हमारी उम्र के लोगों का भारत के अधिकांश शहरों में बचपन टाट- पट्टी वाले स्कूलों से शुरू हुआ है , पर अपन तो इतने भाग्यशाली नहीं थे , पांचवीं तक किसी स्कूल की शक्ल नहीं देखी थी , बस घर पर हमें पढ़ाने के लिए एक मास्टरजी आते थे, उनकी हिंदी ठीक ठाक थी अंग्रेजी कामचलाऊ और मैथ में हाथ काफ़ी तंग था बस इसी बुनियाद पर अपनी पढ़ाई की कच्ची पक्की इमारत खड़ी हुई , छठी कक्षा से स्कूल की शुरुआत करने से कुछ ऐसी कमज़ोरियां रह गईं  जो आख़िर तक हैरान और परेशान करती रहीं. हमारे स्कूल में क्लास रूम कम थे इसलिए कुछ पीरियड में हमें टाट पट्टी पर बैठना होता था . यहाँ  अंग्रेज़ी सीखने में जो पहली मददगार चीज़  साबित हुई वो थी ऑक्सफ़ोर्ड डिक्शनरी. और हमारे स्कूल की लाइब्रेरी में ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस की जो किताबें थीं उनमें विषय को बेहतरीन तरीके से समझाया जाता था, वहीं से उत्सुकता पैदा हुई कि जो  यूनिवर्सिटी है पुस्तक प्रकाशन में बेंचमार्क स्थापित किए हुए है  आख़िर वो पढ़ाई लिखाई में अन्य की तुलना में कितनी आगे होगी. तभी एक सपना देखा था कि हम भी एक दिन ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी देखेंगे .

ऑक्सफ़ोर्ड एक हज़ार वर्षों से लगातार दुनिया का सबसे जाना माना विद्या-केंद्र रहा है. और भारत से यहाँ आ कर पढ़ने आने वालों की भी एक गौरवशाली परंपरा है  . राजनीति, अर्थशास्त्र , साहित्य और ललित कलाओं में निष्णात शख्सियतों में से अनेक यहीं से पढ़ कर निकली हैं . भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (समरविले कॉलेज); पूर्व प्रधानमंत्री और 1991 में भारत के आर्थिक सुधारों के सूत्रधार डॉ. मनमोहन सिंह (नफ़िल्ड कॉलेज,); भारत की पहली महिला वकील और ऑक्सफोर्ड में कानून की पढ़ाई करने वाली पहली महिला कॉर्नेलिया सोराबजी (समरविले कॉलेज,); 'ए सूटेबल बॉय' के लेखक विक्रम सेठ (कॉर्पस क्रिस्टी कॉलेज,); उपन्यासकार अमिताव घोष; भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान मंसूर अली खान पटौदी (बेलियोल कॉलेज); और पुलित्जर पुरस्कार विजेता लेखक और ऑन्कोलॉजिस्ट सिद्धार्थ मुखर्जी (मैग्डलेन कॉलेज), पत्रकार और लेखक वीर सांघवी, थिएटर और फ़िल्म में नाम कमाने वाले गिरिश करनाड - सूची बहुत लंबी हो जाएगी.

इस यूनिवर्सिटी के पढ़े हुए 69 लोगों को नोबेल पुरस्कार मिल चुका है . 800 से अधिक वर्षों से यह वैज्ञानिक अनुसंधान में दुनिया का अग्रणी केंद्र रहा है, इनमें से कई खोजों ने हमारे जीने के तरीके को बदल कर रख दिया है. स्टीफन हॉकिंग जैसी महान हस्तियां इसके छात्रों में शामिल रही हैं, इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि दुनिया के लगभग सभी सबसे महत्वाकांक्षी और प्रतिभाशाली व्यक्ति इस प्रतिष्ठित संस्थान में जगह पाने का सपना देखते हैं.ऑक्सफोर्ड में  पेनिसिलिन, एंटीबॉडी के  काम करने के तरीके  , बिना सुई वाले इंजेक्शन , मतदान के रुझान , मौसम के सटीक  पूर्वानुमान जैसी कितनी ही जीवन को बदल देने वाली शोध हो चुकी हैं . www(वर्ल्ड वाइड वेब)के जनक में से एक टिमोथी बर्नर्स ली भी ऑक्सफ़ोर्ड के ही हैं.



कल ही ऑक्सफ़ोर्ड देखने की इच्छा पूरी हुई . लंदन के पैडिंग्टन ट्रेन टर्मिनल से फ़ास्ट ट्रेन लेकर हम एक घंटे में ही ऑक्सफ़ोर्ड पहुंच गए. वहाँ एक पूरा दिन बिता कर हमें लगा कि यह यूनिवर्सिटी हमारे सोच से कहीं भव्य, कहीं बेहतर है . देखा जाए तो ऑक्सफ़ोर्ड शहर यूनिवर्सिटी का ही विस्तार है , रेलवे स्टेशन से निकलते ही सेड बिज़नेस स्कूल है , इसका भवन भी काफ़ी बड़ा है . बस से शहर में घूमना बहुत आसान है क्योंकि किसी  भी स्टॉप पर एक दो मिनट से ज़्यादा बस की प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ती है , लेकिन किसी शहर का  अंदाज़ और मिज़ाज समझने के लिए वहाँ के लोगों की जीवन शैली को समझना पड़ेगा , इसलिए हमने पूरा शहर पैदल ही नापना पसंद किया. शुरुआत ऑक्सफ़ोर्ड कैसल से की , यहाँ लगभग नौ सौ वर्ष तक जेल रही थी , लगता है जब अधिकारियों को लगा अपराध नहीं हो रहे हैं तो इस जेल को एक  एंटरप्रेन्योर को दे दिया, उसने इसे जेल  थीम होटल में बदल दिया है . कमरों को जेल बैरक जैसा ही रखा है बस उन्हें आधुनिक कम्फर्ट से लैस कर दिया है . बस यहीं से आगे शहर की हाई स्ट्रीट शुरू हो जाती है जो अर्ध चन्द्राकार है और हाई स्ट्रीट से बायीं ओर खुलने वाली हर गली यूनिवर्सिटी के किसी कॉलेज, लाइब्रेरी या फिर संस्थान की ओर मुड़ जाती है .

यूनिवर्सिटी की बात करने से पहले हाई स्ट्रीट के बारे में भी ज़िक्र जरूरी है क्योंकि यह भी शिक्षा की समृद्ध विरासत की गवाह रही है . कई शताब्दी से चल रहे पब यहाँ की संस्कृति का हिस्सा रहे हैं , अध्यापक हों या विद्यार्थी , उनके लिए ये पब कोई वर्जित फल नहीं है , ये कड़ी पढ़ाई के बाद अनौपचारिक चर्चा और तनाव मुक्त होने की शरण स्थली से  कम नहीं   हैं . हाई स्ट्रीट के कैफेटेरिया भी काफ़ी पुराने हैं  यहाँ के स्टाफ का व्यवहार भी दोस्ताना क़िस्म का रहता है . रही बात खाने पीने की , तो यहाँ  दुनिया के हर हिस्से के भोजन सर्व करने वाले रेस्टोरेंट मिल जायेंगे .Antep Kitchen मेडिटेरेनियन खाने के लिए मशहूर है , जिन्हें श्रीलंका का भोजन  पसंद है उनके लिए The Coconut Tree है,  यहाँ एशियाई कस्टमर ज़्यादा दिखते हैं .BBuona Pinsa इटालियन डेलिकेसी के लिए मशहूर है , Pierre Victoire का फ़्रेंच खाना शानदार है , Lula’s Ethiopian and Eritrean  इथियोपियाई रेस्टोरेंट है लेकिन इसमें शाकाहारी विकल्प काफ़ी हैं . थाई रेस्टोरेंट भी यहाँ खासे लोकप्रिय हैं इनमें Sasi Thai , The White Horse Inn शीर्ष पर आते है . देसी  और ख़ास तौर पर बम्बइया किस्म के खाने के लिए यहाँ लंदन के रेस्टोरेंट Dishoom की शाखा है,  साथ ही Tribe और Namaste  Village भी भारतीय खाने के लिए लोकप्रिय हैं . आज के दौर में जहाँ लोग रेडीमेड ही पहनते हैं यहाँ टेलरिंग  की कई दुकानें हैं , इनमें एक  And Ravencraft  है जो सोलहवीं शताब्दी से चल रही है. यह सब जिक्र इसलिए कर रहा हूँ कि इस हाई स्ट्रीट के मुख्य ग्राहक ऑक्सफ़ोर्ड के  विद्यार्थी , शिक्षक और स्टाफ के सदस्य ही हैं . इन दुकानों और रेस्टोरेंट में विद्यार्थी ही काम करते दिखते हैं जो यहां पढ़ते हुए पार्ट टाइम करते हुए अपनी फीस और जेब खर्च का बड़ा हिस्सा कमा लेते हैं.

अब बारी थी सैंट मेरी चर्च जाने की जहाँ से इस शहर में शिक्षा की बुनियाद रखी गई. यह चर्च लगभग एक हज़ार साल से मौजूद है , इसकी  आंतरिक संरचना में समय समय पर बदलाव हुए हैं कहते हैं  शुरुआती दौर में संभवत: बीस पच्चीस विद्यार्थियों से पढ़ने पढ़ाने का सिलसिला शुरू हुआ जो विस्तार होते होते अड़तीस कालेजों, लाइब्रेरियों, म्यूजियम ,प्रिंटिंग प्रेस के एक विशाल परिसर में बदल गया . इस चर्च में यूनिवर्सिटी के कन्वोकेशन और बहुत सी महत्वपूर्ण बैठकें भी समय समय पर होती हैं . यहीं हमें जॉन मिले जो लंदन में अपनी नौकरी छोड़ कर अब इस चर्च की सेवा में लगे हुए हैं . यह जान कर कि हम भारतीय हैं उन्होंने एक बहुत रोचक जानकारी दी . उन्होंने बताया कि एक बार इस चर्च में भारत को स्वायत्तता देने के विषय में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी जिसमें तत्कालीन ब्रिटिश हुकूमत के प्रतिनिधियों के साथ भारत का पक्ष रखने के लिए  भारतीय नेता भी आमंत्रित किए गए थे उनमें  से एक महात्मा गांधी भी थे . चर्च के अधिकारी गांधी जी की शख़्सियत से इतना प्रभावित हुए कि उनकी प्लेक चर्च में ईसाई संतों के साथ लगा दी  , जॉन हमें  सीढ़ी से ऊपर ले गए जहाँ उन्होंने छत में लगी हुई गांधी जी प्लेक दिखाई .

जॉन हमारे साथ काफ़ी समय बने रहे, उनसे हमें यूनिवर्सिटी से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां मिली.  हमने जब जॉन से जानना चाहा  आख़िर वो क्या बात है जो इस यूनिवर्सिटी को ख़ास बनाती  है , उन्होंने बताया कि यहाँ  की विशिष्ट कॉलेजीय (Collegiate) व्यवस्था उसे दुनिया की दूसरी यूनिवर्सिटी और शिक्षण संस्थानों से अलग पहचान देती है. इसकी स्वायत्त संरचना में 36 स्वतंत्र कॉलेज और तीन सोसाइटी शामिल हैं. ये सब  अपनी अपनी विशिष्ट शैक्षणिक संस्कृति और परंपरा के साथ एक ऐसे शैक्षिक परिवेश का निर्माण करते हैं , जहाँ अलग-अलग अकादमिक समुदाय एक व्यापक बौद्धिक ढाँचे के भीतर विकसित और समृद्ध होते हैं.

इस यूनिवर्सिटी की पहचान मूलतः शैक्षणिक उत्कृष्टता और बौद्धिक विशिष्टता के प्रति उसकी अटूट प्रतिबद्धता पर आधारित है ,  जिसे  स्टीफन हॉकिंग, मार्गरेट थैचर और ऑस्कर वाइल्ड जैसी तमाम हस्तियों ने उन विचारों को आकार दिया जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों के सोच की दिशा ही बदल दी।

विश्वविद्यालय के 36  कॉलेज में  से क्राइस्ट चर्च, बैलिओल, मैग्डलेन, सेंट जॉन्स और मर्टन की गणना टॉप श्रेणी  में होती है .

लेकिन यह भी सच है कि ऑक्सफोर्ड की  प्रतिष्ठा केवल विद्वानों, लेखकों और विश्व नेताओं को तैयार करने तक ही सीमित नहीं है; यह अकादमिक उत्कृष्टता, ऐतिहासिक प्रभाव  हर  कॉलेज-समुदाय के अपने विशिष्ट  चरित्र के कारण भी है . इनमें से कई कॉलेज निरंतर पाँच सौ वर्षों से चल रहे हैं .

दुनिया के दूसरे शिक्षण संस्थानों की तुलना में , ऑक्सफ़ोर्ड में शिक्षा का स्वरूप अत्यंत व्यक्तिगत और सहभागितापूर्ण है. जॉन बताते हैं कि यहाँ छात्र केवल सीखने वाले नहीं होते, बल्कि विद्वतापूर्ण विमर्श और नया खोजने की प्रक्रिया के सक्रिय सहभागी होते हैं .  कॉलेजीय व्यवस्था यह सुनिश्चित करती है कि प्रत्येक छात्र को व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त हो. छोटे-छोटे ट्यूटोरियल समूहों में अध्ययन और विश्व के अग्रणी शिक्षाविदों के साथ प्रत्यक्ष संवाद के माध्यम से छात्रों को सीखने का अवसर मिलता है. यहाँ के  शिक्षाविद अक्सर अपने-अपने क्षेत्रों में अग्रणी और अभिनव शोध कार्यों का नेतृत्व कर रहे होते हैं.

अपने मूल स्वरूप में ऑक्सफ़ोर्ड की पहचान केवल शिक्षा प्रदान करने तक सीमित नहीं है. इसकी समृद्ध परंपराएँ और शोध के प्रति गहरी प्रतिबद्धता ऐसा वातावरण निर्मित करती हैं, जो बौद्धिक जिज्ञासा और व्यक्तिगत विकास को निरंतर प्रोत्साहित करता है. यहाँ छात्रों को स्थापित धारणाओं और ज्ञान को चुनौती देने, आलोचनात्मक चिंतन विकसित करने तथा वैश्विक शैक्षणिक विमर्श में सार्थक योगदान देने के लिए प्रेरित किया जाता है. संभवत: इसी दृष्टिकोण ने अनेक नोबेल पुरस्कार विजेताओं, अग्रणी शोधकर्ताओं और विविध क्षेत्रों के प्रभावशाली नेताओं को जन्म दिया है. ऑक्सफ़ोर्ड की पहचान उसकी समृद्ध ऐतिहासिक विरासत के साथ ही  भविष्य-दृष्टि के साथ सामंजस्य बिठाने से भी निर्मित होती है क्योंकि यहाँ सदियों पुरानी परंपराओं और अत्याधुनिक शोध को सहज रूप से एक साथ जोड़ने की रवायत है, जिससे ऐसा अनूठा वातावरण बनता है जहाँ ऐतिहासिक विद्वतापूर्ण परंपराएँ और नवीन अकादमिक अनुसंधान साथ-साथ फलते-फूलते हैं.

बेशक मुझे ऑक्सफ़ोर्ड में पढ़ने का अवसर न मिला हो लेकिन यहाँ कुछ समय बिता कर यह तो पता चला कि शिक्षा में उत्कृष्टता केवल विशाल भवनों और संसाधनों से नहीं आती उसके लिए अपनी श्रेष्ठता की सीमाएं साल दर साल पुनर्परिभाषित करने और नए मानक तय करने से ही आती है.

हमारे मित्र पद्मेश गुप्त पिछले पच्चीस वर्षों से ऑक्सफ़ोर्ड में रह रहे हैं , हमारी इस यात्रा के बीच हमारा लंच उनके सौजन्य से नमस्ते विलेज रेस्टोरेंट में हुआ , उन्होंने एक और रोचक जानकारी साझा की  यहाँ पर एक और यूनिवर्सिटी भी है , ऑक्सफ़ोर्ड ब्रूक्स जिसमें पचास हज़ार से अधिक छात्र छात्राएं पढ़ रहे हैं .

इस  यूनिवर्सिटी का मनोरंजन की दुनिया से भी काफ़ी निकट का रिश्ता रहा है . यहाँ पढ़े हुए कई छात्र हॉलीवुड के नामचीन कलाकार हुए हैं . हॉलीवुड के सबसे लोकप्रिय रोमांटिक अभिनेताओं में गिने जाने वाले ह्यू ग्रांट ने न्यू कॉलेज, ऑक्सफ़ोर्ड से अंग्रेज़ी साहित्य की पढ़ाई की है . बाद में उन्होंने Four Weddings and a Funeral, Notting Hill, Love Actually और Wonka जैसी सफल फिल्मों में अभिनय किया है . अन्य नामचीन कलाकारों में केट बेकिन्सेल ने न्यू कॉलेज से फ्रेंच और रूसी साहित्य का अध्ययन किया, Pearl Harbor, Underworld, Van Helsing और The Aviatorजैसी फिल्मों में काम किया है . रोसमुण्ड पाइक (वाधम कॉलेज),रिज अहमद (क्राइस्ट चर्च कॉलेज),फ़ेलीसिटी जोन (वाधम कॉलेज ), एमिलिया फॉक्स (सेंट कैथरीन कॉलेज) , मिस्टर बीन्स के नाम से मशहूर रोव। एटकिंस भी यहीं पढ़े हैं.

यूनिवर्सिटी के भिन्न भिन्न कालेज में बहुत सारी फ़िल्मों की शूटिंग हो चुकी है . क्राइस्ट चर्च कॉलेज का भव्य डाइनिंग हॉल इतना प्रसिद्ध है कि उसी से प्रेरणा लेकर हैरी पॉटर फिल्मों में हॉगवर्ट्स के ग्रेट हॉल का डिज़ाइन तैयार किया गया. वहीं बॉडलियन लाइब्रेरीके डिविनिटी स्कूल को फिल्मों में हॉगवर्ट्स इंफर्मरी (अस्पताल) के रूप में इस्तेमाल किया गया. हैरी पॉटर फ़िल्मों के दीवाने इन शूटिंग स्पॉट्स को आज ये दोनों स्थान दुनिया भर से आने वाले हैरी पॉटर प्रेमियों  के लिए प्रमुख आकर्षण केंद्र बने हुए हैं. The theory of everything प्रसिद्ध वैज्ञानिक स्टीफ़न हॉकिंग के जीवन पर बनी थी इसमें सेंट कैथरीन कॉलेज और ऑक्सफ़ोर्ड की काफ़ी सारी  लोकेशन  इस्तेमाल की गई हैं . The Golden Compass, 2007  की शूटिंग एक्सेटर कॉलेज और रैडक्लिफ स्क्वायर में हुई थी.

X-Men: First Class, 2011  के कई  दृश्य ऑक्सफ़ोर्ड की सड़कों और विश्वविद्यालय परिसर में फिल्माए गए हैं .

ऑक्सफ़ोर्ड का एक दिन का प्रवास एक महान संस्था को समझने की एक छोटी सी कोशिश रही , जब वापस पैडिंगटन की ट्रेन में बैठा था तो एक विचार आया कि किसी देश को राष्ट्र बनाने के लिए नारों और झंडे लहराने से कहीं ज़्यादा अच्छे शैक्षणिक संस्थानों की ज़रूरत होती है.

(लेखक स्टेटै बैंक के सेवा निवृत्त अधिकारी हैं और इन दिनों  लंदन की यात्रा पर हैं)