Saturday, June 15, 2024
spot_img
Homeअध्यात्म गंगा...और छज्जू भाटिया वहीं ध्यान करने बैठ गए

…और छज्जू भाटिया वहीं ध्यान करने बैठ गए

लाहौर में एक चौबारा था। उसका नाम था ‘छज्जू का चौबारा’। पंजाबी जीवन शैली में लोकोक्ति चर्चित है-‘जो सुख छज्जू दे चौबारे, न बलख न बुखारे’ अर्थात छज्जू के चौबारे का सुख के आगे बल्क व बुखारे का सुख भी फीका पड़ जाता है। छज्जू भगत का असली नाम छज्जू भाटिया था। वे लाहौर के रहने वाले थे। मुगल बादशाह जहांगीर के समय वे सोने का व्यापार किया करते थे। 1640 में उनके निधन के बाद उनके अनुयायियों ने लाहौर के पुरानी अनारकली स्थिति डेरे में उनकी समाधि बना दी। इसके बाद जब भंग मिसल के सरदारों का वक्त आया तो उनकी दुकान और विशाल डेरे की जगह पर मंदिर व धर्मशाला बनवाई गई। इस समग्र निर्माण को नाम मिला छज्जू का चौबारा।

महाराजा रणजीत सिंह ने अपने शासन काल में यहां पर यात्रियों के लिए नए कमरे, तालाब और सुंदर बागीचे बनवाकर उसकी शोभा में चार चांद लगा दिए। छज्जू भगत की कहानी भी बेमिसाल है। वे व्यापारी थे। उनका व्यापार में मन अधिक नहीं लगता था। वैराग्य प्रवृति के थे। एक दिन गली में से जा रहे थे। मेहतर गली साफ़ करती हुई चलने वालों से कह रही थी “एक तरफ़ हो जाओ!” उसका कहना ठीक था। अन्यथा कूड़े में पैर पड़ जायेगा। उसकी बात सुनकर छज्जू को आत्मबोध हुआ। एक वैराग्यवान के लिए व्यापार और ईश्वर भक्ति एक साथ नहीं चल सकती। उसने अपना कारोबार बेटों को सौपा और चौबारे पर बैठकर भक्ति करने लग गया। दूर दूर से लोग उसके सत्संग में आने लगे। उसका चौबारा पूरे लाहौर में प्रसिद्द हो गया। इसका मुख्य कारण एक ही था। छज्जू सांसारिक मोह त्याग कर एक तरफ़ हो गया था। सांसारिक मोह के चक्कर में फँस कर वह अपनी आत्मा के साथ न्याय नहीं कर पा रहा था।

आज भी छज्जू के यह जीवन सन्देश हम आर्यों के लिए उतना ही महत्वपूर्ण हैं। जितना उस काल में था।

image_print

एक निवेदन

ये साईट भारतीय जीवन मूल्यों और संस्कृति को समर्पित है। हिंदी के विद्वान लेखक अपने शोधपूर्ण लेखों से इसे समृध्द करते हैं। जिन विषयों पर देश का मैन लाईन मीडिया मौन रहता है, हम उन मुद्दों को देश के सामने लाते हैं। इस साईट के संचालन में हमारा कोई आर्थिक व कारोबारी आधार नहीं है। ये साईट भारतीयता की सोच रखने वाले स्नेही जनों के सहयोग से चल रही है। यदि आप अपनी ओर से कोई सहयोग देना चाहें तो आपका स्वागत है। आपका छोटा सा सहयोग भी हमें इस साईट को और समृध्द करने और भारतीय जीवन मूल्यों को प्रचारित-प्रसारित करने के लिए प्रेरित करेगा।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -spot_img

लोकप्रिय

उपभोक्ता मंच

- Advertisment -

वार त्यौहार