कोटा। साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं के तत्वावधान में समय - समय पर होने वाले आयोजनों द्वारा साहित्य के विविध आयामों से साक्षात्कार होता है। इन्हीं सन्दर्भों की बानगी साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समारोह में देखने को मिली। अवसर रहा हिन्दी पखवाड़े के अन्तर्गत रविवार, 27 सितम्बर 2026 को आरकेपुरम स्थित एक होटल के सभागार में समरस संस्थान साहित्य सृजन भारत, गांधी नगर, गुजरात की कोटा संभाग इकाई, कोटा  के संभागीय अधिवेशन - शपथ ग्रहण एवं समरस सम्मान समारोह का। 

 संस्थान के संस्थापक संयोजक डॉ. मुकेश कुमार व्यास 'स्नेहिल' के मुख्य आतिथ्य एवं समरस संस्थान की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शशि जैन 'चंद्रिका' की अध्यक्षता एवं समरस संस्थान की न्यासी श्रीमती अर्चना व्यास की मंचीय उपस्थिति में समरस संस्थान के मुख्य कार्यकारी डॉ. प्रभात कुमार सिंघल, राष्ट्रीय महामंत्री  आनंद कुमार जैन 'अकेला', राजस्थान प्रांतीय प्रभारी डॉ. वैदेही गौतम, राजस्थान प्रांतीय अध्यक्ष गोविंद गुरु जी, राजस्थान प्रांतीय महामंत्री नवनीत राय 'रुचिर' अतिविशिष्ट अतिथि रहे तथा राष्ट्रीय संरक्षक सर्व श्री रघुनाथ मिश्र 'सहज',  जितेंद्र निर्मोही, संभागीय संरक्षक सर्व श्री योगेन्द्र कुमार शर्मा, रघुराज सिंह 'कर्मयोगी' तथा वरिष्ठ व्यंग्यकार आलोचक एवं कवि  डॉ. अतुल चतुर्वेदी के गरिमामय सान्निध्य में  विजय जोशी ने मुख्य वक्ता के रूप में सहभागिता की।

समारोह का आरम्भ में मंचस्थ अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन, माल्यार्पण एवं पूजन अर्चन से हुआ। इसके पश्चात् झालावाड़ की युवा कवयित्री अदिति शर्मा ने सस्वर सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर पूरा परिवेश भक्ति - आराधना से जोड़ दिया।  इसी क्रम में सभागार में उपस्थित साहित्य प्रेमियों एवं साहित्यकारों सहित समरस के सदस्यों द्वारा मंचस्थ अतिथियों का माल्यार्पण करते हुए उपर्णा धारण कराके स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया गया। 

समरस संस्थान के कोटा जिला अध्यक्ष राजेन्द्र जैन के गायन और निर्देशन में सभागार में उपस्थित सभी जनों के द्वारा कवि - गीतकार एवं समरस संस्था के राष्ट्रीय महामंत्री आनंद कुमार जैन 'अकेला ' द्वारा रचित समरस गान का सस्वर सामूहिक रूप से गायन किया गया - 

गाओ समरस गान सब मिल, 

गाओ समरस गान ।

समरसी शीतल बयार हो । 

चारों ओर छाई बहार हो ।। 

बढ़े आत्मबल और मान । 

सब मिल गाओ समरस गान ।।

समरसता के भाव हों सब में। 

आदर और सम्मान हो मन में ।। 

बनें सहज-सरल-गुणवान । 

सब मिल गाओ समरस गान ।।

समारोह में समरस संस्थान की कोटा संभागीय इकाई की नव निर्मित कार्यकारिणी के शपथ ग्रहण में वर्ष 2027 के लिए समारोह में उपस्थित सभी पदाधिकारियों को संस्थान के संस्थापक संयोजक डॉ. मुकेश कुमार व्यास 'स्नेहिल' ने पद का मनोनयन - पत्र सौंपते हुए शपथ ग्रहण कराई तथा पद का मनोनयन - पत्र सौंपने के साथ ही सभी को उनके साहित्यिक योगदान के लिए " हिन्दी सृजन गौरव सम्मान " से सम्मानित किया गया। 

इस अवसर पर मंचस्थ अतिथियों द्वारा दो कवयित्री रश्मि वैभव गर्ग की काव्य कृति "मन की पगडंडियों" तथा लेखिका अंजना मनोज गर्ग की कथा, लघुकथा, लेख संग्रह  "पिघलती संवेदनायें" का विमोचन किया गया। दोनों पुस्तकों पर मुकेश व्यास स्नेहिल ने एवं क्रमशः कवयित्री - लेखिका ने संक्षेप में अपने - अपने विचार व्यक्त किए।

समारोह में भारत की विविधतापूर्ण पर्यटन विरासत, ऐतिहासिक धरोहरों, प्राकृतिक सौंदर्य एवं सांस्कृतिक वैभव को अपने पर्यटन साहित्य लेखन द्वारा उल्लेखनीय एवं अतुलनीय योगदान हेतु पर्यटन दिवस - 2026 के अवसर पर समरस संस्थान साहित्य सृजन भारत, गांधी नगर, गुजरात द्वारा द्वारा समरस संस्थान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पर्यटन लेखक डॉ. प्रभात कुमार सिंघल का मंचस्थ अतिथियों ने माल्यार्पण, शाल, अभिनन्दन - पत्र सहित स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनन्दन किया। अभिनन्दन - पत्र का वाचन रेणु सिंह राधे ने किया। 

 इसी क्रम में संस्थान के राष्ट्रीय संरक्षक एवं वरिष्ठ साहित्यकार जितेन्द्र निर्मोही के साहित्य पर शोध करने वाले देवली (टोंक) के नीरज वर्मा को भी सम्मान - पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया। संस्थान द्वारा आयोजित काव्य प्रतियोगिता के उपस्थित विजेताओं को भी प्रमाण - पत्र देकर सम्मानित किया गया।

गीत - संगीत की प्रस्तुति में कवयित्री अल्पना गर्ग ने छोड़ दे सारी दुनिया किसी के लिए ...संगीत प्रेमी गायक कवि राजेन्द्र जैन ने बड़ी मस्तानी है मेरी महबूबा... तथा दिल का आलम मैं क्या बताऊँ तुझे ... गीत तथा डॉ. हिमानी भाटिया ने वृंदावन के ओ बांके बिहारी... भजन तथा कवयित्री गायक वंदना शर्मा ने  बुरी है बुराई मेरे साथियों बुरा मत कहो बुरा मत देखो बुरा मत सुनो... गीत प्रस्तुति से श्रोता झूम उठे।

मंचासीन सभी अतिथियों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए समरस संस्थान की अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय, राज्य स्तरीय, संभागीय एवं जिला स्तरीय गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया आज संस्थान की 3 अंतरराष्ट्रीय इकाई सहित भारत के 18 राज्यों की इकाई के माध्यम से 35 हजार से अधिक साहित्यकार सदस्य जुड़े हैं। छत्तीसगढ़ में संस्थान का पहला भवन निर्मित होना बड़ी उपलब्धि हैं। अपनी प्रतिनिधि रचना का पाठ भी किया।  राजस्थान प्रांतीय अध्यक्ष गोविंद गुरु जी ने प्रांतीय अधिवेशन के लिए आश्वस्त किया। राजस्थान प्रांतीय महामंत्री नवनीत राय 'रुचिर' ने साहित्यिक परिवेश के साथ संस्था के आयोजन की प्रभाविकता को उभारा।

 राजस्थान की प्रांतीय प्रभारी डॉ. वैदेही गौतम ने कोटा में समरस भवन में केन्द्रीय कार्यालय खोलने के लिए आश्वस्त किया तो मुख्य कार्यकारी डॉ. प्रभात कुमार सिंघल ने यथा शीघ्र  भवन के शुभारम्भ की सम्भावना व्यक्त की। राष्ट्रीय संरक्षक सर्व श्री रघुनाथ मिश्र 'सहज' एवं  जितेंद्र निर्मोही ने साहित्य और सृजन पर विचार व्यक्त कर संस्थाओं की महत्ता को उजागर किया वहीं संभागीय संरक्षक रघुराज सिंह 'कर्मयोगी' ने बेटी पर मार्मिक कविता प्रस्तुत की। समारोह की अध्यक्ष संस्थान की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शशि जैन ने आयोजन और संस्था जुड़ाव के साथ सतत् रूप से साहित्य सृजन करने और सदैव की भाँति सहयोग करते हुए संस्थान द्वारा साहित्यिक परिवेश समृद्ध करने पर संक्षेप में प्रकाश डाला। 

'साहित्य के विकास में साहित्यिक संस्थाओं का योगदान' विषय पर अपने उद्बोधन में  विजय जोशी ने कहा कि -  साहित्य और समाज एक दूसरे के अन्तर्सम्बन्धों को उजागर करते हैं। सामाजिक, साहित्यिक सांस्कृतिक संस्थाएँ इस अन्तर्सम्बन्ध को दिशा ही नहीं देती वरन् इनके माध्यम से होने वाले आयोजनों में सामाजिक सरोकारों को संवाद के माध्यम से उजागर भी करती हैं तथा इन संवादों को संचारित करने का माध्यम भी बनतीं हैं। यहाँ साहित्य एवं उसकी संस्कृति के विविध विषयों पर होते विवेचन, सन्दर्भानुसार चर्चा - परिचर्चा तथा विचार - विमर्श में वक्ताओं द्वारा विषय विशेष पर अभिव्यक्त विचारों से कई नवीन सन्दर्भ जानने एवं समझने का अवसर प्राप्त होता है। यही नहीं साहित्यिक सृजन के विविध आयामों को परखने के साथ सहभागिता करते हुए तत् सम्बन्धी  जानकारी में अभिवृद्धि भी होती है जो सृजन परिवेश को विकसित एवं समृद्ध करने में आवश्यक होती है।

उन्होंने कहा  विभिन्न स्थानीय, आँचलिक, राज्य एवं राष्ट्रीय साहित्यिक संस्थाओं के साथ राज्य एवं केन्द्रीय अकादमी का उल्लेख करते हुए उनके सक्रीय योगदान और साहित्यिक परिदृश्य को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका को विवेचित किया। यही नहीं एक व्यक्ति की साहित्यिक लगन, उसकी निष्ठा तथा उसका समर्पित साहित्यिक योगदान भी एक संस्था जैसा ही रूप लेकर विभिन्न साहित्यिक संगोष्ठियों के माध्यम से साहित्य के विकास में किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है का उल्लेखित करते हुए चर्चा की। 

लेखक, पाठक और श्रोता की विषय विशेष को लेकर सोच तथा उससे उपजे समन्वित स्वर को परस्पर पहुँचाने में संस्थाओं के  महत्वपूर्ण योगदान की चर्चा करते हुए  जोशी ने कहा कि -  संस्थाओं का महत्वपूर्ण योगदान होता है। ये संस्थाएँ एक व्यक्ति से समूह का रूप धारण करती है। इन संस्थाओं में व्यक्ति, विचार, साहित्य और सामाजिक सरोकार विद्यमान रहते हैं। इनके माध्यम से लेखकों के विचार समाज तक पहुँचते हैं। आज पत्र - पत्रिकाओं के अतिरिक्त ये विचार सोशियल मीडिया के माध्यम से समाज तक पहुँचते हैं। यह भी एक प्रकार से संस्था का ही प्रकार है। यह अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम है।  लेखक यहाँ अपने लेखन और अभिव्यक्त विचारों से समाज को जागरूक करने के कार्य करते हैं। आज समरस संस्था के सौजन्य से जो दो पुस्तकें मन की पगडंडियों तथा पिघलती संवेदनायें विमोचित हुई हैं उनकी कविता, कथा लघुकथा एवं लेख समाजिक सरोकारों को उजागर करती हैं। 

लेखक, पाठक और श्रोता की विषय विशेष को लेकर सोच तथा उससे उपजे समन्वित स्वर को परस्पर पहुँचाने में संस्थाओं के  महत्वपूर्ण योगदान की चर्चा करते हुए  जोशी ने कहा कि ये संस्थाएँ एक व्यक्ति से समूह का रूप धारण करती है। इन संस्थाओं में व्यक्ति, विचार, साहित्य और सामाजिक सरोकार विद्यमान रहते हैं। इनके माध्यम से लेखकों के विचार समाज तक पहुँचते हैं। यही नहीं आज पत्र - पत्रिकाओं के अतिरिक्त ये विचार सोशियल मीडिया के माध्यम से समाज तक पहुँचते हैं। यह भी एक प्रकार से संस्था का ही प्रकार है। यह अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम है। लेखक यहाँ अपने लेखन और अभिव्यक्त विचारों से समाज को जागरूक करने के कार्य करते हैं। आज समरस संस्था के सौजन्य से जो दो पुस्तकें "मन की पगडंडियों" तथा "पिघलती संवेदनायें" विमोचित हुई हैं उनकी कविता, कथा लघुकथा एवं लेख समाजिक सरोकारों को उजागर करती हैं।

लेखक और साहित्यकार के मध्य के सेतु को उभारते हुए उन्होंने कहा कि साहित्यकार प्रथमतः लेखक ही होता है। क्योंकि उसके विचार अनुभवों से पुष्ट होते हैं वे समाज से लिए जाते हैं और उसी को अर्पित किए जाते हैं। इसमें श्रुति परम्परा का निर्वहन करते हुए लेखक अपनी विधा विशेष में विषय वस्तु को इस प्रकार से अभिव्यक्त करे कि वह सहजता से श्रोता एवं पाठकों तक पहुँच जाए। लेखक इसी परम्परा से साहित्य के उत्स को, उसके हित को साधता है। साहित्यिक संस्थाएँ इसी हित को साधने में महत्वपूर्ण कार्य करती हैं। 

संस्थान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. प्रभात कुमार सिंघल ने अपने वक्तव्य में कहा राष्ट्रीय अध्यक्ष को साथ लेकर तीन वर्षों में विभिन्न राष्ट्रीय साहित्यिक गतिविधियों के माध्यम से संस्थान को बुलंदियों तक पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई। समरस के शाब्दिक अर्थ को सार्थक करते हुए सभी पदाधिकारियों के साथ कोटा शहर की विभिन्न संस्थाओं को साथ में लिया गया। संस्कृति के अभिन्न हिस्से साहित्य को संस्कृति के साथ जोड़ते हुए कई आयोजन चर्चित हुए और लोकप्रिय बने। उद्देश्यपरक आयोजनों से साहित्यकारों में सृजनात्मक चेतना जागृत हुई , विशेषकर महिलाओं में जागृति की लहर उत्पन्न हुई।

 डॉ. सिंघल ने कहां संस्थान के साथ संस्कृति, साहित्य, मीडिया फोरम के द्वारा मिशन बाल मन तक विशेष अभियान संचालित किया गया। विविध बाल साहित्यिक गतिविधियों के माध्यम से दो वर्ष में 41 हजार बच्चों में साहित्य के प्रति समझ और जागरूकता उत्पन्न कर उन्हें साहित्य से जोड़ा गया। आज हाड़ोती अंचल में अनेक बच्चें कविता, कहानियां लिखने लगे हैं। साथ ही उनमें मंच संचलन और नेतृत्व क्षमता का विकास भी हुआ है। इस अभियान में राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शशि जैन और प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. वैदेही गौतम सहित अन्य सदस्यों का भरपूर योगदान प्राप्त हुआ।

समारोह के संयोजक एवं कोटा संभागीय अध्यक्ष कवि महेश पंचोली ने स्वागत उद्बोधन करते हुए सरस संचालन किया। संभागीय इकाई के महामंत्री एवं कवि डॉ. शिव लहरी ने सभी आगन्तुकों का आभार व्यक्त करते हुए अपनी प्रतिनिधि रचना का पाठ किया। यह समारोह कई माने में अपनी नवीन साहित्यिक सन्दर्भों के लिए अविस्मरणीय रहा। इस माने में कि राष्ट्रीय संरक्षक डाॅ. रघुनाथ मिश्र 'सहज' की 20 सितम्बर 2026 को संभागीय अधिवेशन के लिए शुभकामनाएँ समारोह के लिए प्रासंगिक रही - 

लेखन में गुणवत्ता हो, 

आपस में समरसता हो।

'सहज' कामना मंगल की,

जीवन  में  तत्परता  हो।  

 विजय जोशी

कथाकार एवं समीक्षक, कोटा