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किसे मिलेंगे एलआईसी के शेअर

एलआईसी के आईपीओ का इंतजार खत्म हो गया है। एलआईसी ने सेबी के पास ड्राफ्ट जमा कर दिया है। सरकार आईपीओ के जरिए एलआईसी में करीब 5 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी कर रही है। एलआईसी का यह आईपीओ भारत के इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ होगा। सरकार द्वारा इस आईपीओ से 66,000 करोड़ रुपये जुटाने का अनुमान है।

ड्राफ्ट के मुताबिक सरकार 6.32 अरब शेयरों में से करीब 31.6 करोड़ इक्विटी शेयर बेचेगी। इसकी फेस वैल्यू 10 रुपये है। इस ओएफएस आईपीओ के जरिए जितना भी पैसा जुटाया जाएगा, वह सारा एलआईसी के बजाय सरकार के खजाने में जाएगा। ना कि, क्योंकि कंपनी की तरफ से कोई नया शेयर जारी नहीं किया जा रहा है।

आईपीओ से सरकार को विनिवेश के संशोधित लक्ष्य 78 हजार करोड़ रुपये को हासिल करने में मदद मिलेगी। पहले यह लक्ष्य 1.75 लाख करोड़ रुपये था। अभी तक सरकार विनिवेश के जरिए करीब 12 हजार करोड़ रुपये जुटा चुकी है। मौजूदा समय में एलआईसी में सरकार की 100 फीसदी हिस्सेदारी है, लेकिन इस आईपीओ के बाद सरकार के पास 95 फीसदी हिस्सेदारी बचेगी।

आईपीओ में 50 फीसदी शेयर क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए आरक्षित हैं। करीब 15 फीसदी शेयर गैर-संस्थागत निवेशकों के लिए आरक्षित रहेंगे। रिटेल निवेशकों के लिए 35 फीसदी शेयर आरक्षित रहेंगे। एलआईसी के कर्मचारियों और पॉलिसीहोल्डर्स के लिए भी इस आईपीओ में कुछ शेयर आरक्षित रहेंगे।

रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार एलआईसी आईपीओ का एक हिस्सा पॉलिसीधारकों के लिए रखने की योजना बना रही है। पॉलिसीधारकों को आईपीओ में डिस्काउंट भी मिल सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार एलआईसी पॉलिसीधारकों को 5 फीसद डिस्काउंट दे सकती है। देश में एलआईसी के लाखों पॉलिसीधारक है और उस तरह उनके पास डिस्काउंट में एलआईसी के शेयर पाने का मौका हो सकता है। इसके पीछे एक वजह यह भी है कि सरकार बड़ी संख्या में रिटेल इन्वेस्टर्स को आकर्षित करना चाहती है।

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