्ज कराई गई 150 शिकायतों में नागरिक अधिकारों का संरक्षण कराने में सफल हुए।
 
 सम्मान  :  छात्र जीवन से आप एन.सी.सी से विशेष प्रेम करते थे। बहुत कम लोगों को पता होगा कि आप अपने विद्यार्थी जीवन में एनसीसी में सक्रिय केडिट रहे हैं और निशाने बाजी में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किए जा चुके हैं। आपको विभिन्न संस्थाओं द्वारा समय – समय पर उज्जैन कवि  पदम् भूषण शिवमंगल सुमन सम्मान, जज़्बा सोशल सोसायटी उज्जैन का सम्मान , पंचायत अंसरियांन सम्मान ,  मदरसा शिक्षा सम्मान, बेस्ट निशानेबाज शूटर सम्मान, अंतर महाविद्यालय बेस्ट वक्ता प्रथम सम्मान, प्रहसन नाटक एक्टिंग सम्मान , सर्वाधिक , तात्कालिक लेखन सम्मान, सोशल मीडिया एक्टिविस्ट सम्मान, निशान ऐ इंसाफ सम्मान, मानवाधिकार संरक्षण सम्मान, तहरीक ऐ उर्दू सम्मान, तहफ़्फ़ुज़ ऐ उर्दु सम्मान, स्वतंत्र बेबाक लेखन सम्मान , स्वर्गीय शरद स्मृति पत्रकार सम्मान,  सूफी संत सहयोग लेखन सम्मान  और क़ोमी एकता लेखन सम्मान से नवाजा गया है। आपको सम्भागीय अध्यक्ष अल्पसंख्यक विभाग, सदस्य पन्द्रह सूत्रीय कल्याण कारी समिति , सर्वोदय सम्मान एवं मुफ्त विधिक सहायता कार्यकर्ता सम्मान प्राप्त करने का गौरव भी प्राप्त हुआ।
 
परिचय : आप झालावाड़ रियासत के समय से वर्तमान  जिले के पिड़ावा क्षेत्र के कड़ोदिया के सम्मानित जागीरदार परिवार से हैं। आपका जन्म 7 जून 1963 को हुआ।  आपके पिताश्री स्व. इंजीनियर असगर अली अंतर्राष्ट्रीय निशानेबाज थे। आप उर्दू, हिंदी, अंग्रेजी और अरबी भाषा पर समान अधिकार रखते हैं। आपने उर्दू और अंग्रेजी विषयों में एम ए,  विधि में एलएलबी, डीएलएल, डिप्लोमा इन क्रिमिनोलॉजी और पत्रकारिता और जनसंचार में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त की है। आपको विभिन्न कार्यक्रमों में मुख्य वक्ता और स्थिति के रूप में आमंत्रित किया जाता है। मिलनसार, सरल और सहज स्वभाव के होने से सभी वर्गों में लोकप्रिय हैं। आप विविध प्रकार समाज सेवा में भी सक्रिय रहते हैं और विभिन्न संस्थाओं से जुड़े हैं।

आप वर्ष 1998 से 2014 तक लगातार कोटा जिला वक्फ कमेटी में  वरिष्ठ उपाध्यक्ष , विधि सलाहकार पद पर रहे हैं।  उर्दू संरक्षण आंदोलन के लिए गठित तहरीक ऐ उर्दू राजस्थान में प्रदेश को कोऑर्डिनेटर भी हैं। भारतेन्दु समिति साहित्यिक संस्था , रेडक्रॉस सोसायटी , सहित कई संस्थाओं के सक्रिय सदस्य और आल इंडिया पीस मिशन, गुरुग्राम के आप राजस्थान के कॉर्डिनेटर हैं। लेखन, संगीत, नाट्य और पर्यटन आपकी अभिरुचियां हैं।
——
– डॉ.प्रभात कुमार सिंघल
लेखक एवं पत्रकार,कोटा

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