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सब अपने, हम सबके, भाईचारे की भावना के प्रतीक सेवाभावी राजाराम

समाजसेवी राजाराम कर्मयोगी वास्तव में अपने नाम को चरितार्थ करने वाले कर्मयोगी है। मन, वचन और कर्म से उनकी यह भावना साफ झलकती है। इनसे मेरा परिचय कई सालों से हैं। मैने इन्हें हमेशा पीड़ित मानव की सेवा में लगे देखा। हमेशा पीड़ितों की हर संभव सहायता का भाव इनके मन में रहता है।

ये रंगमंच के एक अच्छे कलाकार और कवि हृदय होने के साथ – साथ एक अच्छे चित्रकार भी हैं। किसी जमाने में आयोजित रामलीला में ये रावण का अभिनय इतनी शिद्दत से अदा करते थे कि ये रावण सरकार के नाम से विख्यात हैं और यह उपमा इनकी खास पहचान बन गई हैं।

सेवाभावी होने से सेवा के कई प्रक्लप शुरू किए। समाज सेवी संस्था “कर्मयोगी सेवा संस्थान” के माध्यम से समाज में व्याप्त बुराइयों को खत्म करने का काम अपने अंदाज से सतत रूप से कर रहे हैं। भिखारियों के बच्चों के जीवन संवारने के लिए काम किया। समाज में भाईचारा , सद्भावना बढ़ाने, बेटी बचाओ , बेटी पढ़ाओं ,लोगों का बचपन बचाओ जैसे मुद्दों पर भी आपने लंबे समय तक कार्य किया। आम लोगों के दुःख दर्दों को बांटना आपके व्यक्तित्व का विलक्षण गुण है।

सामाजिक, राष्ट्रीय मुद्दों और किसी भी समस्या के प्रति हमेशा आगे और मुखर रहते हैं। दहेज़ के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिए बिना दहेज़ का अनोखा विवाह कर समाज में स्वयं उदहारण बने। कोटा की संस्कृति से इतने प्रभावित हैं कि खूबसूरती को प्रोत्साहित करने के लिए सामाजिक कार्डों में संस्कृति को स्थान देते हैं।

मृतक लोगों की बॉडी को श्मशान तक पहुंचाने के लिए निशुल्क परिवहन साधन उपलब्ध कराने की सेवा निरन्तर जारी है। यही नहीं लावारिश लाशों के अंतिम संस्कार का खर्च स्वयं वहन करते हैं।

चित्रकार, कलाकार और कवि होने के नाते इनके मन में ऐसे लोगों के प्रति पूरा सम्मान भाव हैं। इसी भावना के वशीभूत हो कर इन्होंने हाड़ोती के चित्रकारों, कलाकारों, कवियों, लेखकों, साहित्यकारों का संस्था के माध्यम से सम्मान करने का बीड़ा उठाया। पिछले तीन माह में कई सम्मान कार्यक्रमों के माध्यम से सैंकड़ों ऐसी प्रतिभाओं का सम्मान कर चुके हैं और आज अपने जन्म दिन पर भी कलाकार सम्मान समारोह का आयोजन किया है।

मानवता और सेवा के भावों से भरपूर राजाराम किसी भी राजनैतिक, धार्मिक या अन्य किसी भी संगठन से नहीं जुड़ कर सदभाव और भाईचारे से रहने का संदेश देते हैं। ना काहू से दोस्ती ना काहू से बेर, सब अपने और हम सबके यही इनके जीवन की सफलता और लोकप्रियता का एक मात्र सूत्र हैं। कलाकार, कवि, लेखक, साहित्यकार समाजसेवी और शुभचिंतक इन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएँ दे रहे हैं।

(लेखक राजस्थान सूचना विभाग के सेवा निवृत्त अधिकारी हैं व विभिन्न सामाजिक व ऐतिहासिक विषयों पर लिखते हैं)

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