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ऊर्जावान नेतृत्व की उपयोगिता  

लोकतंत्र में क्रियाओं को उचित रूप देने का कार्यभार ऊर्जावान नेतृत्व पर ही रहता है ।ऊर्जावान नेतृत्व की प्रासंगिकता एवं उपादेयता नीति- निर्माण के सकारात्मक क्रियान्वयन में होता है, नेतृत्व वह क्षमता है जिसके माध्यम से लोक में ऊर्जा का संचरण ,प्रसार एवं प्रकाशमान होता है।

 लोकतांत्रिक शासन प्रणाली में ऊर्जावान नेतृत्व की उपादेयता इसमें होती है जो समूह के साथ विचार-विमर्श( लोकतांत्रिक शासन का सार है, अधिकतम सहभागिता एवं लोक- विमर्श की प्रधानता) करके नीतियों का निर्माण एवं क्रियान्वयन करता है। ऐसे ऊर्जावान नेतृत्व की उपादेयता अधिकार तथा निर्णय- निर्माण प्रक्रिया में ‘ विकेंद्रीकरण’ की धारणा का शत-प्रतिशत(100%) क्रियान्वयन है, वर्तमान नेतृत्व में जन- धन के वितरण ,सब्सिडी के वितरण में विकेंद्रीकरण की संकल्पना को सफल सिद्ध कर रही है ,इसलिए बिचौलिए एवं दलालों (कमीशन खोरी ) का विलोपन हो रहा है। विकास की अवधारणा इसी प्रत्यय पर प्रासंगिक होता है कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंच सके। ऊर्जावान नेतृत्व अपने अनुयायियों व कार्यकर्ताओं को सामाजिक इकाई के रूप में कार्य करने में बहुत ही सहयोगी एवं उपापदेई सिद्ध होता है।

वर्तमान ऊर्जावान नेतृत्व की उपादेयता यह है कि जी-20 के लोगोमें “कमल “(भारतीय जनता पार्टी का चुनाव चिन्ह भी है ),इस कठिन समय (कोरोनावायरस के नकारात्मक प्रभाव है कि संसार में गरीबी ,भुखमरी ,बेरोजगारी निजी – क्षेत्र में छटनी के कारण नियोक्ता और कर्मचारियों में हताशा और निराशा का दौर है ,सबसे अधिक हृदय घाट हताशा एवं अवसाद से हुआ है ,रूस – यूक्रेन युद्ध के कारण दुनिया में ध्रुवीकरण ,गुटी कारण एवं परमाणु हथियारों का भय सता रहा है) में आशा का किरण सिद्ध हुआ है। जी-20 की उपादेयता एक नई जिम्मेदारी है ,(लोकतंत्र जिम्मेदारी ,सुशासन एवं पारदर्शिता का योग होता है )और भारत दुनिया के भरोसे (विश्वास )का प्रतीक है। वर्तमान समय में दुनिया बहू धूर्वी परिक्षेत्र में है अर्थात प्रथम दुनिया ,दूसरी दुनिया ,विकसित राष्ट्र – राज्य , विकासशील राष्ट्र- राज्य (नवोदित राष्ट्र- राज्यों का समूह ) बल्कि वैश्विक स्तर पर एक दुनिया की संकल्पना है जिसकी उपादेयता स्वतंत्रता (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता ,सरकार के कार्यों की आलोचना जिससे सुशासन में आस्था एवं विश्वास प्रगट हो सके), समानता( सभी व्यक्ति ईश्वर की सर्वोत्तम रचना है ,इसलिए सभी समान है ,किसी भी व्यक्ति को धर्म ,मूल ,वंश ,जाति एवं संप्रदाय के आधार पर विभेद नहीं किया जा सकता है )एवं बंधुत्व ( सभी व्यक्ति अपने समुदाय में भाई एवं भगनी के रूप में उपापदेई है, अर्थात एक पृथ्वी ,एक परिवार एवं एक भविष्य की संकल्पना)। 

आजादी के “अमृत महोत्सव “के दौरान जी-20 की उपादेयता प्रत्येक व्यक्ति के लिए गर्व है( प्रस्तावना का “हम भारत के लोग” एवं भारत के संविधान का अनुच्छेद 1 “भारत (इंडिया )राज्यों का संघ होगा अर्थात सत्ता का अंतिम स्रोत जनता है)।”

 वर्तमान नेतृत्व की उपादेयता है कि भारत 2022- 23 में आर्थिक विकास की दर 8% से 8.5% होने का अनुमान है। विश्व बैंक(WB),एशियाई विकास बैंक (एडीबी )और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ )के अनुमानों के अनुसार2021- 2024 के दौरान वैश्विक स्तर पर भारत तीव्रगामी अर्थव्यवस्था बना रहेगा (आर्थिक समीक्षा,2022)। प्रधानमंत्री के वैश्विक नेतृत्व में निर्णय – निर्माण भूमिका ,शांति- प्रक्रिया में उपादेयता एवं बड़े – पांच (संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थाई 5 )के समकक्ष उभरता वैश्विक व्यक्तित्व की उपादेयता है कि संयुक्त राष्ट्र संघ ने वर्ष 2023 को” मोटा अनाज वर्ष” के रूप में मनाने का निर्णय लिया है ।मोटे अनाज को वैश्विक स्तर पर लोक/ जन आंदोलन बनाने की आवश्यकता है ।संसार के राज्य( देश) मोटे अनाज( ज्वार, बाजरा एवं रागी) को आयात करेंगे, जिससे वैश्विक स्तर पर भारत की प्रासंगिकता बढ़ेगी।मोटे अनाज पौष्टिकता (ऊर्जा संतुलन )से पूर्ण है एवं जलवायु न्याय के लिए अनुकूल है; क्योंकि इनके द्वारा इससे लाभ होगा। आहार एवं पोषण की दृष्टि से भी मोटे अनाज की उपादेयता है। मोटे अनाज में फोलेट, आयरन प्रोटीन एवं विटामिन की मात्रा अधिक अधिक मात्रा में पाई जाती है ।भारत समकालीन समय में डायबिटिक का हब (शुगर का हब)कहा जा रहा है, जो वंशानुगत एवं जीवन – चर्या (दिनचर्या ,तैलीय भोजन की अधिक ,पेय पदार्थों की अधिकता, अवसाद एवं कुंठा के कारण) जनित बीमारी हो चुकी है। इस दृष्टि से मोटे अनाज की उपादेयता बढ़ रही है (स्वास्थ्य मंत्रालय का प्रतिवेदन योजना पत्रिका).

 भारत बाजरा का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य (देश) है ।इसकी उपादेयता इन तथ्यों से प्रमाणित होती है कि मोटा अनाज डायबिटीज( शुगर )वाले मरीजों को फायदेमंद है, ह्रदय रोगी के लिए भी फायदेमंद है ,हड्डियों को मजबूती देता है एवं प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करता है।

हरित क्रांति के द्वारा भारत खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर हुआ था; लेकिन इस दौरान रासायनिक खादों का अत्यधिक प्रयोग करने के कारण इन क्षेत्रों में गंभीर बीमारियां (कैंसर, शुगर व ब्लड प्रेशर) का प्रसार कर चुकी है। पंजाब एवं हरियाणा का अधिकांश भाग कैंसर की चपेट में आ चुका है ,पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कैंसर( लिमकोमा),थायराइड व गुर्दे की असफलता का प्रसार हो रहा है।( एसजीपीजीआई एवं बीएचयू हॉस्पिटल)। मोटा अनाज में अमीनो एसिड प्रोफाइल (प्रोटीन व लाइसिन )की कमी को पूरा करता है, जिससे दिनचर्या संबंधी बीमारियों एवं प्रतिरक्षा तंत्र संबंधित बीमारियों के रोकथाम के लिए प्रभावशाली सिद्ध होता है ।3A महाद्वीप (एशिया ,अफ्रीका एवं अमेरिका (लैटिन) के देशों में 60 करोड़ व्यक्तियों ने अपने आहार में मोटे अनाज को प्रयोग कर रहे हैं ।(FAOका प्रतिवेदन ,अक्टूबर, 2022)

(लेखक राजनीतिक विश्लेषक हैं) 

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