आप यहाँ है :

एक प्रणाली में बाइनरी सुपर मैसिव ब्लैक होल खोजा गया

खगोलविदों के एक अंतरराष्ट्रीय कोलैबरेशन ने एक प्रणाली में एक बाइनरी सुपर मैसिव ब्लैक होल की खोज की है, जो भविष्य में गुरुत्वाकर्षण तरंगों (जीडब्ल्यू) का पता लगाने के लिए एक मजबूत कैंडिडेट होगा।

ब्लेज़र जो सुपरमैसिव ब्लैक होल (एसएमबीएच) हैं, ये अत्यधिक दूर की आकाशगंगा के केंद्र में गैसों का भरण करते हैं और ब्रह्मांड में सबसे चमकदार तथा ऊर्जावान वस्तुओं में से एक हैं। जब ब्लैक होल आयनित पदार्थ से बना होता है और लगभग प्रकाश की गति से यात्रा करता है तथा एक प्रेक्षक की तरह कार्य करता है, तो उसे ब्लेज़र कहा जाता है। ब्लेज़र एओ 0235+164 विशिष्ट है, क्योंकि यह मध्यवर्ती आकाशगंगाओं द्वारा गुरुत्वाकर्षण रूप से लेंस किया गया है (वह घटना जिसके द्वारा दूर से चमकने वाला प्रकाश अपने स्रोत और प्रेक्षक के बीच किसी वस्तु के गुरुत्वाकर्षण द्वारा मुड़ा तथा खींचा जाता है)।

अर्जेंटीना, स्पेन, इटली, अमरीका और भारत के खगोलविदों के एक समूह ने पिछले 4 दशकों (1982-2019) के दौरान दुनिया भर में किए गए व्यापक ऑप्टिकल फोटोमेट्रिक अवलोकनों का उपयोग करके गुरुत्वाकर्षण लेंस वाले ब्लेज़र एओ 0235+164 में एक बाइनरी सुपर विशाल ब्लैक होल सिस्टम की खोज की है। उन्होंने लगभग 8 वर्षों के अंतराल पर पीरीऑडिक डबल-पीक फ्लेयरिंग घटनाओं को ढूंढा है और इन फ्लेर की दो घटनाओं के बीच की दूरी लगभग 2 वर्ष है। ऐसे पांच पीरीऑडिक पैटर्न का पता चला था और यह भविष्यवाणी की गई थी कि इस तरह की अगली रोशनी से जगमगाने की घटना नवंबर 2022 तथा मई 2025 के बीच होगी। अगले पीरीऑडिक पैटर्न की पुष्टि करने के लिए डब्ल्यूईबीटी (होल अर्थ ब्लेज़र टेलीस्कोप) कंसोर्टियम के तहत एक वैश्विक ऑप्टिकल फोटोमेट्रिक निगरानी अभियान शुरू किया गया है। निरीक्षण अभियान का नेतृत्व डॉ. आलोक सी. गुप्ता करेंगे।

भारत सरकार के एक स्वायत्त संस्थान विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के अंतर्गत आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज (एआरआईईएस), नैनीताल के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आलोक सी गुप्ता ने इस अध्ययन में भाग लिया है और यह अध्ययन हाल ही में रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी (एमएनआरएएस) की मासिक नोटिस पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन का नेतृत्व मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (टीआईएफआर) में उच्च ऊर्जा भौतिकी विभाग (डीएचईपी) के पीएचडी छात्र श्री अभ्रदीप रॉय ने किया। भारतीय टीम के अन्य सदस्यों में टीआईएफआर, मुंबई के प्रोफेसर वी.आर. चिटनिस, डॉ. अंशु चटर्जी और डॉ. अर्कदिप्त सरकार शामिल हैं।

टीम ने समय सीमा के दौरान जनवरी 1982 – अक्टूबर 1984, मार्च 1989 – जुलाई 1993, अप्रैल 1996 – मार्च 2001, जून 2006 – जून 2009 और मई 2014 – मई 2017 के बीच डबल-पीक फ्लेयरिंग गतिविधियों के पांच सेटों का पता लगाया था।

वे उम्मीद करते हैं कि अगले 2 साल के लंबे समय तक चलने वाली फ्लैरिंग घटना नवंबर 2022 और मई 2025 के बीच होगी। एओ 0235+164 में इस स्पष्ट नियरली-पीरियाडिक ऑस्कलेशन (क्यूपीओ) की दृढ़ता का परीक्षण करने के लिए इस अवधि के दौरान एक गहन बहु-तरंग दैर्ध्य डब्लूईबीटी कैंपेन आयोजित किया जाएगा।

ब्लेज़र एओ 0235+164 पहली बाइनरी एसएमबीएच गुरुत्वाकर्षण लेंस प्रणाली है, जो पल्सर टाइमिंग एरे और भविष्य के अंतरिक्ष-आधारित जीडब्ल्‍यू डिटेक्टरों का उपयोग करके गुरुत्वाकर्षण तरंगों (जीडब्ल्‍यू) के भविष्य का पता लगाने के लिए अपनी तरह का एक मजबूत उम्मीदवार होगा। प्रकाशन लिंक: https://academic.oup.com/mnras/article/513/4/5238/6583302

अधिक जानकारी के लिए डॉ. आलोक चंद्र गुप्ता (वैज्ञानिक-एफ) (+91-7895966668, alok[at]aries.res.in) से संपर्क किया जा सकता है।

image_pdfimage_print


Get in Touch

Back to Top