काले और सफ़ेद के बीच का कोई रंग ब्राउन हो सकता है। इन दिनों एशियन परिवारों को भी ब्राउन फैमिली कहा जाता है। तो भूरे के इन नए अर्थों के साथ आप ज़ी 5 पर आई नई क्राइम सीरीज़ ब्राउन देखते हैं पर दरअसल यह एंग्लो-इंडियन पुलिस किरदार रीटा ब्राउन द्वारा मर्डर मिस्ट्री सुलझाने की कथा है। कोलकाता की पृष्ठभूमि पर किसी एंग्लो-इंडियन किरदार को क्यों चुना गया इसका थोड़ा अर्थ अंतिम सातवीं कड़ी में जुड़ता है जब हत्यारा हर हत्या के पहले बेनिडिक्शन-ईश्वरीय कृपा से मिलने वाला आर्शीवाद लिखता है और जिनकी हत्या नहीं करता उनके आगे रिडैम्पशन-पाप मुक्ति लिख देता है। वह किरदार बंगाली बाबू है, इतना कि उसके बचपन के रंगों में काली माता को दी गई बलि दिखाई जाती है और उसी तरह वह गला काटकर हत्या करता है, जैसे बलि दी जाती है। उसके साथ बाइबल के संदर्भ कैसे जुड़ते हैं, स्पष्ट नहीं होता।
ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म ने करिश्मा को ग्लैमरस गुड़िया से हटकर संजीदा अभिनय करने का अवसर दिया है। बाहर से मजबूत और कठोर दिखने वाली पुलिस अधिकारी के भीतरी टूटन को उन्होंने बखूबी पेश किया है। इस सीरीज़ में वे इतनी सामान्य दिखाई गई हैं कि वे बेतरतीब भूरे-स्लेटी, स्याह कपड़ों में हैं। उन्होंने न तो कानों में कुछ पहना है, न बालों को खास तौर पर सँवारा है। शबाना आज़मी और स्मिता पाटील की याद दिलाते हुए वे कई बार अपने बाल बाँधती नज़र आती हैं, जैसे तब शबाना और स्मिता हर दूसरे दृश्य में जूड़ा बाँधा करती थीं। रीटा ब्राउन कोलकाता में डेस्क पर काम करने वाली अनुभवी लेकिन उदास पुलिस अफसर दिखाई गई है। वह अपनी माँ (सोनी राजदान) के साथ रहती है और उसे अपने मृत पति (शान) की यादें परेशान करती हैं। इस केस में उसका साथ अर्जुन सिन्हा (सूर्या शर्मा) नामक पुलिस अफसर देता है, जो कार ऐक्सीडेंट में अपनी पत्नी और बेटी को खोने के सदमे से उबरने की कोशिश में है। कहानी थोड़ी प्रीडिक्टेबल लगती है। कुछ संदेहास्पद स्थितियों-व्यक्तियों के पास तक तो दर्शक भी पहुँच जाते हैं।
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कलाकार : करिश्मा कपूर, सूर्या शर्मा, जिशु सेनगुप्ता, सोनी राजदान, हेलेन, शान
निर्देशक :अभिनय देव
राय : देखना आवश्यक नहीं






