पहली नज़र में अनामिका किसी स्कूल जाने वाली किशोरी जैसी दिखाई देती हैं, लेकिन सर जे . जे . स्कूल ऑफ आर्ट से निकल कर वे कला-जगत में अपनी एक अलग पहचान बनाने के लिए तैयार हैं। इसका एहसास मुझे कल उनकी एकल प्रदर्शनी “Textures of Resilience” देख कर हुआ।

यह प्रदर्शनी मुंबई के व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्र फोर्ट स्थित मंडपों कला दीर्घा में शुरू हुई है।

इस कला दीर्घा के संचालक सुजीत पोद्दार अपने इस प्रकल्प को एक “वैकल्पिक कला स्पेस” मानते हैं। उनकी कोशिश है कि मंडपों नए और प्रतिभाशाली कलाकारों को अपनी अभिव्यक्ति के लिए एक सार्थक मंच प्रदान करे।

अनामिका बताती हैं कि इस प्रदर्शनी की परिकल्पना उनके बचपन की उन सहज और मासूम स्मृतियों से उपजी, जब खुशियाँ हाथ में थामे किसी रंगीन बैलून जितनी हल्की और सरल लगती थीं। समय के साथ उन्हें महसूस हुआ कि यही बैलून स्त्री की भावनाओं, उसके दुख, उसकी संवेदनाओं और उसके संघर्षों का एक सशक्त प्रतीक बन सकता है।

सिरेमिक, फाइबर ग्लास , प्लाईवुड, मेटल और पेपर मेशे जैसे विभिन्न माध्यमों का उपयोग करते हुए उन्होंने स्त्री-अनुभवों को बैलून की आकृतियों में बेहद संवेदनशील ढंग से रूपायित किया है। उनकी कृतियाँ केवल दृश्य संरचनाएँ नहीं, बल्कि भावनात्मक संवाद भी रचती हैं।

एक स्त्री ही स्त्री के सुख-दुख, उसकी पीड़ा और उसकी आंतरिक शक्ति को जिस गहराई से समझ सकती है, उसका प्रभाव उनकी कलाकृतियों में स्पष्ट दिखाई देता है।

विशेष रूप से एक कृति ध्यान खींचती है, जिसमें एक महिला और उसके शिशु के बीच गर्भनाल के अदृश्य लेकिन गहरे रिश्ते को बेहद मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। उनकी संरचनाओं में एक ऐसा भावात्मक स्पेस निर्मित होता है, जहाँ स्मृतियाँ, संवेदनाएँ और स्त्री का सम्पूर्ण आंतरिक संसार आकार ग्रहण करता दिखाई देता है।

यह प्रदर्शनी अगले एक सप्ताह तक जारी रहेगी।
“Textures of Resilience” कला प्रदर्शनी
Mandapo Art Space
फोर्ट, मुंबई

(लेखक सेवा निवृत्त बैंक अधिकारी हैं और कला, संस्कृति, सिनेमा,संगीत आदि विषयों पर लिखते हैं)