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जोड़ी परंपरा वाली भाजपा

भाजपा आज अपना स्थापना दिवस मना रही है. 1980 में जनसंघ से अगल होकर बनी ये पार्टी आज दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी होने का दावा करती है. मौजूदा समय में बहुत हद तक भाजपा का ये दावा सही भी साबित होता है. लेकिन भाजपा की शुरूआत इतनी भव्य नही रही थी. किसी ने भी ये नहीं सोचा था कि भाजपा एक दिन इस मुकाम तक पहुंच सकेगी. 1984 में पहली बार चुनाव लड़ने के दौरान भाजपा को मात्र दो लोकसभा सीटें मिली थी. उस समय लोकसभा में भाजपा का जबकर मजाक बनाया गया था. लेकिन इसके बाद भी भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने कभी हार नहीं मानी. 1998 में भाजपा ने 182 सीटें जीतकर कांग्रेस को ये दिखा दिया था कि अब देश में कमल खिल चुका है और देश की जनता के पास केंद्र में हमेशा एक विकल्प होगा. इसके बाद से भाजपा ने कुछ उतार -चढ़ाव तो जरूर देखे लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ कि भाजपा केंद्र की राजनीतिक से पूरी तरह बाहर हुई हो।

भाजपा के बारे में सबसे बड़ी बात ये रही कि देश में किसी भी तरह के हालात क्यों ना रहे हों अपनी छवि पर आंच नहीं आने दी. जनसंघ से भाजपा का उदय ही रामजन्म भूमि और हिंदुत्व के मुद्दे पर हुआ था. आज भाजपा को बने 41 वर्ष हो गये हैं लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ है कि पार्टी अपने एजेंडे से भटकी हो. हाल के दिनों में देखा गया है कि कई राजनीतिक पार्टियों ने समय की नजाकत को समझते हुए अपनी छवि की भी परवाह नहीं की है. लेकिन इस मामले में BJP को पूरे नंबर मिलते हैं. हालांकि अब रामजन्म भूमि पर कोर्ट का फैसला आ गया है लेकिन इसके बाद भी BJP ने इस एक मुद्दे पर 41 सालों तक राजनीति की है.

जोड़ी में काम करती आई है भाजपा

हाल के दिनों में अमित शाह और नरेंद्र मोदी की जोड़ी की काफी तारीफ होती है. विरोधी अक्सर कहते हैं कि ये दो लोगों की पार्टी है. BJP में शुरु से ही दो लोगों की जो़डी़ देखने को मिली है. पार्टी के स्थापना के बाद भी अटल-आडवाणी पर ऐसे ही आरोप लगता रहै हैं. उस समय भी ये कहा जाता था कि BJP दो लोगों की पार्टी है. कई बार ऐसा भी सुनने को मिलता था कि अटल-आडवाणी के बाच किसी बात को लेकर अबबन हो गई है लेकिन ऐसी खबरें सिर्फ मीडिया और अखबारों तक ही रहती थी. दोनों की ही जोड़ी ने देश की जनता के सामने कभी ऐसा जाहिर नहीं होने दिया कि इनके बीच कभी अनबन भी हो सकती है. इनकी जोड़ी के बाद लोगों ने शाह और मोदी की जोड़ी को भी उतना ही प्यार दिया.

भाजपा के निर्माण के समय से ही राम मंदिर हमेशा से ही केंद्र बिंदु रहा. लाल कृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा ने BJP के साथ ही देशभर के लोगों में राम मंदिर को लेकर एक अलख तो जगाई ही थी. इसके साथ ही लाल कृष्ण आडवाणी की इस यात्रा को BJP के अस्तित्व को जन-जन तक पहुंचाने के लिए उठाया गया सबसे अहम कदम माना जाता है. हालांकि अब राम मंदिर का निर्माण कार्य शुरु हो गया है. कोर्ट के फैसले के साथ ही मंदिर में एक BJP के पीएम ने ही भूमि पूजन करवाया है. ऐसे में इस बात से तो इनकार नहीं किया जा सकता है कि BJP की स्थापना के समय जो देवंगत नेताओं ने देश के लोगों को जो सपना दिखाया था वो पूरा हो गया है।

साभार https://www.nayaindia.com/ से

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