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मुस्लिम राष्ट्रीय मंच से श्री मोहन भागवत का भाषण, जिस पर बवाल मचा

ये कोई इमेज मेकओवर का एक्सरसाइज नहीं है, संघ क्या है 90 वर्षों से पता है लोगों को. संघ को इमेज की कभी परवाह रही नहीं है. हमको बाकी कुछ करना नहीं है, सबको जोड़ना है, अच्छा काम करना है. हमारा संकल्प सत्य है, इरादा पक्का है, पवित्र है. किसी के विरोध में नहीं किसी की प्रतिक्रिया में नहीं.

इसलिए ये इमेज बदलने का कोई एक्सरसाइज नहीं है, ये अगले चुनावों के लिए मुसलमानों का वोट पाने का प्रयास भी नहीं है क्योंकि हम उस राजनीति में नहीं पड़ते.

हां हमारे कुछ विचार है, राष्ट्र में क्या होना चाहिए क्या नहीं होना चाहिए उसके बारे में. और अब एक ताकत बनी है तो वो ठीक हो जाए इतनी ताकत हमें जहां लगानी है, चुनावों में भी लगाते है. ये बात जरूर है लेकिन हम किसी के पक्षधर है इसलिए नहीं, हम राष्ट्र हित के पक्षधर है. उसके खिलाफ जाने वाली बात कोई भी करे हम उसका विरोध करेंगे. और उसके पक्ष में जाने वाली बात कोई भी करे हम उसका समर्थन करेंगे.

कुछ काम ऐसे है जो राजनीति बिगाड़ देती है, मनुष्यों को जोड़ने का काम राजनीति से होने वाला नहीं है. राजनीति चाहे तो उसपर असर डाल सकती है, बिगाड़ सकती है उतनी मात्रा में राजनीति की चिंता लोगों को जोड़ने वालों को करनी पड़ती है. वो कोई भी हो हम हों या अगर आप जोड़ने चले है उनको भी चिंता है वो करनी पड़ेगी. परंतु राजनीति इस काम का औजार नहीं बन सकती. इस काम को बिगाड़ने का हथियार बन सकती है.

हिंदू मुसलमान एकता ये शब्द ही बड़ा भ्रामक है, ये दो है ही नहीं तो एकता की बात क्या. इनको जोड़ना क्या ये जुड़े हुए है. और जब ये मानने लगते है की हम जुड़े हुए नहीं है तब दोनो संकट में पड़ जाते है. बात यही हुई है. हम लोग अलग नहीं है क्योंकि हमारे देश में ये परंपरा नहीं है की आप की पूजा अलग है इसलिए आप अलग है.

हम लोग एक है और हमारी एकता का आधार हमारी मातृभूमि है. आज हमारी पूरी जनसंख्या को ये भूमि आराम से पाल सकती है, भविष्य में खतरा है उसको समझ के ठीक करना पड़ेगा.

हम समान पूर्वजों के वंशज है. ये विज्ञान से भी सिद्ध हो चुका है. 40 हजार साल पूर्व से हम भारत के सब लोगों का डीएनए समान है.

हिंदुओ के देश में हिंदुओ की दशा ये हो गई जरूर दोष अपने ही समाज में है, उस दोष को ठीक करना है. ये संघ की विचारधारा है.

तथाकथित अल्पसंख्यकों के मन में यह डर भरा गया है की संघ वाले तुमको खा जायेंगे. दूसरा ये डर लगता है की हिंदू मेजोरिटी देश में आप रहोगे तो आपका इस्लाम चला जायेगा. अन्य किसी देश में ऐसा होता होगा. हमारे यहां ऐसा नहीं है. हमारे यहां जो जो आया है वो आज भी मौजूद है.

मैं बहुत आग बबूला होके भाषण करके हिंदुओ में पापुलर तो हो सकता हूं, लेकिन हिन्दू कभी मेरा साथ नहीं देगा. क्योंकि वो आतातायित्व पर चलने वाला नहीं है. वो जानता है की अपना शत्रु है तो भी उसको जीने का हक है. लड़ाई भी होती है और लड़ाई हारने के बाद शत्रु कहता है माफ करो तो उसको शरण देना है. ये परंपरा है.

अगर हिंदू कहते है की यहां एक भी मुसलमान नहीं रहना चाहिए तो हिंदू हिंदू नही रहेगा. ये हमने संघ में पहले नहीं कहा है, ये डॉक्टर साब के समय से चलती आ रही विचारधारा है. ये विचार मेरा नहीं है, ये संघ की विचारधारा का एक अंग है क्योंकि हिंदुस्तान एक राष्ट्र है. यहां हम सब एक है. इतिहास भी होंगे लेकिन पूर्वज सबके समान है.

लोगों को पता चले इस ढंग से इस्लाम भारत में आया वो आक्रामकों के साथ आया. जो इतिहास दुर्भाग्य से घटा है वो लंबा है, जख्म हुए है उसकी प्रतिक्रिया तीव्र है. सब लोगों को समझदार बनाने में समय लगता है लेकिन जिनको समझ में आता है उनको डटे रहना चाहिए.

देश की एकता पर बाधा लाने वाली बाते होती है तो हिंदू के खिलाफ हिंदू खड़ा होता है. लेकिन हमने ये देखा नहीं है की ऐसी किसी बात पर मुस्लिम समाज का समझदार नेतृत्व ऐसे आताताई कृत्यों का निषेध कर रहा है.

लोगों को कन्वर्ट करने के लिए तैयारी करने का समय मिले इसलिए लोगों को बातों में उलझा कर रखना ये भी एक अर्थ होता है बातचीत का. ऐसा किसी ने किया हो तो पता नहीं.

कट्टरपंथी आते गए और उल्टा चक्का घुमाते गए. ऐसे ही खिलाफत आंदोलन के समय हुआ. उसके कारण पाकिस्तान हुआ. स्वतंत्रता के बाद भी राजनीति के स्तर पर आपको ये बताया जाता है की हम अलग है तुम अलग हो.

समाज से कटुता हटाना है, लेकिन हटाने का मतलब ये नहीं की सच्चाई को छिपाना है. भारत हिंदू राष्ट्र है, गौमाता पूज्य है लेकिन लिंचिंग करने वाले हिंदुत्व के खिलाफ जा रहे है, वो अताताई है. कानून के जरिए उनका निपटारा होना चाहिए. क्योंकि ऐसे केसेज बनाए भी जाते है तो बोल नहीं सकते आज कल की कहां सही है कहां गलत है.

आज अगर संघ के नाते हम कोई बात कहते है, अभी ये बात मैं कह रहा हूं, इसकी हिन्दू समाज में तो बहुत बड़ी चर्चा होगी. बहुत बड़ा वर्ग है जो इसका समर्थन करेगा, हमको कहेगा की आपने बहुत अच्छा किया ये पहल की.

ऐसा भी वर्ग है जो खराब नहीं है, अच्छा ही है, अच्छे इंसान है लेकिन वो कहेंगे की बस आप भी भोले बन गए अब. ये जरूर कहेगा. क्योंकि ठोकरें लगी है. वो कहेंगे की अरे ऐसा कभी हुआ था क्या? ऐसा मामला नहीं है ये. आप लोग नहीं समझते. ऐसे भी होंगे. चलेगा.. ये शास्त्रार्थ चलेगा.

लेकिन एक बात है की हिंदू समाज की भावना संघ बोलता है. क्योंकि नीचे तक हमारे स्वयंसेवक है, समाज क्या सोचता है क्या नहीं, हमारे पास आता है, उसके अनुसार मै बता रहा हूं.

हिंदू समाज की हिम्मत बढ़ाने के लिए उसका आत्मविश्वास उसका आत्म सामर्थ्य बढ़ाने का काम संघ कर रहा है. संघ हिंदू संगठनकर्ता है. इसका मतलब बाकी लोगों को पीटने के लिए नहीं है वो.

एक ने पूछा की आप क्या करने जा रहे है? क्या होगा इससे? इससे तो हिंदू समाज दुर्बल होगा. मैने कहा कमाल है.. एक माइनोरिटी समाज है मुसलमान, उसकी पुस्तक का मैं उद्घाटन करने जा रहा हूं उसमे कोई डरता नहीं है और तुम मेजोरिटी समाज के होकर के डरते हो की क्या होगा? ऐसा व्यक्ति एकता नही कर सकता जो डरता है. एकता डर से नहीं होती, प्रेम से होती है, निस्वार्थ भाव से होती है.

हम डेमोक्रेसी है, कोई हिंदू वर्चस्व की बात नहीं कर सकता कोई मुस्लिम वर्चस्व की बात नहीं कर सकता. भारत वर्चस्व की बात सबको करनी चाहिए.

हम कहते है हिंदू राष्ट्र इसका मतलब तिलक लगाने वाला, पूजा करने वाला नही है. जो भारत को अपनी मातृभूमि मानता है जो अपने पूर्वजों का विरासतदार है, संस्कृति का विरासतदार है वो हिंदू है.

हम हिंदू कहते है आपको नहीं कहना है मत कहो, भारतीय कहो, ये नाम का शब्द का झगड़ा छोड़ो. हमको इस देश को विश्व गुरु बनाना है. और ये विश्व की आवश्यकता है नहीं तो ये दुनिया नहीं बचेगी

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